भारतीय सर्राफा बाजार में इन दिनों सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन लंबी अवधि के लिहाज से निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। दुनिया की जानी-मानी ग्लोबल ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म जेफरीज (Jefferies) के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटजी क्रिस वुड (Chris Wood) ने सोने की कीमतों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा टारगेट सेट किया है। उनके इस अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतें अपनी मौजूदा कीमत से लगभग दोगुनी से भी ज्यादा हो सकती हैं। अगर यह अनुमान सच साबित होता है, तो निवेशकों को बंपर रिटर्न मिलने की पूरी उम्मीद है और भारत में भी सोने के दाम नए रिकॉर्ड बनाएंगे।
सोने के बाजार में आई इस हलचल ने निवेशकों और आम जनता दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि आखिर किन कारणों से सोने की कीमतों में इतनी बड़ी तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। क्रिस वुड ने अपने हालिया नोट में इस बात का विस्तार से जिक्र किया है कि किस तरह वैश्विक आर्थिक हालात और अमेरिकी मौद्रिक नीतियां आने वाले दिनों में सोने के लिए वरदान साबित होने जा रही हैं। आइए इस पूरी रिपोर्ट को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि भारत में सोने का नया भाव क्या हो सकता है।
10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है सोने का नया भाव
क्रिस वुड के विश्लेषणात्मक अनुमान के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव बढ़कर 10,000 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े को छू सकता है। यदि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्तर की तुलना इस टारगेट से की जाए, तो यह लगभग 130 फीसदी की जबरदस्त तेजी को दर्शाता है। इसका साफ मतलब यह है कि आने वाले दिनों में सोना अपने मौजूदा स्तर से करीब 2.3 गुना ऊपर ट्रेड करता नजर आ सकता है।
वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मजबूत स्थिति में कारोबार कर रहा है। जेफरीज के इस बड़े ऐलान के बाद दुनिया भर के कमोडिटी बाजार के जानकारों ने इस पर अपनी पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। निवेशकों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या वाकई सोना इस दशक का सबसे बड़ा एसेट क्लास साबित होने वाला है। ऐतिहासिक रूप से भी यह देखा गया है कि जब-जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशकों का रुझान सोने की तरफ सबसे ज्यादा होता है।
"अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पास अब ब्याज दरों को बहुत ज्यादा बढ़ाने की क्षमता नहीं बची है। अमेरिका का राजकोषीय घाटा इतना अधिक है कि देश के लिए ऊंची बॉन्ड यील्ड को संभालना लगभग असंभव होगा, जिससे अंततः सोने को ही सबसे बड़ा फायदा मिलेगा।" — क्रिस वुड, ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटजी, जेफरीज
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भारतीय बाजार में क्या होगी सोने की नई कीमत?
अब सवाल यह उठता है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 10,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंचता है, तो भारत के घरेलू बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसका क्या असर पड़ेगा। वर्तमान में एमसीएक्स पर सोने का भाव लगभग 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास चल रहा है। यदि इसमें 130 प्रतिशत की भारी-भरकम तेजी दर्ज की जाती है, तो भारत में सोने का भाव बढ़कर करीब 3.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।
भारत में सोने के प्रति लोगों का पारंपरिक लगाव जगजाहिर है। यहां हर शुभ अवसर, त्योहार और शादी-ब्याह के सीजन में सोने की खरीददारी बड़े पैमाने पर की जाती है। ऐसे में यदि कीमतें इस स्तर तक पहुंचती हैं, तो जिन परिवारों के पास पहले से ही सोना मौजूद है, उनकी कुल संपत्ति में बेतहाशा इजाफा देखने को मिलेगा। हालांकि, आम खरीदार के लिए इतने ऊंचे दामों पर सोना खरीदना थोड़ा मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए यह जीवनभर का सबसे बड़ा निवेश अवसर साबित हो सकता है।
कमजोर होता डॉलर और अमेरिकी राजकोषीय घाटा
क्रिस वुड के इस अनुमान के पीछे सबसे बड़ा आर्थिक तर्क अमेरिकी डॉलर की स्थिति और वहां के राजकोषीय घाटे से जुड़ा हुआ है। उनका साफ तौर पर कहना है कि अमेरिकी बाजार को बहुत जल्द यह अहसास हो जाएगा कि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर नहीं बनाए रख सकता। अमेरिका पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और राजकोषीय घाटा चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है।
ऐसी स्थिति में अमेरिकी सरकार और फेडरल रिजर्व के लिए यह जरूरी हो जाएगा कि वे बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाएं। जब बॉन्ड यील्ड को दबाने की कोशिश की जाएगी, तो स्वाभाविक रूप से अमेरिकी डॉलर की चमक फीकी पड़ जाएगी और वह कमजोर होगा। इतिहास गवाह है कि जब-जब वैश्विक बाजार में डॉलर कमजोर होता है, तब-तब बुलियन मार्केट यानी सोना और चांदी रिकॉर्ड तोड़ तेजी दर्ज करते हैं।
भारतीय परिवारों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाला फायदा
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि डॉलर में यह कमजोरी लंबी अवधि तक बनी रहती है, तो इसका सबसे ज्यादा लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के परिवारों को मिलेगा। दुनिया भर में भारतीय परिवारों के पास सबसे ज्यादा निजी स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) मौजूद है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक भी भारतीय घरों में रखा हुआ सोना देश की कुल अर्थव्यवस्था को एक मजबूत वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
जब वैश्विक स्तर पर सोने के दाम बढ़ेंगे, तो भारतीय परिवारों की कुल संपत्ति का मूल्यांकन भी कई गुना बढ़ जाएगा। इससे देश के भीतर कंजप्शन और लिक्विडिटी पर भी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि कमोडिटी बाजार में निवेश करने से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से पूरी सलाह जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम हमेशा बना रहता है।
निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं
क्रिस वुड द्वारा दिया गया यह अनुमान इस बात का संकेत है कि आने वाला समय सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का ही है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के कारण सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। चाहे अमेरिका की मौद्रिक नीति हो या भारत में सोने की पारिवारिक जमापूंजी, हर एक कारक फिलहाल बुलियन मार्केट के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की चाल पर बारीकी से नजर रखें और लंबी अवधि के नजरिए से ही अपने पोर्टफोलियो में सोने को जगह दें।






