इंटरनेट की दुनिया में हर रोज नए विषय ट्रेंड करते रहते हैं, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा दावा वायरल हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। इंटरनेट पर अचानक 'गैस' और 'सस्ते सिलेंडर' से जुड़े कीवर्ड्स टॉप ट्रेंड्स में शामिल हो गए। लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई एलपीजी गैस के दामों में भारी गिरावट आई है या कोई नया नियम लागू हुआ है? जब 'The Freelance' की टीम ने इस वायरल दावे की तह तक जाने की कोशिश की, तो एक दिलचस्प और हैरान करने वाली कहानी सामने आई।
वायरल दावों की असलियत और गूगल ट्रेंड्स का सच
बुधवार को गूगल ट्रेंड्स पर अचानक 'गैस' शब्द को हजारों लोगों ने सर्च करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ पोस्ट्स और मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जाने लगा कि गैस सिलेंडर 400 से 600 रुपये तक सस्ते दामों पर मिल रहे हैं। इन रिपोर्ट्स में यह बताया गया कि कुछ चुनिंदा जगहों पर कॉमर्शियल सिलेंडर्स को भारी डिस्काउंट के साथ बेचा जा रहा है। हालांकि, सरकारी स्तर पर एलपीजी गैस की कीमतों में ऐसा कोई आधिकारिक बदलाव नहीं किया गया है। इसके बावजूद सस्ते सिलेंडर मिलने की चर्चा ने लोगों को असमंजस में डाल दिया।
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आखिर क्यों सस्ते दामों पर बेचे जाते हैं कुछ सिलेंडर?
इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए जब हमने एक प्रमुख गैस एजेंसी के मालिक से बातचीत की, तो उन्होंने इसके पीछे की असली वजह का खुलासा किया। एजेंसी संचालक ने बताया कि जब गैस वितरकों के पास गाड़ियां आती हैं, तो उनमें घरेलू (Domestic) सिलेंडरों के साथ-साथ कुछ कॉमर्शियल सिलेंडर भी भेजे जाते हैं। कई बार छोटी एजेंसियों के पास कॉमर्शियल गैस की पर्याप्त मांग नहीं होती है, जिससे वे गोदाम में ही रखे रह जाते हैं।
उन्होंने आगे बताया, 'ऐसी स्थिति में जब स्टॉक लंबे समय तक नहीं बिकता, तो कई बार संचालक उन्हें कुछ कम कीमत पर बेच देते हैं ताकि स्टॉक को निकाला जा सके। इसके अलावा, एक बड़ी वजह यह भी होती है कि गाड़ियों से आए सिलेंडरों को वापस भेजने के लिए खाली सिलेंडरों की जरूरत होती है। मान लीजिए किसी गाड़ी में 100 घरेलू और 15 कॉमर्शियल सिलेंडर आए हैं, तो कंपनी को वापस भेजने के लिए उतने ही खाली सिलेंडर भी चाहिए होते हैं। इस चक्र को बनाए रखने के कई बार वेंडर इन्हें डिस्काउंट पर बेच देते हैं।'
कॉमर्शियल सिलेंडर बेचने का गणित और मुनाफा
एजेंसी मालिकों का यह भी कहना है कि हालांकि डीलर चाहें तो केवल घरेलू सिलेंडरों की गाड़ी भी मंगवा सकते हैं, लेकिन कंपनियां चाहती हैं कि कॉमर्शियल सिलेंडर भी बाजार में आएं। कॉमर्शियल सिलेंडरों में मुनाफा भी थोड़ा ज्यादा होता है, और प्रति सिलेंडर 100 से 120 रुपये तक की मार्जिन होती है। यही वजह है कि यदि कभी मांग सुस्त रहे या स्टॉक रीसायकल करना हो, तो वेंडर कुछ डिस्काउंट देकर भी सिलेंडर बेच देते हैं। बहरहाल, आम उपभोक्ताओं को मिलने वाले घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में ऐसा कोई भारी फेरबदल नहीं हुआ है, और सोशल मीडिया पर चल रही खबरें केवल विशेष परिस्थितियों में बेचे जाने वाले कॉमर्शियल सिलेंडरों से जुड़ी हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।




