आज सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, निवेशकों के चेहरों पर हवाइयां उड़ गईं। बाजार में अचानक आई भारी गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक धड़ाम होकर नीचे आ गिरे। बाजार के इस अचानक क्रैश होने से पूरे कारोबारी जगत में हड़कंप मच गया है। शुरुआती घंटों में ही कई बड़े शेयरों में भयंकर बिकवाली देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे भूचाल के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली है। दूसरा कारण वैश्विक बाजारों से मिले सुस्त संकेत और भू-राजनीतिक तनाव हैं। तीसरा और अहम कारण घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन रहा है। इन तीनों कारणों ने मिलकर बाजार पर ऐसा दबाव बनाया कि सूचकांक संभल नहीं सके।
किन शेयरों में मचा सबसे ज्यादा कोहराम
बाजार की इस मारामारी में सबसे बुरा हाल बैंकिंग, आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों का रहा। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर दिनभर लाल निशान पर ट्रेड करते रहे। निवेशकों ने घबराकर बिकवाली शुरू कर दी, जिससे गिरावट और गहरी हो गई। छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दिनभर के कारोबार में कई स्टॉक्स अपने दिन के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात अभी कुछ और दिन ऐसे ही बने रह सकते हैं। वैश्विक स्तर पर हो रहे घटनाक्रम सीधे तौर पर भारतीय बाजारों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को बहुत सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। घबराहट में आकर अपने शेयर बेचने से नुकसान और बढ़ सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने का है।
विदेशी निवेशकों की निकासी से बढ़ी मुश्किलें
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बीते कुछ दिनों में भारी पैसा निकाला है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही कमजोरी ने भी आग में घी का काम किया है। जब विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं, तो बाजार में लिक्विडिटी कम हो जाती है। इसके चलते बड़े शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिलती है। आज के कारोबार में भी यही ट्रेंड साफ तौर पर दिखाई दिया।
नियामकों और ब्रोकरेज फर्मों की नजर लगातार बाजार की चाल पर बनी हुई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं। इसलिए इस तरह की गिरावट से डरने के बजाय सही शेयरों में खरीदारी के मौके तलाशने चाहिए। बाजार में निचले स्तरों पर कुछ खरीदारी भी लौटती हुई दिखाई दी है, जिससे थोड़ा संभलने का मौका मिला।
निवेशकों के लिए आगे की क्या है रणनीति
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, छोटे निवेशकों को इस समय बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। उधार लेकर या मार्जिन पर ट्रेडिंग करने वालों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। जानकारों का सुझाव है कि अपनी पूरी पूंजी एक ही सेक्टर में न लगाएं। पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड रखें और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही दांव लगाएं। बाजार की हर हलचल पर नजर बनाए रखना इस समय सबसे समझदारी भरा कदम है।






