सिनेमा के पर्दे से अचानक गायब हो गया एक जाना-पहचाना चेहरा
हिंदी सिनेमा के गलियारों में कई ऐसी कहानियां दबी हुई हैं जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा रहस्यमय और चौंकाने वाली हैं। संजय दत्त और अरशद वारसी की सुपरहिट फिल्म 'मुन्ना भाई MBBS' को भला कौन भूल सकता है। इस फिल्म में संजय दत्त ने अपने खास अंदाज में एक निराश मरीज को जीने की नई राह दिखाई थी। फिल्म में वही दिल टूटा हुआ मरीज और खुदकुशी की कोशिश करने वाला किरदार निभाने वाले अभिनेता विशाल ठक्कर आज फिल्मी दुनिया और अपनों से कोसों दूर हैं। पिछले दस साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उनके साथ क्या हुआ, यह आज भी एक ऐसा अनसुलझा सवाल बना हुआ है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।
वर्ष 2003 में आई इस फिल्म के बाद विशाल ठक्कर को मनोरंजन जगत में एक अलग पहचान मिली थी। इस शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई लोकप्रिय प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बने। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ टेलीविजन के दुनिया में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई और कई नामी धारावाहिकों में काम किया। उनकी अभिनय यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही थी, लेकिन साल 2016 की शुरुआत ने उनकी जिंदगी और उनके परिवार के लिए एक ऐसा काला अध्याय लिख दिया जिससे उबरना मुमकिन नहीं हो पाया।
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टेलीविजन के लोकप्रिय शो और फिल्मों में बिखेरा था अभिनय का जादू
विशाल ठक्कर ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर टीवी इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बनाई थी। उन्होंने देश के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले कॉमेडी शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में भी काम किया था। इसके अलावा उन्हें 'थपकी प्यार की', 'आहट' और 'किस देश में है मेरा दिल' जैसे चर्चित धारावाहिकों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हुए देखा गया था। बड़े पर्दे पर भी उन्होंने 'टैंगो चार्ली' जैसी फिल्मों में अपनी कला का प्रदर्शन किया था।
सह कलाकारों और निर्देशकों के बीच उनकी छवि एक मेहनती और समर्पित कलाकार की थी। करियर की सीढ़ियां चढ़ रहे इस युवा अभिनेता के अचानक इस तरह गायब हो जाने से पूरी टेलीविज़न इंडस्ट्री सन्न रह गई थी। उनके चाहने वाले और सहकर्मी आज भी इस बात पर यकीन नहीं कर पाते कि एक जाना-पहचाना कलाकार बिना किसी सुराग के यूं हवा में कैसे गायब हो सकता है।
आखिरी रात क्या हुआ था मुलुंड वाले घर में?
31 दिसंबर 2015 की सर्द रात को विशाल ठक्कर अपने परिवार के साथ मुंबई के मुलुंड स्थित अपने घर पर मौजूद थे। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह नया साल उनके परिवार के लिए जिंदगी भर का गम लेकर आने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस शाम विशाल ने अपनी मां दुर्गा से आग्रह किया था कि वे उनके साथ सिनेमाघर चलकर हॉलीवुड फिल्म 'स्टार वार्स: द फोर्स अवेकन्स' देखें। हालांकि, उस समय उनकी मां ने उनके साथ जाने से मना कर दिया था। बाद में यही बात उनके लिए जिंदगी भर का पछतावा बन गई, क्योंकि वह अपने बेटे को देखने का आखिरी मौका गंवा चुकी थीं।
रात करीब साढ़े दस बजे विशाल ने अपनी मां से जरूरत के लिए 500 रुपये उधार लिए और घर से बाहर निकल गए। इसके कुछ ही घंटों बाद, यानी रात के करीब एक बजे, उन्होंने अपने पिता महेंद्र को एक टेक्स्ट मैसेज भेजा। उस आखिरी संदेश में उन्होंने लिखा था कि वह एक पार्टी में जा रहे हैं और कल सुबह उनकी मुलाकात होगी। परिवार के लिए अपने बेटे या भाई की तरफ से यह आखिरी शब्द साबित हुए।
फाउंटेन होटल से शुरू हुआ रहस्यों का सिलसिला और आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट
पुलिस जांच और बयानों के अनुसार, विशाल ने नए साल की वह रात अपनी गर्लफ्रेंड के साथ अहमदाबाद हाईवे के पास स्थित एक रिसॉर्ट में बिताई थी। अगली सुबह जब दोनों वापस लौट रहे थे, तो वे घोड़बंदर रोड पर स्थित फाउंटेन होटल के पास चाय पीने के लिए रुके। यहीं पर विशाल ने अपनी साथी को बताया कि उन्हें अंधेरी इलाके में अपने किसी दोस्त से मिलने जाना है और वह वहां से अलग हो गए।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, नए साल के दिन सुबह करीब पौने बारह बजे विशाल को अंधेरी जाने के लिए एक ऑटोररिक्शा में बैठते हुए देखा गया था। उस दिन दोपहर के वक्त उनकी आखिरी डिजिटल गतिविधि दर्ज की गई।
"विशाल ने दोपहर में करीब बारह बजकर दस मिनट पर अपने फेसबुक अकाउंट से नए साल की शुभकामनाएं देने वाला एक पोस्ट साझा किया था। यह उनकी जिंदगी की आखिरी डिजिटल उपस्थिति थी, जिसके तुरंत बाद उनका मोबाइल फोन हमेशा के लिए बंद हो गया।" — जांच अधिकारी
पुलिस की व्यापक जांच और अनसुलझे सवालों के घेरे में जिंदगी
घटना के तुरंत बाद परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी से जांच शुरू की थी। पुलिस ने उनके कॉल डिटेल्स, बैंक खातों और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शुरुआत में पुलिस का शक उनकी गर्लफ्रेंड पर भी गया था, क्योंकि दोनों के बीच किसी बात को लेकर अनबन की बात सामने आई थी। हालांकि, गहन पूछताछ के बाद पुलिस को ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे किसी आपराधिक साजिश की पुष्टि हो सके।
सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि विशाल के बैंक खातों से पैसे निकालने का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, न ही किसी ने फिरौती के लिए परिवार से संपर्क किया और न ही किसी अस्पताल में उनके हुलिए से मिलता-जुलता कोई अज्ञात मरीज मिला। अपहरण, हत्या या खुद की मर्जी से कहीं दूर चले जाने की आशंकाओं के बीच पुलिस फाइलें आज भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं। आज दस साल बाद भी विशाल ठक्कर की जिंदगी एक गहरा और वीरान रहस्य बनी हुई है।








