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गांधी जयंती पर बंद रहा शेयर बाजार: लगातार 8वें हफ्ते फिसला सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए अब कब खुलेगा कारोबार

महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में कोई कारोबार नहीं हुआ। इसके साथ ही सप्ताहांत की छुट्टियों को मिलाकर बाजार लगातार तीन दिनों तक बंद रहेगा। हाल ही में हुई भारी बिकवाली के चलते बाजार में गहरी मंदी का माहौल बना हुआ है।
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तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•3 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•28
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गांधी जयंती पर बंद रहा शेयर बाजार: लगातार 8वें हफ्ते फिसला सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए अब कब खुलेगा कारोबार
📷 गांधी जयंती पर बंद रहा शेयर बाजार: लगातार 8वें हफ्ते फिसला सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए अब कब खुलेगा कारोबार — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • महात्मा गांधी जयंती और साप्ताहिक अवकाश के चलते शेयर बाजार लगातार तीन दिन यानी 2 से 4 अक्टूबर तक बंद रहा।
  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर भी ट्रेडिंग पूरी तरह बंद रही।
  • सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार आठ हफ्तों से गिरावट दर्ज की जा रही है, जो पिछले 25 सालों का सबसे लंबा दौर है।
  • डिजिटल बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहीं, जिससे आम जनता को कोई असुविधा नहीं हुई।

गांधी जयंती के चलते शेयर बाजारों में अवकाश का दिन

महात्मा गांधी जयंती के उपलक्ष್ಯ में शुक्रवार को देश के प्रमुख वित्तीय बाजारों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर किसी भी तरह की ट्रेडिंग नहीं की गई। इस अवकाश के कारण निवेशकों को शेयरों की खरीद और बिक्री का मौका नहीं मिला। इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और अन्य संबंधित वित्तीय खंड भी इस दौरान पूरी तरह बंद रहे।

शेयर बाजार के साथ-साथ मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी कारोबार पर विराम लगा रहा। कमोडिटी सेगमेंट में सुबह और शाम दोनों ही सत्रों में सोने-चांदी समेत अन्य जिंसों की ट्रेडिंग नहीं हुई। जानकारों के अनुसार, इस प्रकार के राजपत्रित अवकाशों पर वित्तीय संस्थान पूरी तरह बंद रहते हैं, जिससे बाजार की गतिविधियों में ठहराव आ जाता है.

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सप्ताहांत से जुड़े लंबे अवकाश निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का पर्याप्त समय देते हैं। हालांकि, नियमित निवेशकों को अपनी कारोबारी रणनीतियां तय करने के लिए अब अगले कारोबारी सत्र का इंतजार करना होगा।

लगातार आठवें हफ्ते बाजार में फिसलन, मंदी के मुहाने पर सेंसेक्स

कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिनों में भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पिछले सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। यह लगातार आठवां हफ्ता है जब शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है, जो पिछले 25 वर्षों में मंदी का सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। इससे पहले साल 2001 में लगातार नौ हफ्तों तक बाजार में गिरावट का ऐसा ही दौर देखा गया था।

गुरुवार के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में भारी बिकवाली का दबाव रहा और यह अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। ऑटो और मीडिया सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखी गई। जानकारों के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार शेयर बेचना और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं मुख्य वजहें हैं।

निफ्टी अपने जनवरी के ऑल-टाइम हाई स्तर से अब तक करीब 15 प्रतिशत नीचे आ चुका है। बाजार नियमों के अनुसार, यदि कोई प्रमुख सूचकांक अपने उच्चतम स्तर से 20 प्रतिशत तक नीचे लुढ़क जाता है, तो उसे आधिकारिक तौर पर 'बेयर मार्केट' यानी मंदी का दौर मान लिया जाता है। मौजूदा हालात को देखते हुए निवेशकों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

तीन दिनों तक बंद रहेगा कारोबार, अब इस दिन खुलेगा बाजार

गांधी जयंती की छुट्टी के तुरंत बाद शनिवार और रविवार होने के कारण शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों तक कारोबार बंद रहेगा। निवेशकों को अब सीधे अगले सप्ताह की शुरुआत यानी सोमवार को ही ट्रेडिंग का अवसर मिलेगा। इस लंबी छुट्टी के दौरान निवेशकों की निगाहें वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर टिकी रहेंगी।

एक्सचेंज के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार, अक्टूबर के महीने में कुछ अन्य त्योहारों पर भी ट्रेडिंग अवकाश रहेगा। आगामी 20 अक्टूबर को दशहरा के पावन अवसर पर शेयर बाजार एक बार फिर बंद रहेगा। इन छुट्टियों के दौरान इक्विटी, डेरिवेटिव्स और डेट मार्केट में किसी भी तरह का काम नहीं होता है।

व्यापारिक गतिविधियों के लिहाज से यह महीना निवेशकों के लिए काफी सतर्कता भरा रहने वाला है। बाजार विश्लेषक निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही नजर बनाए रखें ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

बैंकों की शाखाएं बंद, लेकिन डिजिटल सेवाएं रहीं पूरी तरह चालू

शेयर बाजार के साथ-साथ देश भर के सार्वजनिक, निजी और सहकारी बैंकों की शाखाएं भी गांधी जयंती के मौके पर बंद रहीं। हालांकि, ग्राहकों के लिए राहत की बात यह रही कि सभी प्रकार की डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहीं। यूपीआई (UPI), इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, एनईएफटी (NEFT) और आरटीजीएस (RTGS) जैसी सुविधाएं पूरी तरह सक्रिय रहीं।

बैंकों की भौतिक शाखाएं बंद होने के बावजूद देश भर में एटीएम और कैश डिपॉजिट मशीनें (CDM) सुचारू रूप से काम करती रहीं, जिससे नकदी की जरूरत वाले आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। फिनटेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से अब राष्ट्रीय अवकाश के दिन भी वित्तीय लेन-देन रुकते नहीं हैं।

इसके अलावा केंद्र सरकार के सभी दफ्तर, स्कूल और कॉलेज भी 2 अक्टूबर के राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे। हालांकि, निजी क्षेत्र के संस्थानों और व्यावसायिक कार्यालयों ने अपने आंतरिक नियमों और कार्य की आवश्यकताओं के आधार पर अवकाश का निर्धारण किया।

बाजार में गिरावट और निवेशकों के नुकसान का पूरा गणित

गुरुवार के कारोबारी सत्र में आई भारी बिकवाली के कारण निवेशकों को भारी-भरकम आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। शुरुआती कारोबार के दौरान ही बाजार में कोहराम मच गया था और सेंसेक्स एक समय एक हजार से अधिक अंकों तक टूट गया था। इस अप्रत्याशित गिरावट के कारण इंट्रा-डे कारोबार के दौरान निवेशकों की संपत्ति से लगभग 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।

विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार हो रही निकासी भारतीय बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारी मात्रा में भारतीय शेयर बेचे हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को संभालने की पूरी कोशिश की, लेकिन बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि सूचकांक खुद को बचा नहीं सके।

"बाजार में इस तरह की लंबी गिरावट निवेशकों के लिए धैर्य की परीक्षा होती है। हालांकि, यह समय घबराने का नहीं बल्कि मजबूत और अच्छी कंपनियों के शेयरों को चुनिंदा तरीके से परखने का होता है। लंबी अवधि के निवेशकों को वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक सुधारों पर नजर रखनी चाहिए।" — वरिष्ठ बाजार विश्लेषक

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बाजार इस मंदी के दौर से उबर पाता है या नहीं। त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद से निवेशकों को बाजार में रिकवरी की आस ब बंधी है, लेकिन वैश्विक आर्थिक मंदी के खतरे अभी भी पूरी तरह टले नहीं हैं।

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