नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — केरल के एक सड़सठ साल के बुजुर्ग ने अपनी काबिलियत और मेहनत का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कबाड़ और सामान्य सामान का इस्तेमाल करके घर पर ही एक पूरी तरह काम करने वाली इलेक्ट्रिक कार बना डाली है। यह गाड़ी पर्यावरण के अनुकूल है और इसे चलाना बेहद सस्ता पड़ता है। आज के समय में जहां पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं, वहां इस बुजुर्ग का यह आविष्कार आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत और प्रेरणा बन गया है।
सामने आई जानकारी के अनुसार, इस अनोखी इलेक्ट्रिक कार की सबसे बड़ी खासियत इसका खर्च है। यह गाड़ी महज पांच रुपये की बिजली खर्च करने पर साठ किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। बुजुर्ग ने इस कार को बनाने में बहुत ज्यादा तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया है, बल्कि अपनी सूझबूझ और देसी जुगाड़ से इसे सड़क पर चलाने लायक बना दिया है। इस गाड़ी की अधिकतम गति और बनावट को छोटे शहरों और गांवों के हिसाब से बहुत ही उपयोगी माना जा रहा है।
घर पर बनी कार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
इस इलेक्ट्रिक कार का वीडियो सामने आते ही इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है। लोग इस बुजुर्ग की रचनात्मकता की तारीफ कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि कैसे एक आम इंसान ने बिना किसी बड़ी इंजीनियरिंग की डिग्री के इतनी शानदार गाड़ी बना दी। वीडियो में कार को गली की सड़कों पर आसानी से चलते हुए साफ देखा जा सकता है। इसमें बैठने की उचित व्यवस्था के साथ-साथ ड्राइविंग का पूरा बुनियादी सेटअप भी तैयार किया गया है, जो किसी सामान्य कार जैसा ही अहसास कराता है।
देश के कई हिस्सों में इस तरह के देसी प्रयोग अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन यह गाड़ी अपनी लंबी रेंज और बेहद कम खर्च के कारण अलग ही पहचान बना रही है। गांव और छोटे कस्बों में आने-जाने के लिए इस तरह के वाहन बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि व्यावसायिक रूप से बाजार में बिकने वाली गाड़ियों और टाटा जैसी बड़ी कंपनियों की इलेक्ट्रिक गाड़ियों के मुकाबले इसकी सुरक्षा मानक और आधुनिक फीचर्स भले ही कम हों, लेकिन कम लागत के मामले में इसका कोई मुकाबला नहीं है।
बाजार में पारंपरिक कारों और बढ़ती महंगाई के बीच नई उम्मीद
एक तरफ जहां लोग टाटा टियागो या मारुति जैसी कंपनियों की गाड़ियां खरीदने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं और सर्विसिंग तथा ईंधन के भारी खर्च से परेशान रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के घरेलू आविष्कार लोगों को नया रास्ता दिखाते हैं। हाल ही के दिनों में कार सर्विसिंग के दौरान गाड़ियों में आग लगने और बीमा क्लेम न मिलने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिनसे आम ग्राहक परेशान हैं। ऐसे माहौल में इस बुजुर्ग की बनाई गई इलेक्ट्रिक कार लोगों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि सादगी और कम बजट में भी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
स्थानीय स्तर पर इस बुजुर्ग को देखने और उनकी इस कार की सवारी करने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। लोग इनसे प्रेरणा लेकर इस तरह के प्रोजेक्ट अपने स्तर पर शुरू करने की सोच रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस तरह के आविष्कारों को सरकार या किसी बड़ी ऑटोमोबाइल संस्था द्वारा आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है, ताकि ग्रामीण इलाकों में परिवहन को और सस्ता बनाया जा सके।
भविष्य की तकनीक और स्थानीय स्तर पर प्रोत्साहन की जरूरत
इस पूरी घटना से यह बात साफ हो जाती है कि भारत के आम नागरिकों में हुनर की कोई कमी नहीं है। जरूरत बस इस बात की है कि ऐसे स्थानीय हुनरबाजों को सही मंच और थोड़ी आर्थिक मदद मिले ताकि वे अपने इन आइडिया को और बेहतर बना सकें। आने वाले दिनों में अगर इन गाड़ियों को सुरक्षा के मानकों पर परखा जाए और इनमें थोड़ा सुधार किया जाए, तो यह छोटे सफर के लिए देश के गांवों और कस्बों में क्रांति ला सकती हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि आम जनता ऐसे देसी और किफायती आविष्कारों का पूरी तरह समर्थन कर रही है।





