राजस्थान में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुई एसआई भर्ती की पुनर्परीक्षा
राजस्थान पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021 की पुनर्परीक्षा आखिरकार कड़ी प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के बीच रविवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। इस परीक्षा को लेकर पिछले कई महीनों से राज्य के युवाओं में भारी उत्सुकता और तनाव का माहौल था। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी, ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा सके।
यह पुनर्परीक्षा राज्य के कुल 11 प्रमुख जिलों में बनाए गए विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई। परीक्षा प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और राज्य के चयन बोर्ड के अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए थे। हर केंद्र पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पाने के लिए कई स्तर की जांच प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा।
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लाखों युवाओं ने दिखाया उत्साह, बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन से हुई जांच
इस बहुप्रतीक्षित पुनर्परीक्षा के लिए कुल 2,18,114 अभ्यर्थियों ने अपना पंजीकरण कराया था। परीक्षा के आयोजन के लिए पूरे राज्य में कुल 666 केंद्र निर्धारित किए गए थे। चूंकि पिछली बार इस भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक के मामले सामने आए थे, इसलिए इस बार शासन और प्रशासन ने सुरक्षा के मामले में कोई भी कोताही नहीं बरतने का फैसला किया था।
परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी का अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया। इसके साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन) और सघन तलाशी के बाद ही परीक्षार्थियों को अंदर जाने की अनुमति दी गई। अधिकारियों का कहना था कि इस हाई-टेक सुरक्षा घेरे के कारण किसी भी सॉल्वर गैंग या फर्जी अभ्यर्थी के लिए परीक्षा हॉल तक पहुंचना नामुमकिन हो गया था।
चार साल का लंबा इंतजार और पेपर लीक का काला इतिहास
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 की मूल परीक्षा के लिए रिकॉर्ड 7,97,011 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 3,83,097 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। हालांकि, परीक्षा संपन्न होने के कुछ समय बाद ही इसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक और भ्रष्टाचार के सनसनीखेज खुलासे हुए थे। इन खुलासे ने राज्य के लाखों मेहनतकश युवाओं के सपनों पर पानी फेर दिया था, जिसके बाद इस पूरी भर्ती परीक्षा को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया गया था।
पेपर लीक होने के बाद युवाओं का गुस्सा फूटा था और लंबे समय तक न्याय की मांग को लेकर आंदोलन चले थे। आखिरकार कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक फेरबदल के बाद, मूल परीक्षा रद्द होने के पूरे चार साल बाद यह पुनर्परीक्षा आयोजित हो पाई है। इन चार वर्षों का यह लंबा दौर उन तमाम ईमानदार और मेहनतकश युवाओं के लिए बेहद संघर्षपूर्ण रहा, जो दिन-रात एक करके सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे।
एसओजी की कड़ी कार्रवाई और अब तक हुई गिरफ्तारियों का ब्योरा
राजस्थान में इस बहुचर्चित पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच का जिम्मा विशेष अभियान समूह (एसओजी) को सौंपा गया था। एसओजी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कई राज्यों में छापेमारी की और मास्टरमाइंडों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। जांच एजेंसी के अनुसार, इस भर्ती परीक्षा घोटाले में अब तक लगभग 149 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
गिरफ्तार किए गए लोगों में कई नकल माफिया, सरकारी तंत्र से जुड़े भ्रष्ट कर्मचारी और कुछ ऐसे फर्जी अभ्यर्थी भी शामिल हैं जिन्होंने पैसों के बल पर परीक्षा पास करने का शॉर्टकट अपनाया था। एसओजी की यह जांच अभी भी जारी है और एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस पूरे सिंडिकेट की जड़ें कहां-कहां तक फैली हुई थीं।
"युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। एसओजी अपनी निष्पक्ष जांच के जरिए इस पूरे गिरोह की तह तक जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, राजस्थान
आगे की राह और परिणाम को लेकर युवाओं की उम्मीदें
रविवार को पुनर्परीक्षा संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों की निगाहें परिणाम पर टिकी हुई हैं। परीक्षा देकर बाहर निकले अधिकांश युवाओं का कहना था कि इस बार पेपर का स्तर संतुलित था और प्रशासन द्वारा की गई कड़ी व्यवस्थाओं के कारण उन्हें नकल माफियाओं के खौफ से मुक्ति मिली। हालांकि, पुरानी कड़वी यादों के कारण कई छात्र अब भी पूरी चयन प्रक्रिया के पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की परीक्षा में जिस तरह की सख्ती बरती गई है, वह भविष्य की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक कड़ा संदेश साबित होगी। राजस्थान के युवाओं के लिए यह पुनर्परीक्षा केवल एक इम्तिहान नहीं, बल्कि उनके खोए हुए भरोसे को वापस पाने का एक बड़ा मौका है। अब देखना यह होगा कि चयन बोर्ड कितनी जल्दी उत्तर कुंजी जारी करता है और अंतिम परिणाम घोषित कर इस लंबी प्रक्रिया को सुखांत तक पहुंचाता है।






