नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — एप्पल का नया प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में उम्मीद के मुताबिक खरीदारों को नहीं लुभा पा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स की मांग में अचानक सुस्ती दर्ज की गई है। इस बदलते हालात को देखते हुए टेक दिग्गज एप्पल ने अपने ग्लोबल सप्लायर्स को इस नए फोन का प्रोडक्शन तुरंत प्रभाव से घटाने के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि महंगे पार्ट्स और चिप्स की कीमतों का सीधा असर फोन की अंतिम कीमत पर पड़ा है, जिससे आम ग्राहक अब नया फोन खरीदने से कतरा रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस पूरे मामले की जमीनी पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तकनीकी और बाजार से जुड़े कारण सामने आए।
बाजार में सुस्त पड़ी मांग के पीछे सबसे बड़ा कारण फोन में इस्तेमाल होने वाली महंगी चिप्स को माना जा रहा है। चिप निर्माताओं की लागत बढ़ने के कारण एप्पल को अपने इन नए मॉडल्स की कीमत ऊंची रखनी पड़ी है। यही वजह है कि भारत समेत कई बड़े वैश्विक बाजारों में इस फोन के लिए खरीदार खुलकर आगे नहीं आ रहे हैं। शुरुआती बिक्री के आंकड़ों में गिरावट को देखते हुए विभिन्न सप्लाई चेन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एप्पल ने अपने ऑर्डर में करीब 15 से 20 फीसदी तक की भारी कटौती कर दी है। कंपनी को यह डर सता रहा है कि अगर स्टॉक ज्यादा बचा रहा, तो आने वाले महीनों में उसे भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
आईफोन 18 प्रो के रंग बदलने की अजीब शिकायत
उत्पादन घटने की चर्चाओं के बीच एक और बड़ी तकनीकी समस्या सामने आई है जिसने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। कई शुरुआती खरीदारों और टेक एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक आईफोन 18 प्रो के बॉडी का रंग बिना किसी स्पष्ट कारण के फीका पड़ रहा है या उसमें हल्का बदलाव आ रहा है। वियतनाम और अन्य एशियाई बाजारों से आई इन रिपोर्टों ने सोशल मीडिया पर खलबली मचा दी है। हालांकि एप्पल की तरफ से इस रंग बदलने की समस्या पर अभी तक कोई आधिकारिक और संतोषजनक बयान सामने नहीं आया है। इस तकनीकी खामी की खबर फैलने के बाद से वे ग्राहक भी असमंजस में हैं जो इस महंगे फोन को खरीदने की योजना बना रहे थे।
ऐसी तकनीकी शिकायतों और भारी-भरकम कीमत के कारण फोन का क्रेज इस बार थोड़ा फीका नजर आ रहा है। भारत के स्थानीय बाजारों में भी रिटेल विक्रेताओं का कहना है कि लोग आईफोन के पिछले मॉडल्स या अन्य ब्रांड्स के विकल्पों को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। पहले जहां हर नए मॉडल की लॉन्चिंग पर लंबी कतारें लगती थीं, इस बार वह उत्साह नदारद है। जानकारों का मानना है कि जब तक कंपनी इन रंग बदलने वाली तकनीकी कमियों को दूर नहीं करती और कीमतों में कोई राहत नहीं देती, तब तक बिक्री में बड़ा सुधार होना मुश्किल है।
सप्लायर्स पर दबाव और वैश्विक बाजार का असर
एप्पल द्वारा प्रोडक्शन घटाए जाने के फैसले का सीधा असर इसके पार्ट्स सप्लाई करने वाली कंपनियों पर पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया और ताइवान समेत कई देशों के सप्लायर्स को एप्पल ने अपने वीकली और मंथली टारगेट कम करने को कह दिया है। इस अचानक आए बदलाव से उन छोटी और मझोली कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है जो एप्पल के लिए विशेष पुर्जे तैयार करती थीं। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालातों में लोग अपनी गाढ़ी कमाई किसी फोन पर फूंकने से पहले दो बार सोच रहे हैं। ऐसे में महंगे प्रीमियम स्मार्टफोंस की बिक्री प्रभावित होना एक स्वाभाविक आर्थिक चक्र बन गया है।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई अन्य बाजारों में भी आईफोन 18 प्रो मैक्स का जादू इस बार पूरी तरह नहीं चल पाया है। ग्राहकों की घटती दिलचस्पी और तकनीकी शिकायतों ने एप्पल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब देखना यह होगा कि कंपनी आने वाले दिनों में इस मंदी से निपटने के लिए दाम घटाने जैसा कोई बड़ा कदम उठाती है या फिर किसी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इन कमियों को दूर करने की कोशिश करती है। फिलहाल तो बाजार में सुस्ती का यह दौर बना हुआ है और खरीदार बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।





