राम मंदिर चढ़ावा चोरी: गणना कर्मियों ने ही खोला भ्रष्टाचार का राज
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में हुई हेराफेरी के मामले में पुलिस ने अदालत के समक्ष आधिकारिक तौर पर आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इस चार्जशीट के सामने आने के बाद कई चौकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि मंदिर परिसर के भीतर किस प्रकार सुनियोजित तरीके से खेल चल रहा था। पुलिस की इस विस्तृत रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि चढ़ावा चोरी के इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश बाहर के लोगों ने नहीं, बल्कि अंदर काम करने वाले गणना कर्मियों ने ही किया था।
जांच दस्तावेजों के मुताबिक, मंदिर के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को इस बड़े घोटाले की पहली भनक भी इन्हीं कर्मचारियों के जरिए लगी थी। जब वे चार जून को दिल्ली से अयोध्या की यात्रा पर थे, तब उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से बेहद चौंकाने वाले डिजिटल सुराग मिले थे। इन संदेशों के साथ एक वीडियो भी संलग्न था, जिसमें साफ तौर पर एक बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां छिपाई हुई दिखाई दे रही थीं।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वह छिपाई गई रकम सवा दो लाख रुपये के आसपास थी, जिसे पुलिस ने बाद में अपनी बरामदगी सूची में भी शामिल किया। गवाहों और चार्जशीट के ब्यौरे से यह भी पता चलता है कि गणना कक्ष में तैनात कुछ लड़के काफी समय से इस प्रकार की चोरी को अंजाम दे रहे थे और इस गोरखधंधे में कुल 67 लोगों के शामिल होने का अंदेशा जताया गया है।
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लैपटॉप के डिजिटल सबूत और ट्रस्ट के भीतर की हलचल
घटना के अगले दिन यानी पांच जून को तत्कालीन महासचिव चंपत राय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर एक अहम बैठक हुई थी। इस उच्चस्तरीय बैठक में ट्रस्ट के कई प्रमुख पदाधिकारी जैसे डॉ. अनिल कुमार मिश्र, गोपाल राव और नरेंद्र शामिल हुए थे। बैठक के दौरान नरेंद्र नामक व्यक्ति ने अपने लैपटॉप पर कुछ वीडियो फुटेज दिखाए, जिसने राम मंदिर प्रबंधन की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
लैपटॉप पर दिखाए गए उन वीडियो फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता था कि कैसे दान पेटियों के चढ़ावे और नकदी की गिनती करते वक्त कुछ गणना कर्मी बड़ी चालाकी से रुपयों पर हाथ साफ कर रहे थे। सीसीटीवी कैमरों और अंदरूनी वीडियो ने इस बात की पुष्टि कर दी कि मंदिर के पवित्र प्रांगण में किस कदर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। गवाह आनंद कुमार चौधरी ने अपने बयान में बताया कि चार जून को जब वे अपनी ड्यूटी खत्म करके घर लौटने की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें बैंक और ट्रस्ट के कुछ अन्य कर्मियों ने रोक लिया था।
इन कर्मियों में बैंक की ओर से सत्या, ट्रस्ट के विनय श्रीवास्तव के अलावा गणना कर्मी मदन गोपाल निगम, आकाश गौड़, रितिक सिंह और एक अन्य व्यक्ति शामिल था। इन सभी ने मिलकर जिस तरह से गड़बड़ियों की कड़ियां जोड़ीं, उसी के बाद पूरा सच सतह पर आ गया और पुलिस तक यह गंभीर मामला पहुंचा।
राजनीतिक गलियारों में उबाल और कांग्रेस के तीखे सवाल
इस सनसनीखेज चार्जशीट के सार्वजनिक होने के बाद देश की सियासत में भी भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर केंद्र सरकार और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब चार जून को ही चोरी की रकम और वीडियो तत्कालीन महासचिव तक पहुंच गया था, तो उसके बाद आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में पूरे 21 दिनों की देरी क्यों की गई?
विपक्षी दलों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में चोरी की घटनाएं बिना किसी उच्च स्तरीय लापरवाही या संरक्षण के संभव ही नहीं हो सकती हैं। कांग्रेस महासचिव ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं और पूछा है कि क्या जांच का दायरा केवल छोटे-मोटे कर्मचारियों तक ही सीमित रखा जाएगा या फिर इस व्यवस्था की निगरानी करने वाले बड़े जिम्मेदारों की भी जवाबदेही तय होगी?
"चंदा चोरी और आस्था के साथ खिलवाड़ के इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि असली संरक्षणदाताओं तक जांच की आंच नहीं पहुंच रही है। देश जानना चाहता है कि इस पूरे सिंडिकेट के पीछे असल मास्टरमाइंड कौन था।" — राजनीतिक विश्लेषक एवं विपक्षी नेताओं का संयुक्त बयान
पारदर्शी जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग
चढ़ावा चोरी के इस मामले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग जोर पकड़ती जा रही है। जानकारों का मानना है कि चूंकि यह मामला करोड़ों देशवासियों की आस्था और देश के सबसे संवेदनशील धार्मिक स्थल से जुड़ा है, इसलिए इसकी तह तक जाना बेहद जरूरी है। आलोचकों का तर्क है कि यदि 105 से अधिक बार चोरी की घटनाएं सामने आने के बावजूद केवल कुछ ही लोगों को आरोपी बनाकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाएगा, तो इससे संस्था की विश्वसनीयता पर बट्टा लगेगा।
फिलहाल, पुलिस द्वारा अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है और क्या जांच की आंच उन लोगों तक भी पहुंचती है जिन पर परोक्ष रूप से व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी थी। देश की जनता टकटकी लगाए बैठी है कि रामलला के दरबार में हुई इस पवित्रता की इस लूट का पूरा सच कब और कैसे पूरी तरह बेनकाब होता है।








