नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो के संभावित आईपीओ को लेकर बाजार में चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच कंपनी की निदेशक ईशा अंबानी ने जियो के जन्म की 16 साल पुरानी एक बहुत ही दिलचस्प कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके परिवार के एक छोटे से अनुभव ने आगे चलकर भारत की पूरी डिजिटल तस्वीर ही बदल दी। यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक सामान्य सी तकनीकी समस्या से देश का सबसे बड़ा डेटा नेटवर्क खड़ा हो गया। आज हर हाथ में स्मार्टफोन और सस्ता इंटरनेट है, लेकिन इसकी नींव बहुत पहले पड़ चुकी थी।
ईशा अंबानी ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि यह बात करीब 16 साल पुरानी है। उनके पिता और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी अपने घर पर एक महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन देख रहे थे। अचानक इंटरनेट की स्पीड इतनी धीमी हो गई कि वीडियो बार-बार रुकने लगा। उस समय घर में इंटरनेट कनेक्शन बहुत धीमा और अस्थिर था। उस धीमी रफ्तार से मुकेश अंबानी बेहद परेशान हुए और उन्होंने वहीं से तय किया कि भारत में इंटरनेट की यह स्थिति बदलनी होगी। उस एक पल ने देश की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति की पटकथा लिख दी थी।
धीमी इंटरनेट स्पीड से कैसे हुई जियो की शुरुआत?
घर पर आई उस तकनीकी रुकावट के बाद रिलायंस के भीतर ही सोच बदल गई। मुकेश अंबानी ने तभी महसूस कर लिया कि आने वाला समय डेटा और इंटरनेट का ही है। उन्होंने अपनी टीम को निर्देश दिया कि एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाए जो देश के हर कोने तक तेज रफ्तार इंटरनेट पहुंचा सके। इसी सोच के साथ रिलायंस जियो की नींव रखी गई। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि यह प्रोजेक्ट भारत के टेलीकॉम बाजार में भूचाल ला देगा। कंपनी ने चुपचाप टावर लगाए और फाइबर नेटवर्क बिछाना शुरू कर दिया।
साल 2016 में जब जियो ने आधिकारिक तौर पर बाजार में कदम रखा तो सब कुछ बदल गया। उस समय देश में कॉलिंग और इंटरनेट बहुत महंगे हुआ करते थे। जियो ने आते ही ग्राहकों को मुफ्त वॉयस कॉल और बेहद सस्ता डेटा देना शुरू किया। इस एक कदम से भारत के करोड़ों आम लोगों के लिए इंटरनेट चलाना आसान हो गया। जिन लोगों ने कभी स्मार्टफोन पर वीडियो देखने की सोची भी नहीं थी, वे रातों-रात डिजिटल दुनिया से जुड़ गए। आज शिक्षा, बैंकिंग और मनोरंजन सब कुछ मोबाइल पर आ गया है, और इसकी शुरुआत एक धीमी इंटरनेट स्पीड की शिकायत से हुई थी।
अब आईपीओ को लेकर बाजार में क्यों है हलचल?
जियो की इस पुरानी कहानी के सामने आने का समय बहुत महत्वपूर्ण है। शेयर बाजार में इन दिनों जियो के संभावित आईपीओ को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जल्द ही अपनी इस सबसे वैल्यूएबल डिजिटल कंपनी को शेयर बाजार में उतार सकती है। निवेशक लंबे समय से इस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी ने पिछले कुछ सालों में ग्राहकों की संख्या और अपनी कमाई के मामले में बाजार में मजबूत पकड़ बना ली है। यही वजह है कि इसके आईपीओ को लेकर हर निवेशक के मन में कई सवाल हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जियो का आईपीओ देश के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। कंपनी के पास देश का सबसे बड़ा ग्राहक आधार है और वह लगातार 5जी सेवाओं का विस्तार कर रही है। ईशा अंबानी द्वारा साझा की गई यह पुरानी कहानी निवेशकों को कंपनी की जड़ों और उसकी दूरदृष्टि से जोड़ने का काम करती है। यह दिखाता है कि कैसे एक पारिवारिक जरूरत को देश की जरूरत में बदल दिया गया। आने वाले दिनों में आईपीओ की तारीख और अन्य औपचारिकताओं को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है।
ग्राहकों और निवेशकों को अब किन बातों का रखना होगा ध्यान?
आम मोबाइल यूजर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि जियो के शेयर बाजार में आने से उनकी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी का पूरा ध्यान अभी भी अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने और सस्ते प्लान देने पर है। वहीं जो लोग शेयर बाजार में निवेश करते हैं, वे कंपनी की वित्तीय सेहत और पिछले कुछ तिमाहियों के मुनाफे पर नजर बनाए हुए हैं। जियो की प्रति यूजर कमाई और डेटा खपत के आंकड़े लगातार मजबूत बने हुए हैं, जो किसी भी कंपनी के लिए अच्छे संकेत माने जाते हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, रिलायंस समूह अपने सभी निवेशकों को उचित समय पर आधिकारिक जानकारी देगा। फिलहाल सोशल मीडिया और बाजार में चल रही चर्चाएं केवल शुरुआती अनुमानों पर आधारित हैं। जैसे-जैसे आईपीओ की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, सेबी के नियमों के तहत सारी जानकारियां सार्वजनिक कर दी जाएंगी। तब तक ग्राहकों के लिए यह जानना दिलचस्प रहा कि उनके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन और तेज इंटरनेट के पीछे ठीक 16 साल पहले कौन सा वाकया हुआ था।




