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उत्कल यूनिवर्सिटी में सेकेंड सेमेस्टर का पेपर लीक, साइबर थाने में एफआईआर दर्ज और जांच कमेटी गठित

ओडिशा की सबसे पुरानी उत्कल यूनिवर्सिटी में सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने का मामला सामने आया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
The Freelance ब्यूरो
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18 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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उत्कल यूनिवर्सिटी में सेकेंड सेमेस्टर का पेपर लीक, साइबर थाने में एफआईआर दर्ज और जांच कमेटी गठित
📷 उत्कल यूनिवर्सिटी में सेकेंड सेमेस्टर का पेपर लीक, साइबर थाने में एफआईआर दर्ज और जांच कमेटी गठित — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • ओडिशा की उत्कल यूनिवर्सिटी के प्लस III सेकेंड सेमेस्टर का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक होने का आरोप।
  • यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साइबर पुलिस स्टेशन में औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कराई।
  • परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि गड़बड़ी साबित होने पर परीक्षा दोबारा कराई जाएगी।

उत्कल यूनिवर्सिटी में पेपर लीक से मचा हड़कंप

ओडिशा की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित उत्कल यूनिवर्सिटी एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। यहां प्लस III सेकेंड सेमेस्टर की परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक होने की खबर सामने आई है। इस खुलासे के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया है और छात्र-छात्राओं के बीच भी भारी तनाव का माहौल है। परीक्षा शुरू होने से एक दिन पहले ही वॉट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर परीक्षा के कथित असली पर्चे घूमने लगे थे।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने तुरंत एक्शन लिया है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. हृषिकेश नायक ने मीडिया को जानकारी दी कि यूनिवर्सिटी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए साइबर पुलिस थाने में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। इसके साथ ही गड़बड़ी के इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच कमेटी भी बना दी गई है, जिसकी अगुवाई खुद कुलपति करेंगे।

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करीब 300 कॉलेजों के छात्र दे रहे हैं परीक्षा

आपको बता दें कि इस परीक्षा में ओडिशा भर के लगभग 300 कॉलेजों के छात्र शामिल हो रहे हैं। ये परीक्षाएं बीते 12 सितंबर से शुरू हुई हैं। लेकिन परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले प्रश्नपत्रों के लीक होने की खबर ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से उनकी महीनों की मेहनत और तैयारी पर पानी फिर जाता है।

परीक्षा केंद्रों पर पर्चे पहुंचने और उनके लीक होने के इस खेल से छात्र मानसिक तनाव में हैं। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें या फिर इस बात की चिंता करें कि परीक्षा रद्द होगी या नहीं। यूनिवर्सिटी प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि सुरक्षा में यह चूक आखिर कहां और किस स्तर पर हुई है।

वीसी के नेतृत्व में बनी खास जांच कमेटी

यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. हृषिकेश नायक ने साफ किया है कि इस पूरे मामले की जांच कुलपति के नेतृत्व में बहुत सख्ती से की जाएगी। प्रशासन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन प्रश्नपत्रों की सत्यता की पूरी जांच कर रहा है। यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि परीक्षा से पहले ही पर्चे लीक हो गए थे, तो यूनिवर्सिटी बिना किसी हिचकिचाहट के इन परीक्षाओं को रद्द कर देगी और इन्हें दोबारा आयोजित किया जाएगा।

"यह मामला बहुत गंभीर है। हम इसकी पूरी जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा में चूक कहां हुई। यदि प्रश्नपत्र लीक होने की बात सच साबित होती है, तो परीक्षाएं दोबारा आयोजित की जाएंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।" — डॉ. हृषिकेश नायक, परीक्षा नियंत्रक, उत्कल यूनिवर्सिटी

सुरक्षा व्यवस्था और चैन ऑफ कस्टडी की होगी जांच

उत्कल यूनिवर्सिटी में प्रश्नपत्र भेजने की एक पुख्ता प्रक्रिया है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, प्रश्नपत्रों को यूनिवर्सिटी में ही सील किया जाता है और उसके बाद उन्हें संबंधित कॉलेजों को भेजा जाता है। इन सील बंद पैकेटों को परीक्षा शुरू होने से केवल 30 मिनट पहले ही खोला जाना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद पर्चे बाहर कैसे आए, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।

यूनिवर्सिटी अब उस पूरी चैन ऑफ कस्टडी की बारीकी से जांच कर रही है जिससे होकर ये प्रश्नपत्र कॉलेजों तक पहुंचे थे। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यूनिवर्सिटी से लेकर कॉलेज के स्ट्रॉन्ग रूम तक के सफर में किस व्यक्ति या एजेंसी ने लापरवाही बरती है। दोषी पाए जाने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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