नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के डिजिटल सफर पर एक बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत तकनीकी रूप से पूरी तरह बदल चुका है। अब आम आदमी के बैंक खाते और अस्पताल की सुविधाएं सीधे उनके मोबाइल फोन की स्क्रीन पर उपलब्ध हैं। इस तकनीकी क्रांति ने देश के आम नागरिकों की जिंदगी को बहुत आसान बना दिया है। पहले के समय में जो काम हफ्तों और महीनों में होते थे, वे अब चंद सेकंड में घर बैठे हो जाते हैं। सरकार की डिजिटल नीतियों ने देश के हर कोने तक इंटरनेट और तकनीक की पहुंच को संभव बना दिया है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने सरकारी योजनाओं में हो रहे पैसों के लेन-देन का भी जिक्र किया। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की व्यवस्था ने देश के पांच लाख करोड़ रुपये बचा लिए हैं। पहले सरकारी योजनाओं का पैसा बिचौलियों और गलत हाथों में चला जाता था। इस नई डिजिटल व्यवस्था ने भ्रष्टाचार की हर गुंजाइश को लगभग खत्म कर दिया है। अब सरकारी मदद सीधे असली हकदार के बैंक खाते में पहुंचती है। इस पारदर्शिता के कारण बिचौलियों की मुफ्त की कमाई पूरी तरह बंद हो चुकी है।
जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हुई, क्या वे प्यार करेंगे?
प्रधानमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जिनकी मुफ्त की कमाई अब बंद हो चुकी है, वे लोग भला मोदी से प्यार क्यों करेंगे। बिचौलियों का नेटवर्क टूटने से एक खास वर्ग को राजनीतिक और आर्थिक रूप से बड़ा झटका लगा है। पहले गरीबों के नाम पर आने वाला पैसा रास्ते में ही गायब हो जाता था। तकनीक के इस्तेमाल से इस पुरानी और भ्रष्ट व्यवस्था पर पूरी तरह लगाम लग गई है। आज आम जनता इस बात को भली-भांति समझती है कि तकनीक ने उनके हक का पैसा बचाया है। सरकार का यह कदम देश की आर्थिक सेहत सुधारने में सबसे बड़ा टॉनिक साबित हुआ है।
डिजिटल तरक्की के इन तमाम फायदों के बीच प्रधानमंत्री ने तकनीक के काले सच यानी डीपफेक पर भी देश का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन रहे हैं। फर्जी वीडियो और तस्वीरों के जरिए लोगों को भ्रमित करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए देश को कड़े कानूनी और तकनीकी कदम उठाने होंगे। समाज के हर वर्ग को इस नई चुनौती के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। सरकार इस मामले में लगातार सुरक्षा के नए उपाय तलाश रही है ताकि साइबर धोखाधड़ी पर पूरी रोक लग सके।
बदलती तकनीक के साथ वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा
आज से कुछ साल पहले तक भारत तकनीकी आयोजनों में सिर्फ एक दर्शक की तरह शामिल होता था। लेकिन आज भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो तकनीक की दिशा तय करते हैं। मोबाइल कांग्रेस जैसे बड़े आयोजनों में आज दुनिया भर के सौ से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं। भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि एक बड़ा निर्माता बन चुका है। देश में बने सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट डेटा ने गांव-गांव तक क्रांति ला दी है। लोकल से ग्लोबल तक का यह सफर देश के युवाओं की मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति का नतीजा है।
जमीनी स्तर पर भी इसका असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। ठेले वाला हो या रिक्शा चालक, हर कोई आज डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहा है। नकदी का चलन कम होने से छोटे व्यापारियों को भी अपने कारोबार में सुरक्षा महसूस हो रही है। देश का हर नागरिक अब इस डिजिटल क्रांति का सीधा हिस्सा बन चुका है। सरकार की नीतियां और तकनीक का तालमेल आने वाले दिनों में देश को और मजबूत बनाएगा। द फ्रीलान्स की इस पड़ताल में यह साफ हुआ है कि तकनीक का यह बदलाव आम जनता के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आया है।
भविष्य की चुनौतियां और साइबर सुरक्षा के कड़े उपाय
डिजिटल दुनिया जितनी आसान दिखती है, उतनी ही उसमें सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ गई है। आने वाले समय में देश के सामने साइबर अपराध से निपटना सबसे बड़ी चुनौती होगी। सरकार और टेलीकॉम कंपनियों को मिलकर एक ऐसा सुरक्षित घेरा बनाना होगा जिसमें हर नागरिक का डेटा सुरक्षित रहे। वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ही सकारात्मक इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। आम जनता को भी यह समझना होगा कि ओटीपी या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। सतर्कता और तकनीक का यह मिलाजुला रूप ही देश के डिजिटल भविष्य की असली ताकत बनेगा।






