उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से साइबर अपराध का एक नया और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया के सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम का सहारा लेकर साइबर अपराधियों ने एक नागरिक को लाखों रुपये का चूना लगा दिया। डिजिटल युग में जहां हर काम एक क्लिक पर हो रहा है, वहीं साइबर अपराधी भी लोगों की कमाई पर डाका डालने के लिए रोजाना नए-नए तरीके अपना रहे हैं। अलीगढ़ में घटी इस ताजा घटना में पीड़ित को इंस्टाग्राम पर कम समय में शेयर बाजार और ऑनलाइन टास्क के जरिए भारी-भरकम रिटर्न देने का लालच दिया गया था। इस फर्जी स्कीम के जाल में फंसकर पीड़ित ने अपनी गाढ़ी कमाई के 2.87 लाख रुपये गंवा दिए।
जब पीड़ित ने अपने जमा किए गए पैसे और कथित तौर पर हुआ मुनाफा वापस निकालने की कोशिश की, तो जालसाजों ने उनसे सर्विस टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर और पैसों की मांग करना शुरू कर दिया। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित तुरंत अलीगढ़ के साइबर क्राइम थाने पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाते हुए पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है।
कैसे बिछाया गया ठगी का जाल? समझें पूरा फर्जी खेल
साइबर अपराध के इस मामले में अपराधियों का तरीका बेहद पेशेवर और चालाकी से भरा हुआ था। पीड़ित के अनुसार, वे इंस्टाग्राम पर सामान्य रूप से रील्स देख रहे थे, तभी उनकी स्क्रीन पर एक स्पॉन्सर्ड विज्ञापन (Sponsored Ad) उभरा। इस विज्ञापन में दावा किया गया था कि बिना किसी जोखिम के घर बैठे शेयर बाजार में ट्रेडिंग और आसान ऑनलाइन टास्क पूरे करके रोजाना 5,000 से 20,000 रुपये तक कमाए जा सकते हैं। इस आकर्षक ऑफर के झांसे में आकर पीड़ित ने विज्ञापन पर दिए गए लिंक पर क्लिक कर दिया।
लिंक पर क्लिक करते ही उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप और व्हाट्सएप चैट में रीडायरेक्ट कर दिया गया। वहां खुद को बड़े फाइनेंशियल एडवाइजर और स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट बताने वाले लोगों ने उनका स्वागत किया। शुरुआती चरण में पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए साइबर अपराधियों ने उनसे महज 1,000 रुपये का छोटा निवेश कराया। इसके बदले में कुछ ही घंटों के भीतर उनके फर्जी डैशबोर्ड पर 1,500 रुपये का मुनाफा दिखाया गया और यह राशि उनके वास्तविक बैंक खाते में भी ट्रांसफर कर दी गई। इस शुरुआती सफलता ने पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया और वे ठगों के बुने हुए खतरनाक जाल में पूरी तरह फंस गए।
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पीड़ित की आपबीती: 'डैशबोर्ड पर लाखों का मुनाफा दिख रहा था, लेकिन हकीकत कुछ और थी'
शुरुआती मुनाफा मिलने के बाद पीड़ित का हौसला बढ़ गया और उन्होंने बड़े निवेश के लिए सहमति दे दी। इसके बाद जालसाजों ने उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर अकाउंट बनाने को कहा, जिसका इंटरफेस किसी असली और नामी ट्रेडिंग एप्लीकेशन जैसा ही दिखाई देता था। पीड़ित ने धीरे-धीरे करके अलग-अलग यूपीआई (UPI) आईडी और बैंक खातों में कुल 2.87 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर कर दी। फर्जी वेबसाइट के डैशबोर्ड पर पीड़ित का निवेश और उस पर मिलने वाला मुनाफा बढ़कर 6 लाख रुपये से भी अधिक दिखाई देने लगा।
"मुझे लगा कि यह बिल्कुल वास्तविक निवेश है क्योंकि वेबसाइट पर मेरा मुनाफा पल-पल बढ़ रहा था। जब मैंने उस रकम को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करने के लिए विड्रॉल बटन दबाया, तो ट्रांजैक्शन ब्लॉक हो गया। ग्रुप के एडमिन ने मुझसे कहा कि राशि बड़ी है, इसलिए 50,000 रुपये का टैक्स और देना होगा। जब मैंने और पैसे देने से मना किया, तो उन्होंने मुझे ग्रुप से रिमूव कर दिया और नंबर ब्लॉक कर दिया। तब मुझे समझ आया कि मेरे साथ बहुत बड़ा फ्रॉड हो चुका है।" — पीड़ित, अलीगढ़ निवासी
इस घटना के बाद पीड़ित पूरी तरह हताश हो गए और उन्होंने परिजनों को इसकी जानकारी दी। इसके तुरंत बाद वे अपनी बैंक पासबुक और लेनदेन के तमाम डिजिटल सबूत लेकर थाने पहुंचे।
अलीगढ़ साइबर थाना पुलिस का एक्शन और जांच की दिशा
मामला संज्ञान में आते ही अलीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जिन बैंक खातों में 2.87 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए हैं, वे देश के अलग-अलग राज्यों के म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) हैं। साइबर ठग ऐसे फर्जी या किराए पर लिए गए खातों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस की पहुंच से दूर रह सकें।
पुलिस की साइबर सेल अब उन तमाम व्हाट्सएप नंबरों, टेलीग्राम आईडी, इंस्टाग्राम पेजों और यूपीआई आईडी का तकनीकी विश्लेषण कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस अपराध में किया गया। साथ ही जिन बैंकों के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनके नोडल अधिकारियों से संपर्क करके खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि अगर रकम अभी भी खातों में मौजूद हो तो उसे होल्ड कराया जा सके।
इन्स्टाग्राम और टेलीग्राम पर 'इन्वेस्टमेंट स्कैम' का बढ़ता ग्राफ
देशभर में साइबर अपराधों का ट्रेंड तेजी से बदला है। अब जामताड़ा या मेवात स्टाइल के कॉल फ्रॉड से ज्यादा 'पार्ट टाइम जॉब' और 'हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट' स्कैम का बोलबाला है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधी इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपना शिकार ढूंढने का जरिया बना रहे हैं। ये ठग फर्जी स्क्रीनशॉट, मशहूर हस्तियों के नाम का फर्जी इस्तेमाल और नकली ग्राहकों के रिव्यूज दिखाकर आम लोगों को गुमराह करते हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस का साइबर क्राइम सेल लगातार ऐसे विज्ञापनों और फर्जी टेलीग्राम चैनल्स के खिलाफ अभियान चला रहा है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग बार-बार इन जालसाजों के बिछाए जाल में फंस जाते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी अनजान सोशल मीडिया ऐड पर आंख बंद करके भरोसा करना भारी वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है।
साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी: सोशल मीडिया पर ठगी से कैसे बचें?
साइबर सुरक्षा के जानकारों ने आम जनता के लिए कुछ बेहद जरूरी और कड़े सुझाव दिए हैं, ताकि इस तरह की ठगी से बचा जा सके:
- कोई भी जॉब या निवेश गारंटीकृत रिटर्न नहीं देता: अगर कोई व्यक्ति या विज्ञापन आपको कुछ ही घंटों या दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा करता है, तो 100% मानकर चलें कि वह फर्जी है।
- केवल SEBI पंजीकृत संस्थाओं में ही निवेश करें: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश हमेशा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा मान्यता प्राप्त ब्रोकेर्स और ऐप्स के माध्यम से ही करें।
- अज्ञात टेलीग्राम या व्हाट्सएप ग्रुप में न जुड़ें: यदि कोई आपको किसी ऐसे ग्रुप में जोड़ता है जहां ट्रेडिंग टिप्स या पार्ट टाइम वर्क के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं, तो तुरंत उस ग्रुप को रिपोर्ट और ब्लॉक करें।
- शुरुआती छोटे मुनाफे के लालच में न आएं: ठग अक्सर भरोसा जीतने के लिए शुरुआती दौर में 500 या 1000 रुपये का मुनाफा वापस भेजते हैं, इसे जाल समझें न कि असली कमाई।
यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो बिना समय गंवाए तत्काल भारत सरकार के आधिकारिक साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा cybercrime.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। घटना के शुरुआती 24 घंटे यानी 'गोल्डन आवर्स' में शिकायत दर्ज कराने से ठगी गई रकम के वापस मिलने की संभावना काफी अधिक रहती है। अलीगढ़ पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी लुभावने ऑनलाइन वादे के झांसे में न आएं और सतर्क रहें।





