अमेरिका की धरती पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की एक और खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ है। यह सनसनीखेज मामला अमेरिका के प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर मंदिर से जुड़ा है, जहां एक 19 वर्षीय हमलावर बड़े पैमाने पर खूनखराबा करना चाहता था। आरोपी ने मंदिर परिसर में दाखिल होकर हिंदुओं को अपना निशाना बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली थी। गनीमत यह रही कि ठीक मौके पर उसकी राइफल जाम हो गई, जिसकी वजह से वह गोली नहीं चला पाया और एक बड़ा नरसंहार टल गया। स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है।
गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने बेहद चौंकाने वाले और डरावने खुलासे किए हैं। उसने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि उसे अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और हिंदुओं को मारने का बहुत लंबे समय से इंतजार था। इस बयान के सामने आने के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ गए हैं कि आखिर इतनी कम उम्र के युवक के मन में इतनी नफरत कैसे भरी हुई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस साजिश के पीछे कोई बड़ा गिरोह या हेट ग्रुप काम कर रहा था, या फिर यह किसी अकेले व्यक्ति की दुर्भावनापूर्ण हरकत थी।
हिंदू संगठनों ने जारी किया हाई अलर्ट
इस भयानक घटना के सामने आने के बाद अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों के बीच भारी डर का माहौल बन गया है। विभिन्न हिंदू संगठनों ने इस गंभीर खतरे को देखते हुए एक देशव्यापी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। संगठनों का कहना है कि विदेशों में भारतीय मूल के लोगों और उनके धार्मिक स्थलों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। स्थानीय प्रशासन से यह मांग की गई है कि सभी प्रमुख मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों के बाहर पुलिस गश्त को तुरंत बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को होने से पहले ही रोका जा सके।
इस पूरे मामले पर भारत सरकार की तरफ से भी कड़ा रुख अपनाया गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन के सामने इस सुरक्षा चूक का मुद्दा कड़ाई से उठाया है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विदेशों में हमारे नागरिकों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना स्थानीय सरकारों की मुख्य जिम्मेदारी है। इस तरह की नफरत भरी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि आगे इस तरह की हिम्मत कोई न कर सके।
अमेरिका में बढ़ती नस्लीय और धार्मिक नफरत
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में पिछले कुछ समय से अल्पसंख्यकों और विशेषकर एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ नफरत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सोशल मीडिया और कुछ चरमपंथी मंचों के जरिए फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियां ऐसे युवाओं को आसानी से प्रभावित कर रही हैं। इस मामले में भी आरोपी का कट्टरपंथी सोच से प्रभावित होना मुख्य वजह माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि सिर्फ पुलिस की सुरक्षा से काम नहीं चलेगा, बल्कि समाज के भीतर फैल रही इस नफरत की विचारधारा को जड़ से खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की सख्त जरूरत है।
मंदिर प्रबंधन और स्थानीय भारतीय समुदाय के लोगों ने इस घटना के बाद अपनी सुरक्षा व्यवस्था को खुद भी चाक-चौबंद करना शुरू कर दिया है। मंदिर समिति ने आंतरिक सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ा दी है और आने जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति पर पैनी नजर रखी जा रही है। स्थानीय अमेरिकी पुलिस भी मंदिर प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है और हरसंभव मदद का भरोसा दे रही है। इसके बावजूद, समुदाय के लोगों के मन में जो डर बैठ गया है, उसे पूरी तरह दूर करने में अभी लंबा समय लग सकता है।
आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच का दायरा
फिलहाल अमेरिकी अदालत में आरोपी के खिलाफ हत्या की कोशिश और आतंकवाद से जुड़े गंभीर धाराओं के तहत मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है। जांच एजेंसियां उसके डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से छानबीन कर रही हैं ताकि उसके अन्य साथियों का पता लगाया जा सके। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि विदेशों में रह रहे प्रवासियों की सुरक्षा के मोर्चे पर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई से कई और बड़े खुलासे होने की पूरी उम्मीद है।




