धरती के ठीक ऊपर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में हजारों स्टारलिंक सैटेलाइट लगातार चक्कर काट रहे हैं। लेकिन इन आधुनिक सैटेलाइट्स के ऊपर एक ऐसा अदृश्य और गंभीर खतरा मंडरा रहा है, जिसे इंसान चाहकर भी सीधे तौर पर रोक नहीं सकता। यह खतरा किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि हमारे अपने सूरज की तेज गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। जब सूरज पर उथल-पुथल होती है और अंतरिक्ष में तूफान उठते हैं, तो इसका सीधा असर धरती के ऊपरी वायुमंडल पर पड़ता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सौर तूफानों (Solar Storms) के दौरान सूरज से अत्यधिक ऊर्जा निकलती है, जो धरती तक पहुंचकर जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म (Geomagnetic Storm) का रूप ले लेती है। इस प्रक्रिया में धरती का ऊपरी वायुमंडल अत्यधिक गर्म हो जाता है और फैलने लगता है। वायुमंडल के फैलने से अंतरिक्ष में गैस के कणों का घनत्व बढ़ जाता है, जिससे वहां से गुजरने वाले सैटेलाइट्स पर खिंचाव या 'एटमॉस्फेरिक ड्रैग' (Atmospheric Drag) काफी बढ़ जाता है।
फरवरी 2022 की वह घटना जब आसमान में तबाह हो गए थे सैटेलाइट
इस खतरे की बानगी फरवरी 2022 में साफ देखने को मिली थी। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने एक साथ 49 स्टारलिंक सैटेलाइट लॉन्च किए थे। इन्हें शुरुआती तौर पर करीब 210 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया था, जिन्हें बाद में अपनी तय कक्षा (550 किलोमीटर) में पहुंचना था। लेकिन लॉन्चिंग के ठीक बाद अंतरिक्ष में एक शक्तिशाली जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म आ गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, उस दौरान 210 किलोमीटर की ऊंचाई पर वायुमंडल का घनत्व सामान्य से करीब 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गया था। इसके चलते सैटेलाइट्स पर भारी खिंचाव पड़ा। स्पेसएक्स के इंजीनियरों ने उन्हें बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन 49 में से 38 सैटेलाइट अपनी कक्षा में टिक नहीं पाए और वे तेजी से नीचे गिरते हुए वायुमंडल में प्रवेश कर गए, जहां भीषण गर्मी के कारण वे पूरी तरह जलकर राख हो गए।
लो अर्थ ऑर्बिट में क्यों बढ़ जाती है चुनौती?
स्टारलिंक जैसे विशाल नेटवर्क्स के सैटेलाइट्स लो अर्थ ऑर्बिट में ही काम करते हैं। इस क्षेत्र में धरती का वायुमंडल बहुत पतला होता है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं होता। सामान्य दिनों में यहां एटमॉस्फेरिक ड्रैग न के बराबर होता है, जिससे सैटेलाइट्स सुरक्षित रहते हैं। लेकिन सोलर स्टॉर्म के समय हालात पूरी तरह बदल जाते हैं।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में जैसे-जैसे अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ेगी और सौर गतिविधियां तेज होंगी, वैसे-वैसे स्पेस वेदर (Space Weather) पर पैनी नजर रखना और भी ज्यादा अनिवार्य हो जाएगा।
बढ़ता नेटवर्क और अंतरिक्ष सुरक्षा की चिंता
आज के समय में अंतरिक्ष में स्टारलिंक और अन्य कंपनियों के हजारों सैटेलाइट्स का जाल बिछ चुका है। आने वाले वर्षों में इनकी संख्या में कई गुना इजाफा होना तय है। ऐसे में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि भविष्य में इससे भी अधिक शक्तिशाली सौर तूफान आया, तो कम ऊंचाई पर मौजूद हजारों सैटेलाइट्स एक साथ खतरे में पड़ सकते हैं। यही वजह है कि अंतरिक्ष एजेंसियों और निजी कंपनियों के लिए स्पेस वेदर की सटीक भविष्यवाणी करना और सैटेलाइट्स के ऑर्बिट को समय रहते सुरक्षित करना आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अंतरिक्ष अनुसंधान रिपोर्टों पर आधारित इस आलेख के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। अंतरिक्ष और सोलर एक्टिविटी से जुड़ी यह जानकारी वैज्ञानिक रिसर्च और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। वीडियो/डेटा साभार: संबंधित अंतरिक्ष एजेंसियां एवं रिसर्च संस्थान।
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