विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/टेक & ऑटो/बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल रोकना पूरी तरह बेतुका: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- यह उनका मौलिक अधिकार
टेक & ऑटोपढ़ने में समय: 5 मिनट

बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल रोकना पूरी तरह बेतुका: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- यह उनका मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उम्र के आधार पर बच्चों के इंटरनेट उपयोग पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने इसे संविधान के तहत मौलिक अधिकार बताते हुए सोशल मीडिया पर कड़े सुरक्षा उपाय और चाइल्ड मोड लागू करने के निर्देश दिए हैं।
✍️
टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस
तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•17 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•36
🌐Read in English →
शेयर करें:
बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल रोकना पूरी तरह बेतुका: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- यह उनका मौलिक अधिकार
📷 बच्चों का इंटरनेट इस्तेमाल रोकना पूरी तरह बेतुका: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- यह उनका मौलिक अधिकार — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना बच्चों का भी मौलिक अधिकार है।
  • अदालत ने उम्र के आधार पर इंटरनेट बैन करने के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज किया।
  • बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को हटाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का निर्देश दिया गया।
  • पूरी पाबंदी से बच्चे अधिक खतरनाक और अनियंत्रित प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर सकते हैं।

इंटरनेट तक पहुंच हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार

देश की सर्वोच्च अदालत ने डिजिटल स्पेस और बच्चों के अधिकारों को लेकर एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इंटरनेट का उपयोग करना केवल वयस्कों का ही नहीं, बल्कि हर उम्र के बच्चों का भी मौलिक अधिकार है। अदालत ने साफ किया कि बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह वंचित करना या उस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब अदालत बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री पर लगाम लगाने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

न्यायालय ने अपने फैसले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(a) का विशेष रूप से उल्लेख किया। इन अनुच्छेदों के तहत जीवन के अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी दी गई है। अदालत का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में इंटरनेट शिक्षा, ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। ऐसे में बच्चों को इस डिजिटल माध्यम से दूर रखना उनके बौद्धिक विकास में एक बड़ी बाधा साबित हो सकता है। जजों का यह भी कहना था कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

पाबंदी लगाने से और बढ़ सकते हैं ऑनलाइन खतरे

न्यायालय ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि यदि कानून बनाकर बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर सख्त पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो इसके विपरीत परिणाम सामने आ सकते हैं। पाबंदी लगने से बच्चे इंटरनेट का प्रयोग बंद नहीं करेंगे, बल्कि वे माता-पिता और अभिभावकों की नजरों से बचकर अनियंत्रित और असुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का रुख करेंगे। ऐसे छिपे हुए प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के शोषण और साइबर खतरों की आशंका कई गुना अधिक बढ़ जाती है।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जब बच्चे किसी ऑनलाइन धमकी, ब्लैकमेल या उत्पीड़न का शिकार होते हैं, तो वे डर के मारे अपने माता-पिता या शिक्षकों को इसकी जानकारी देने से हिचकिचाते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि इंटरनेट इस्तेमाल करने पर सजा मिलेगी। इसलिए, पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना अधिक व्यावहारिक कदम है।

बाल यौन शोषण सामग्री रोकने के लिए सख्त निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) के प्रसार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि इस तरह की अवैध और आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करने और उसे तुरंत हटाने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाए। इस डेटाबेस में केवल सामग्री की डिजिटल पहचान और लिंक शामिल होंगे, ताकि सोशल मीडिया कंपनियां आसानी से अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट का मिलान करके उसे तुरंत हटा सकें।

इसके साथ ही, अदालत ने सोशल मीडिया और तकनीकी कंपनियों को भी कड़ी चेतावनी दी है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि उनके प्लेटफॉर्म पर कोई भी आपत्तिजनक या बाल शोषण से जुड़ा कंटेंट अपलोड होता है, तो उसकी सूचना तय समय सीमा के भीतर स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम पोर्टल को दी जाए। इसके लिए देश भर में सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम और 'चाइल्ड मोड' जैसे फीचर्स लागू करने पर जोर दिया गया है।

पैरेंटल कंट्रोल और डिजिटल सुरक्षा की नई रूपरेखा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार या न्यायपालिका की नहीं, बल्कि माता-पिता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भी है। अदालत ने सुझाव दिया कि तकनीकी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर मजबूत पैरेंटल कंट्रोल और 'चाइल्ड मोड' जैसे विकल्प अनिवार्य रूप से देने चाहिए। इससे अभिभावक यह तय कर सकेंगे कि उनके बच्चे किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं और वे किन लोगों के संपर्क में हैं।

"बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह रोकना उतना ही बेतुका है जितना यह कहना कि उनमें विवेक की कमी है। बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे दोनों के समान रूप से हकदार हैं।" — सुप्रीम कोर्ट पीठ

विशेषज्ञों का भी मानना है कि डिजिटल युग में बच्चों से पूरी तरह स्मार्टफोन या इंटरनेट छीनना व्यावहारिक नहीं है। इसके बजाय स्कूलों और घरों में बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट का इस्तेमाल करने के तौर-तरीके सिखाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक रुख से स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए कड़े नियम तो बनेंगे, लेकिन उनकी मौलिक स्वतंत्रता पर अनावश्यक प्रहार नहीं किया जाएगा।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

राहुल गांधी पर महिला पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप: सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान बदसलूकी और धक्का-मुक्की का दावा

राहुल गांधी पर महिला पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप: सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान बदसलूकी और धक्का-मुक्की का दावा

दिल्ली में राजनीतिक हलचल और प्रदर्शन के बीच मेट्रो सेवाओं पर बड़ा असर, सुरक्षा कारणों से प्रमुख स्टेशन बंद

दिल्ली में राजनीतिक हलचल और प्रदर्शन के बीच मेट्रो सेवाओं पर बड़ा असर, सुरक्षा कारणों से प्रमुख स्टेशन बंद

श्रीलंका में बड़ा ब्लैकआउट: ठप हुई बिजली तो थमी पानी और इंटरनेट की रफ्तार, सरकार ने दिए जांच के आदेश

श्रीलंका में बड़ा ब्लैकआउट: ठप हुई बिजली तो थमी पानी और इंटरनेट की रफ्तार, सरकार ने दिए जांच के आदेश

कार डिजाइनिंग में AI का बोलबाला, 57% भारतीय ऑटो कंपनियां कर रहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल

कार डिजाइनिंग में AI का बोलबाला, 57% भारतीय ऑटो कंपनियां कर रहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल

जियो बनाम स्टारलिंक: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग तेज, मुकेश अंबानी और एलन मस्क आमने-सामने

जियो बनाम स्टारलिंक: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग तेज, मुकेश अंबानी और एलन मस्क आमने-सामने

मेटा ने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए ओपन एआई मॉडल लॉन्च किया।

मेटा ने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए ओपन एआई मॉडल लॉन्च किया।

पीएम मोदी का विरोध अपनी जगह, पर कोई विदेशी गोरा कारोबारी भारत को नहीं दे सकता आदेश: असदुद्दीन ओवैसी

पीएम मोदी का विरोध अपनी जगह, पर कोई विदेशी गोरा कारोबारी भारत को नहीं दे सकता आदेश: असदुद्दीन ओवैसी

एआई के जवाबों पर सवाल उठाना जरूरी है

एआई के जवाबों पर सवाल उठाना जरूरी है

✍️

टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा व मोबिलिटी टीम

द फ्रीलांस की टेक और ऑटो डेस्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता गैजेट्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के नए नवाचारों पर प्रामाणिक और उपभोक्ता-केंद्रित रिव्यू व रिपोर्ट्स प्रस्तुत करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘#supremecourt’ व टेक & ऑटो से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

राहुल गांधी पर महिला पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप: सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान बदसलूकी और धक्का-मुक्की का दावाTECH-AUTO

राहुल गांधी पर महिला पत्रकार ने लगाए गंभीर आरोप: सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान बदसलूकी और धक्का-मुक्की का दावा

17 अक्टू॰35
दिल्ली में राजनीतिक हलचल और प्रदर्शन के बीच मेट्रो सेवाओं पर बड़ा असर, सुरक्षा कारणों से प्रमुख स्टेशन बंदTECH-AUTO

दिल्ली में राजनीतिक हलचल और प्रदर्शन के बीच मेट्रो सेवाओं पर बड़ा असर, सुरक्षा कारणों से प्रमुख स्टेशन बंद

13 अक्टू॰31
श्रीलंका में बड़ा ब्लैकआउट: ठप हुई बिजली तो थमी पानी और इंटरनेट की रफ्तार, सरकार ने दिए जांच के आदेशTECH-AUTO

श्रीलंका में बड़ा ब्लैकआउट: ठप हुई बिजली तो थमी पानी और इंटरनेट की रफ्तार, सरकार ने दिए जांच के आदेश

17 अक्टू॰29
कार डिजाइनिंग में AI का बोलबाला, 57% भारतीय ऑटो कंपनियां कर रहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमालTECH-AUTO

कार डिजाइनिंग में AI का बोलबाला, 57% भारतीय ऑटो कंपनियां कर रहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल

17 अक्टू॰46
जियो बनाम स्टारलिंक: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग तेज, मुकेश अंबानी और एलन मस्क आमने-सामनेTECH-AUTO

जियो बनाम स्टारलिंक: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग तेज, मुकेश अंबानी और एलन मस्क आमने-सामने

17 अक्टू॰45
मेटा ने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए ओपन एआई मॉडल लॉन्च किया।TECH-AUTO

मेटा ने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबला करने के लिए ओपन एआई मॉडल लॉन्च किया।

18 अक्टू॰41
पीएम मोदी का विरोध अपनी जगह, पर कोई विदेशी गोरा कारोबारी भारत को नहीं दे सकता आदेश: असदुद्दीन ओवैसीTECH-AUTO

पीएम मोदी का विरोध अपनी जगह, पर कोई विदेशी गोरा कारोबारी भारत को नहीं दे सकता आदेश: असदुद्दीन ओवैसी

18 अक्टू॰50
एआई के जवाबों पर सवाल उठाना जरूरी हैTECH-AUTO

एआई के जवाबों पर सवाल उठाना जरूरी है

18 अक्टू॰47
विज्ञापन • ADVERTISEMENT