दैनिक जीवन की भागदौड़ और अनियमित दिनचर्या के बीच सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है। हालांकि, जब यह दर्द सिर के पूरे हिस्से में न होकर केवल एक तरफ यानी बाईं या दाईं ओर महसूस हो, तो स्थिति अधिक कष्टदायक हो जाती है। यह दर्द कभी-कभी इतना तीखा और चुभन वाला होता है कि व्यक्ति के लिए सामान्य गतिविधियों को जारी रखना भी असंभव सा हो जाता है। मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा के इंटरनल मेडिसिन और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर विशेषज्ञ डॉ. अक्षय चुघ का कहना है कि एक तरफ होने वाले इस दर्द के पीछे कई चिकित्सीय कारण हो सकते हैं, जिन्हें समय रहते समझना बेहद जरूरी है।
माइग्रेन: एक तरफ के सिरदर्द का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर के केवल आधे हिस्से में उठने वाला तेज दर्द अमूमन माइग्रेन की ओर इशारा करता है। इस स्थिति में मरीज को ऐसा महसूस होता है जैसे सिर के भीतर कोई नस लगातार धड़क रही हो और तेज हथौड़े चल रहे हों। यह दर्द इतना असहनीय होता है कि इसके साथ उल्टी आना, जी मिचलाना, तेज रोशनी से घबराहट और आवाज के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता जैसी समस्याएं भी घेर लेती हैं।
माइग्रेन के हमलों को ट्रिगर करने वाले कई कारक हो सकते हैं। इनमें लंबे समय तक खाली पेट रहना, पर्याप्त नींद न मिलना, अत्यधिक मानसिक तनाव, बहुत तेज गंध या फिर महिलाओं में हॉर्मोनल असंतुलन शामिल हैं। जब ये ट्रिगर सक्रिय होते हैं, तो सिरदर्द का यह भयानक दौरा शुरू हो जाता है जो कई घंटों तक परेशान कर सकता है।
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आंखों का बढ़ता तनाव और ग्लूकोमा का गंभीर खतरा
डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग और आधुनिक जीवनशैली आंखों के साथ-साथ सिर की तंत्रिकाओं को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली की ओप्थल्मोलॉजी कंसलटेंट डॉ. श्रेया गुप्ता का कहना है कि जब कोई व्यक्ति लगातार घंटों तक कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर नजर गड़ाए रहता है, तो वह पलकें झपकाना भूल जाता है। इससे आंखों की मांसपेशियों पर भारी दबाव पड़ता है और धीरे-धीरे नजर कमजोर होने लगती है।
आंखों के कमजोर होने के कारण उन पर पड़ने वाला खिंचाव सिरदर्द का एक बड़ा कारण बनता है। इसके अलावा, आंख दर्द और सिरदर्द का एक अत्यंत गंभीर कारण 'ग्लूकोमा' यानी काला मोतिया भी है। इस खतरनाक स्थिति में आंखों के भीतर का दबाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे तीव्र सिरदर्द, आंखों का लाल होना, धुंधला दिखाई देना और मितली जैसी आपातकालीन स्थितियां पैदा हो जाती हैं।
गर्दन की मांसपेशियां और खराब पोश्चर का असर
यह जानकर कई लोगों को हैरानी हो सकती है कि सिर के एक तरफ उठने वाला दर्द हमेशा सीधे तौर पर दिमाग से जुड़ा नहीं होता। कई बार यह समस्या गर्दन की हड्डियों या मांसपेशियों में गड़बड़ी के कारण उत्पन्न होती है। गलत तरीके से बैठना या लंबे समय तक एक ही गलत पोश्चर में काम करना इसका सबसे मुख्य कारण माना जाता है।
इस प्रकार का दर्द आमतौर पर गर्दन या कंधे के हिस्से से अपनी यात्रा शुरू करता है। इसके बाद यह सिर के पिछले हिस्से से होता हुआ एक तरफ के माथे या आंख तक फैल जाता है। मांसपेशियों में आने वाला यह खिंचाव मरीज के लिए दिनभर असहजता का कारण बनता है और काम करने की क्षमता को कमजोर करता है।
"सिर के एक तरफ होने वाले दर्द को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि यह समस्या बार-बार परेशान कर रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर माइग्रेन, आंखों के दबाव या सर्वाइकल से जुड़ी जांच करानी चाहिए ताकि समय पर सही इलाज मिल सके।"— डॉ. अक्षय चुघ, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ
शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर बचाव के उपाय
यदि आपको भी अक्सर सिर के एक हिस्से में तेज टीस उठने की शिकायत रहती है, तो अपनी दिनचर्या पर गौर करना आवश्यक है। पर्याप्त नींद लेना, समय पर भोजन करना और स्क्रीन टाइम को सीमित करना इस समस्या से राहत पाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, लगातार दर्द बने रहने पर स्व-चिकित्सा करने के बजाय किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि शरीर के संकेतों को समय पर समझकर यदि जीवनशैली में जरूरी बदलाव किए जाएं, तो इन गंभीर सिरदर्द की समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। नियमित व्यायाम, सही पोश्चर और आंखों की उचित देखभाल के जरिए आप एक स्वस्थ और दर्दमुक्त जीवन जी सकते हैं।








