मॉस्को और कीव के बीच पिछले कुछ समय से चली आ रही गुप्त सहमति अब पूरी तरह टूटती दिख रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सीधे शब्दों में ऐलान कर दिया है कि रूस के खिलाफ ऊर्जा युद्ध अब एक बार फिर तेज होगा। इस ताजा फैसले से दोनों देशों के बीच शांति की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं। जमीन पर तैनात विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा भयानक हो सकते हैं। आम लोगों की जिंदगी पर इस संघर्ष का सीधा असर पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्य वजह रूस की तरफ से लगातार जारी ऊर्जा ठिकानों पर हमले और कड़ा रुख है। यूक्रेन का आरोप है कि मॉस्को शांति वार्ताओं का नाटक कर रहा है जबकि उसकी सेनाएं लगातार बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसी के चलते कीव ने अब खुलकर कह दिया है कि वह रूसी रिफाइनरियों को निशाना बनाएगा। इस रणनीति से रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। युद्ध के इस नए चरण से पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर पूर्वी यूरोप की तरफ टिक गई हैं।
रूस की तेल रिफाइनरियों पर क्यों मंडराया नया खतरा?
रूस की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और गैस के निर्यात पर टिकी हुई है। अगर यूक्रेनी ड्रोन सीधे इन बड़ी रिफाइनरियों पर गिरते हैं तो ईंधन का उत्पादन भारी मात्रा में ठप हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। जेलेंस्की की सरकार इसी कमजोरी का फायदा उठाकर रूस पर दबाव बनाना चाहती है। पश्चिमी देशों से मिल रहे हथियारों के बल पर यूक्रेन के हौसले काफी बुलंद नजर आ रहे हैं। रूसी वायु रक्षा प्रणाली इन हमलों को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों की नजर भी इस पूरे मामले पर टिकी हुई है। अगर तेल सप्लाई बाधित होती है तो महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। आम आदमी की जेब पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दुनिया भर के देश अब नए विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के सारे रास्ते फिलहाल बंद होते नजर आ रहे हैं।
पश्चिम एशिया और सीरिया के हालात ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
सिर्फ यूरोप ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी जंग के बादल छाए हुए हैं। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। स्थानीय कबीले अब खुलकर हूतियों के समर्थन में उतर आए हैं, जिससे सऊदी प्रशासन की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। इस अस्थिरता का असर लाल सागर के समुद्री व्यापार पर पड़ रहा है। मालवाहक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए बड़ी सेनाएं तैनात करनी पड़ रही हैं। दुनिया का हर कोना इस समय किसी न किसी बड़े संकट की चपेट में है।
इसके अलावा सीरिया से भी बेहद डरावनी खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में सीरिया में एक यात्री बस पर हुई अंधाधुंध गोलीबारी में सात बेकसूर लोगों की मौत हो गई है। इस घटना ने पूरे इलाके में डर का माहौल पैदा कर दिया है। लगातार हो रही हिंसा से आम नागरिकों का जीवन नर्क बन गया है। सुरक्षा एजेंसियां हमलावरों की तलाश में जुटी हैं लेकिन अभी तक कोई ठोससुराग हाथ नहीं लगा है। लोग अपने घरों से निकलने में भी डरने लगे हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा और फ्लाईदुबई मामला
आसमान में उड़ने वाले विमानों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान विमान के अंदर अफरातफरी मच गई थी। एक यात्री स्मित मच्छार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे एक हमलावर ने क्रू और यात्रियों को डराया था। को-पायलट के नमाज पढ़ने उठने के दौरान हमलावर ने अचानक हमला कर दिया था। विमान के अंदर मौजूद इजरायली यात्रियों ने भी इस खतरनाक अनुभव को साझा किया है। फ्लाइट क्रू ने भारी सूझबूझ दिखाते हुए स्थिति को संभाला और एक बड़ी दुर्घटना होने से बचा लिया।
इन तमाम अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से यह साफ हो गया है कि दुनिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा सीजफायर टूटने से आने वाले हफ्तों में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। युद्ध के मैदान से लेकर कूटनीतिक बैठकों तक की हर छोटी-बड़ी खबर आप तक पहुंचाई जाएगी। आम जनता की सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिहाज से यह समय सबसे बड़ी परीक्षा का है।








