होम/टेक & ऑटो/स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई
टेक & ऑटोपढ़ने में समय: 5 मिनट

स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई

दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्पैम कॉल्स और फर्जी संदेशों पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब टेलीकॉम कंपनियों के एआई और मशीन लर्निंग सिस्टम संदिग्ध नंबरों की खुद पहचान करेंगे और बिना किसी ग्राहक की शिकायत के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
✍️
टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस
तकनीक व ऑटोमोबाइल डेस्क•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड•45
🌐Read in English →
शेयर करें:
स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई
📷 स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • ट्राई ने टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किए हैं।
  • एआई और मशीन लर्निंग सिस्टम द्वारा संदिग्ध स्पैमर्स की पहचान होने पर सीधे कार्रवाई की जाएगी।
  • नियमों का उल्लंघन करने पर सेंडर के सभी टेलीकॉम संसाधन एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।
  • सभी कैटेगरी की टेलीमार्केटिंग कॉल को ब्लॉक करने के लिए 1909 पर 'BLOCK PROMO' कोड भेजना होगा।

स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा कदम

अगर आपके स्मार्टफोन पर बार-बार आने वाली अनचाही प्रमोशनल कॉल्स और स्पैम संदेशों ने आपका जीना मुहाल कर दिया है, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी हो सकती है। देश में बढ़ती डिजिटल ठगी और फर्जीवाड़े की वारदातों पर नकेल कसने के लिए भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने बेहद सख्त और नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नए प्रावधानों के तहत अब स्पैमर्स और फर्जी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए किसी आम नागरिक या ग्राहक की औपचारिक शिकायत का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

नियामक निकाय ने साफ कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स के जरिए स्वतः ही उन नंबरों और कंपनियों की पहचान कर ली जाएगी जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था से आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब तक स्पैम कॉल्स से परेशान होने वाले लोगों को पहले शिकायत दर्ज करानी पड़ती थी, जिसके बाद लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होती थी। लेकिन अब सिस्टम खुद सक्रिय होकर ऐसे तत्वों पर शिकंजा कसेगा।

स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई
📷 ट्राई के नए नियमों से स्पैम कॉल्स पर लगेगी लगाम

संबंधित खबरें

स्मार्टवॉच के ईसीजी फीचर पर कार्डियोलॉजिस्ट की चेतावनी: क्या डॉक्टर की कमी पूरी कर सकती है कलाई पर बंधी घड़ी?

स्मार्टवॉच के ईसीजी फीचर पर कार्डियोलॉजिस्ट की चेतावनी: क्या डॉक्टर की कमी पूरी कर सकती है कलाई पर बंधी घड़ी?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता खतरा: एनवीडिया का नया सुरक्षा कवच, क्या एआई एजेंट हो रहे हैं बेकाबू?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता खतरा: एनवीडिया का नया सुरक्षा कवच, क्या एआई एजेंट हो रहे हैं बेकाबू?

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

एआई और मशीन लर्निंग तकनीक के जरिए होगी निगरानी

ट्राई द्वारा जारी किए गए नए 'टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशंस कस्टमर प्रेफरेंस (तीसरा संशोधन) विनियम, 2026' के मुताबिक, सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पर आधारित कॉलर आईडी और नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक मजबूत करें। यदि ये आधुनिक तकनीकें किसी नंबर या कमर्शियल सेंडर को संदिग्ध या स्पैमर के रूप में चिह्नित करती हैं, तो ऑपरेटर तुरंत प्रभाव से एक्शन लेने के लिए बाध्य होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के इस्तेमाल से धोखाधड़ी करने वालों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल हो जाएगा। तकनीक के माध्यम से कॉल के पैटर्न, फ्रिक्वेंसी और मैसेज के कंटेंट का विश्लेषण किया जाएगा। जैसे ही किसी सिस्टम को यह आभास होगा कि कोई व्यावसायिक इकाई नियमों को ताक पर रखकर फर्जी कॉल्स या मैसेज भेज रही है, वैसे ही उसका नेटवर्क डेटा खंगालकर बिना किसी देरी के कानूनी और तकनीकी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

दोषी पाए जाने पर एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट होंगे टेलीकॉम संसाधन

नए नियमों के दायरे में केवल चेतावनी देकर छोड़ने का प्रावधान नहीं है, बल्कि कड़े जुर्माने और पाबंदियों का भी जिक्र है। यदि कोई सेंडर या कमर्शियल एंटिटी बार-बार नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ अत्यधिक कठोर रुख अपनाया जाएगा। एक्सेस प्रोवाइडर्स द्वारा ऐसे दोषियों के सभी टेलीकॉम संसाधनों, जैसे कि पीआरआई (PRI), एसआईपी ट्रंक (SIP Trunk) और सिम कार्ड्स को कम से कम एक साल की अवधि के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

यह पाबंदी इस बात से बिल्कुल स्वतंत्र होगी कि उन विशेष संसाधनों का इस्तेमाल उस विशिष्ट कम्युनिकेशन के लिए हुआ था या नहीं। इसके साथ ही, टेलीकॉम ऑपरेटरों या ऑफिशियल एक्सेस प्रोवाइडर्स (OAP) को संबंधित सेंडर को एक साल की समयावधि के लिए ब्लैकलिस्ट की श्रेणी में डालना होगा। इस तयशुदा अवधि के दौरान देश का कोई भी टेलीकॉम ऑपरेटर उस ब्लैकलिस्टेड इकाई को नया टेलीकॉम रिसोर्स जारी नहीं करेगा।

नियामक की सख्ती और जनता के लिए सुरक्षा के उपाय

हालांकि नियमों के तहत ब्लैकलिस्ट किए गए सेंडर्स को बुनियादी टेलीफोन नंबर मुहैया कराया जा सकता है, लेकिन उनकी आउटगोइंग कॉलिंग सेवाओं पर पूरी तरह रोक रहेगी। हालांकि, आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए नोटिफाइड इमरजेंसी आउटगोइंग सर्विस से जुड़ने की अनुमति बरकरार रखी जाएगी ताकि किसी भी क्रिटिकल परिस्थिति में संवाद बाधित न हो। इसके अलावा, आम नागरिक भी अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकते हैं।

ट्राई के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई मोबाइल ग्राहक अपनी पसंद के आधार पर सभी श्रेणियों की टेलीमार्केटिंग कॉल्स को पूरी तरह ब्लॉक करना चाहता है, तो वह अपने फोन से '1909' नंबर पर 'BLOCK प्रोमो' (BLOCK PROMO) लिखकर एसएमएस भेज सकता है। ऐसा करने से ग्राहक का नंबर डू नॉट डिस्टर्ब (DND) सूची में अपडेट हो जाता है और अनचाही कॉल्स से सुरक्षा मिल जाती है।

"दूरसंचार नेटवर्क पर बढ़ती अनचाही कॉल्स और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए ट्राई ने कड़े विनियामक बदलाव किए हैं। अब एआई आधारित निगरानी से स्पैमर्स की पहचान स्वतः होगी, जिससे आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी और बिना शिकायत के सीधे कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।" — दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के वरिष्ठ अधिकारी

भविष्य में डिजिटल संवाद को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम

टेलीकॉम सेक्टर में उठाए गए इन सुधारात्मक कदमों का मुख्य उद्देश्य डिजिटल स्पेस को साफ-सुथरा और नागरिकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। आए दिन फर्जी ऑफर्स, लॉटरी जीतने के झांसे और लोन के नाम पर होने वाली ठगी ने लोगों का चैन छीन लिया था। इन अपराधों को रोकने के लिए तकनीकी रूप से सक्षम व्यवस्था समय की सबसे बड़ी मांग थी।

सरकार और नियामकों की इस संयुक्त पहल से न केवल साइबर फ्रॉड की वारदातों में कमी आएगी, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी। आम जनता को यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने ऑपरेटर को दें और ट्राई के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपने डिजिटल जीवन को सुरक्षित रखें। आने वाले दिनों में इन नियमों के कड़ाई से पालन होने पर स्पैम कॉल्स के नेटवर्क की कमर टूटनी तय मानी जा रही है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

टेक एवं ऑटोमोबाइल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा व मोबिलिटी टीम

द फ्रीलांस की टेक और ऑटो डेस्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता गैजेट्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के नए नवाचारों पर प्रामाणिक और उपभोक्ता-केंद्रित रिव्यू व रिपोर्ट्स प्रस्तुत करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

स्मार्टवॉच के ईसीजी फीचर पर कार्डियोलॉजिस्ट की चेतावनी: क्या डॉक्टर की कमी पूरी कर सकती है कलाई पर बंधी घड़ी?TECH-AUTO

स्मार्टवॉच के ईसीजी फीचर पर कार्डियोलॉजिस्ट की चेतावनी: क्या डॉक्टर की कमी पूरी कर सकती है कलाई पर बंधी घड़ी?

29 सित॰48
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता खतरा: एनवीडिया का नया सुरक्षा कवच, क्या एआई एजेंट हो रहे हैं बेकाबू?NATIONAL

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढ़ता खतरा: एनवीडिया का नया सुरक्षा कवच, क्या एआई एजेंट हो रहे हैं बेकाबू?

29 सित॰28
न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰37
न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰27
न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तकTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: शीर्ष अदालत के नीतिगत दखल से लेकर जमीनी अदालतों की हकीकत तक

29 सित॰30
न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंजTECH-AUTO

न्याय के बदलते गलियारे: सीबीएसई नीति से लेकर संभल हिंसा और मोबाइल अदालतों तक, न्यायपालिका की चौतरफा गूंज

29 सित॰24
न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?TECH-AUTO

न्याय के बदलते आयाम: शीर्ष अदालत से लेकर जमीनी अदालतों तक, क्या बदल रहा है देश का न्यायिक परिदृश्य?

29 सित॰33
ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?TECH-AUTO

ओटीटी का बढ़ता शिकंजा: क्या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बदल रहे हैं भारतीय सिनेमा का गणित?

29 सित॰30
स्पैम कॉल्स और फर्जीवाड़े पर ट्राई का बड़ा चाबुक: एआई खुद पहचानेगा नंबर, बिना शिकायत होगी कड़ी कार्रवाई | The Freelance | द फ्रीलांस