प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत से वृंदावन से लेकर जबलपुर तक मचा कोहराम
उत्तर प्रदेश के पवित्र धार्मिक शहर वृंदावन में आध्यात्मिक वक्ता और संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ी एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे संत समाज और देश भर के श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। प्रसिद्ध कथावाचक के युवा शिष्य दीपक लोधी, जिन्हें रसिक दुलारी शरण के नाम से भी जाना जाता था, की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत अब एक गहरा रहस्य बनती जा रही है। इस घटना के बाद से लगातार नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि संत समाज में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के परसवाड़ा के रहने वाले 27 वर्षीय दीपक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का दावा है कि उनका बेटा सेना में जाने का सपना देखता था, लेकिन जब वह इस दिशा में सफल नहीं हुआ तो उसने अपना पूरा जीवन अध्यात्म और भगवान की भक्ति में समर्पित करने का निर्णय लिया। हालांकि, इस फैसले के बाद परिवार के साथ जो हुआ, उसने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया है। माता-पिता का आरोप है कि पिछले दो वर्षों के दौरान वे कई बार वृंदावन स्थित आश्रम पहुंचे, लेकिन उन्हें अपने बेटे से मिलने तक नहीं दिया गया।
मृतक के परिजनों ने बताया कि वे लगभग 10 से ज्यादा बार आश्रम के चक्कर काट चुके थे, मगर हर बार उन्हें बैरंग लौटा दिया जाता था। कभी यह कहा जाता था कि दीपक यहां मौजूद नहीं है, तो कभी यह दलील दी जाती थी कि वह किसी खास सेवा में व्यस्त है। अब अचानक से उनके पास बेटे की मौत की खबर पहुंचती है, जिसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। मां उमा पटेल का यह दर्द हर किसी की आंखें नम कर रहा है कि उन्होंने दो साल तक अपने बेटे का चेहरा नहीं देखा और अब सीधे उसकी लाश मिली है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कमरे से बरामद ग्राइंडर ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई और पुलिस को घटनास्थल से कुछ ऐसी चीजें बरामद हुईं, जिन्होंने आत्महत्या के सिद्धांत पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दीपक ने कथित तौर पर गुरुकृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से छलांग लगाई थी, जिसके बाद सीसीटीवी फुटेज में उसे गिरते हुए भी देखा गया है। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और अत्यधिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट में उसके शरीर के एक संवेदनशील हिस्से पर गहरी चोट और कटने की बात सामने आने के बाद मामला पूरी तरह से उलझ गया है। इसके अलावा, पुलिस जब्ती के दौरान मृतक के कमरे से एक ग्राइंडर (मशीन) भी बरामद हुआ है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि कमरे में मिले ग्राइंडर और शरीर पर आई भीषण चोटों का आपस में क्या संबंध है। क्या यह महज एक हादसा या आत्महत्या है, या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश है, यह अभी भी एक अनसुलझा सवाल बना हुआ है।
पुलिस ने इस मामले में सभी उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मृतक के मोबाइल डेटा को खंगालना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही विसरा और ब्लड सैम्पल्स को फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) जांच के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह और परिस्थितियों पर से पर्दा उठ पाएगा।
संत समाज ने बुलाई आपात बैठक, घटना को बताया आतंकवादी जैसा कृत्य
दीपक लोधी की संदग्धि मौत से आहत वृंदावन के संत समाज ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। परिक्रमा मार्ग स्थित ललित कुंज आश्रम में 'धर्म रक्षा संघ' के बैनर तले एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कई प्रतिष्ठित संत और महंत शामिल हुए। बैठक में वक्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे आत्महत्या मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया। संतों का साफ कहना है कि कोई भी युवा साधु इस तरह की वीभत्स स्थिति खुद अपने साथ नहीं कर सकता है।
बैठक को संबोधित करते हुए महंत गंगादास जी महाराज ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी और प्रशासन से इस मामले में बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाने की मांग की। उन्होंने घटना की तुलना गंभीर अपराधों से करते हुए इसकी तुलना तक कर डाली।
"उस महात्मा के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार हुआ है। यह काम किसी भले आदमी ने नहीं, बल्कि आतंकवादी जैसी प्रवृत्ति वाले शख्स ने ही किया है। इसलिए इस घटना के लिए जिम्मेदार शख्स पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और केली कुंज जैसे परिसरों में चल रही गतिविधियों की जांच हो।" — महंत गंगादास जी महाराज, संत समाज
संतों ने आरोप लगाया कि इस इलाके में पहले भी कई प्रकार की संदिग्ध गतिविधियां और जमीनों पर कब्जे जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने प्रशासन से यह मांग भी की है कि इस मामले की जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रखी जाए, बल्कि इसकी तह तक जाने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया जाए।
मथुरा के संतों की दो टूक: निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मथुरा और वृंदावन के अन्य प्रमुख संतों ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है। महंत मोहिनी शरण महाराज ने कहा कि युवा साधु की इस तरह से हुई रहस्यमयी मौत ने पूरे संत जगत को कलंकित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की इस मामले में चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है। यदि समय रहते सच्चाई सामने नहीं आई, तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा।
संतों ने सरकार के समक्ष अपनी मांग रखते हुए कहा कि यदि इस प्रकरण में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में संत समाज की ओर से एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। संतों का यह भी कहना है कि इस घटना से वृंदावन की पवित्र छवि को धूमिल करने की साजिश रची जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इसके साथ ही, संत समाज ने वृंदावन में फैल रही अन्य असामाजिक गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि आज के समय में कई ऐसे लोग भी साधु का भेष बनाकर, लंबी जटाएं और तिलक लगाकर घूम रहे हैं जिनका सनातन धर्म या किसी अखाड़े से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। ऐसे तत्वों की पृष्ठभूमि की भी गहन जांच होनी चाहिए ताकि शहर की पवित्रता बनी रहे।
मादक पदार्थों के बढ़ते चलन पर संतों की चिंता, प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरी घटना की आड़ में संतों ने वृंदावन में पनप रहे अन्य सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी है। बैठक के दौरान संतों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि किस तरह से धर्मनगरी में चरस, अफीम और अन्य मादक पदार्थों का अवैध कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। उनका कहना है कि इन नशीले पदार्थों की चपेट में अब युवा साधु और संत भी आने लगे हैं, जो कि एक बहुत बड़ा खतरा है।
संतों ने पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि वे धार्मिक स्थलों के आसपास सक्रिय इस तरह के ड्रग्स नेटवर्क पर कड़ा प्रहार करें। उनका मानना है कि अगर समय रहते इन असामाजिक तत्वों पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में ऐसी और भी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल, पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है और हर कोई एफएसएल रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहा है। लेकिन जिस तरह से इस मामले में मां का दर्द, कमरे से मिला ग्राइंडर और संत समाज का आक्रोश सामने आया है, उसने इस घटना को एक हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मुद्दा बना दिया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक पूरी सच्चाई को सामने लाने में कामयाब होता है।








