नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन बेहद डरावना साबित हुआ है। दलाल स्ट्रीट पर कारोबार की शुरुआत के साथ ही अचानक बिकवाली का ऐसा तूफान आया कि देखते ही देखते निवेशकों की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा डूब गया। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1200 से ज्यादा अंकों की भारी गिरावट के साथ नीचे आ गिरा। इस बड़ी और अचानक आई गिरावट से निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि हफ्ते के शुरुआती कारोबार में ही इतनी बड़ी गिरावट ने छोटे और मध्यम निवेशकों को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सुबह के सत्र में जैसे ही बाजार खुला, वैसे ही बिकवाली का दबाव हावी होने लगा। देखते ही देखते सेंसेक्स 1045 से 1200 अंक तक लुढ़क गया और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी साल के अपने निचले स्तर के करीब आ पहुंचा। मेटल, हेल्थकेयर और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त भगदड़ मच गई। हालात यह हो गए कि कई दिग्गज कंपनियों के शेयर भारी नुकसान के साथ लाल निशान पर ट्रेड करने लगे। जानकारों का मानना है कि इस चौतरफा बिकवाली ने बाजार के पिछले सारे मुनाफे को चंद घंटों में ही साफ कर दिया है और निवेशकों में भारी डर का माहौल बन गया है।
बाजार में अचानक आई इस तबाही के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं?
शेयर बाजार के जानकारों और दलाल स्ट्रीट के विश्लेषकों का मानना है कि इस बड़ी गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। अमेरिकी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से बाजार का मूड पहले से ही खराब था। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया फैसलों और ब्याज दरों से जुड़े रुख ने भी बाजार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। निवेशकों को डर है कि कड़े वित्तीय नियमों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में कंपनियों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में बिकवाली रुकने का नाम नहीं ले रही है।
देश के अलग-अलग शहरों में बैठे छोटे निवेशकों से जब हमारी टीम ने बात की, तो उनका दर्द साफ झलकता दिखा। कई लोगों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अच्छे शेयरों में पैसा लगाया था, लेकिन इस एक दिन की गिरावट ने उनकी सारी जमापूंजी को खतरे में डाल दिया है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और यह गिरावट बाजार का एक नेचुरल करेक्शन यानी सुधार हो सकती है, लेकिन मौजूदा माहौल में पैनिक सेलिंग यानी डर के मारे शेयर बेचने का सिलसिला रुक नहीं रहा है।
टाटा ग्रुप के शेयरों में दिखा अलग ट्रेंड और मिलाजुला असर
एक तरफ जहां पूरा बाजार भारी गिरावट के साए में था और सेंसेक्स-निफ्टी गोता लगा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी भी देखने को मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ग्रुप के एक शेयर में करीब 12 प्रतिशत तक की छप्परफाड़ तेजी दर्ज की गई। यह इस बात का सबूत है कि जब पूरा बाजार गिर रहा हो, तब भी मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर निवेशकों का भरोसा बना रहता है। हालांकि, ऐसे अपवादों को छोड़कर बाजार का बड़ा हिस्सा मंदी की चपेट में बुरी तरह से फंस चुका है।
बैंक निफ्टी और अन्य प्रमुख सेक्टरों में भी भारी बिकवाली का दौर जारी रहा, जिससे वित्तीय संस्थानों के शेयरों पर भी बुरा असर पड़ा। जानकारों का सुझाव है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को बिना सोचे-समझे अपने शेयर औने-पौने दामों पर नहीं बेचने चाहिए। बाजार की हर बड़ी गिरावट के बाद एक रिकवरी का दौर भी आता है, इसलिए लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। दलाल स्ट्रीट पर बनी इस उथल-पुथल भरी स्थिति पर हमारी नजर लगातार बनी हुई है और आगे के हर अपडेट से हम आपको रूबरू कराते रहेंगे।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल और क्या करें निवेशक?
आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक रुझानों, विदेशी निवेशकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी होगी। यदि वैश्विक बाजार में स्थिति सुधरती है, तो भारतीय शेयर बाजार में भी रिकवरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों को किसी भी तरह की अफवाहों से बचने और अपने पोर्टफोलियो की मजबूती पर ध्यान देने की जरूरत है। बाजार नियामक और वित्तीय सलाहकार भी यही कह रहे हैं कि इस समय घबराने के बजाय सोच-समझकर और लंबी अवधि की रणनीति के साथ ही अगला कदम उठाना समझदारी होगी।






