देश की सुरक्षा में एक बार फिर बड़ा सेंध लगने का मामला सामने आया है। 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के कोयंबटूर से भारतीय नौसेना के एक जवान को पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों के हनीट्रैप में फंसने और देश की गोपनीय रक्षा जानकारियां साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार दुश्मन देश सामरिक ठिकानों पर तैनात हमारे सुरक्षाकर्मियों को डिजिटल माध्यमों से निशाना बना रहे हैं।
डिजिटल जासूसी और हनीट्रैप का खतरनाक खेल
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी जवान सोशल मीडिया के जरिए एक पाकिस्तानी महिला एजेंट के संपर्क में आया था। महीनों तक चली चैटिंग, वर्चुअल मुलाकातों और भावनात्मक ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसकर जवान ने नौसेना के रणनीतिक मूवमेंट, जहाजों की तैनाती और अन्य सेंसिटिव डिफेंस डेटा साझा कर दिए। हमारी खोजी टीम द्वारा जुटाए गए शुरुआती इनपुट्स बताते हैं कि खुफिया एजेंसियों ने डिजिटल फुटप्रिंट्स और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर इस पर लंबे समय से नजर रखी हुई थी।
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कोयंबटूर में केंद्रीय एजेंसियों की दबिश
कोयंबटूर में हुई इस अचानक कार्रवाई से सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया है। सैन्य खुफिया इकाई (Military Intelligence) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने पुख्ता सबूत मिलने के बाद इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। आरोपी जवान के पास से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (मोबाइल फोन और लैपटॉप) को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने कितनी और कौन-कौन सी सामरिक जानकारियां सीमा पार बैठे हैंडलर्स को भेजी हैं।
बढ़ता सामरिक खतरा और सेना में एडवाइजरी
इस ताजा घटना ने एक बार फिर रक्षा बलों के भीतर सुरक्षा प्रोटोकॉल और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि भारतीय सेना और नौसेना द्वारा समय-समय पर 'डिजिटल डिटॉक्स' और सोशल मीडिया पॉलिसी को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, बावजूद इसके इस तरह के मामले सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई
फिलहाल आरोपी जवान को अदालत में पेश करने के बाद रिमांड पर लिया गया है, जहां केंद्रीय और राज्य खुफिया एजेंसियां उससे संयुक्त रूप से पूछताछ कर रही हैं। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के बारे में भी सुराग तलाशे जा रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस जासूसी रैकेट में कोई अन्य व्यक्ति तो शामिल नहीं है। 'द फ्रीलान्स' इस मामले की पल-पल की अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।








