तिहाड़ जेल में सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती के बीच बड़ा फैसला
देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल के भीतर प्रशासनिक मोर्चे पर एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया गया है। जेल अधिकारियों ने आपसी सुरक्षा और जेल की आंतरिक शांति को बनाए रखने के लिए दो चर्चित कैदियों आशुतोष रांका और सौरव दास को अलग-अलग परिसरों में रखने का निर्देश दिया है। जेल मैनुअल के मुताबिक, हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े इन दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे के संपर्क में आने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेल प्रशासन किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या आपसी विवाद से बचने के लिए बेहद सतर्क है। यही वजह है कि दोनों को न सिर्फ अलग बैरकों में रखा गया है, बल्कि उनके दैनिक गतिविधियों के समय को भी अलग-अलग निर्धारित किया गया है, ताकि रास्ते में भी दोनों का आमना-सामना न हो सके। जेल के सुरक्षा गार्डों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे इस नियम का सख्ती से पालन कराएं।
कैदियों की गतिविधियों पर सीसीटीवी कैमरों से रखी जा रही है पैनी नजर
तिहाड़ जेल की हाई-सिक्योरिटी विंग में बंद आशुतोष रांका और सौरव दास पर अत्याधुनिक कैमरों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। जेल प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है। सुरक्षा बलों की विशेष तैनाती इन दोनों की बैरकों के आसपास की गई है ताकि बाहरी या आंतरिक किसी भी तरह के खतरे को समय रहते टाला जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब दो ऐसे कैदी एक ही जेल परिसर में हों जिनके बीच किसी भी प्रकार का विवाद या संवाद जेल की शांति भंग कर सकता है, तो प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह निवारक उपाय तुरंत लागू करे। इसी नीति के तहत यह कदम उठाया गया है।
जेल मैनुअल के नियमों का हो रहा है कड़ाई से अनुपालन
भारतीय जेल कानूनों और तिहाड़ के आंतरिक दिशा-निर्देशों के तहत कैदियों के वर्गीकरण और उनकी सुरक्षा के पुख्ता प्रावधान हैं। आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में भी इन्हीं नियमों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। न केवल उनकी मुलाकातियों पर नजर रखी जा रही है, बल्कि उनके वकीलों से मिलने के समय और तौर-तरीकों को भी पूरी तरह विनियमित कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह का संदेश बाहर या अंदर अवैध रूप से न जा सके।
"जेल के भीतर हर कैदी की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं जहां आपसी संवाद से कानून व्यवस्था या जेल की शांति को खतरा हो सकता है, तो प्रशासन सख्त और तुरंत कदम उठाता है। आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में भी पूरी सावधानी बरती जा रही है।" — वरिष्ठ जेल अधिकारी, तिहाड़ जेल
कानूनी प्रक्रिया और आगे की सुगबुगाहट
इस प्रशासनिक कदम के बाद अब दोनों पक्षों के वकीलों और कानूनी सलाहकारों की नजरें अदालत की आगामी कार्रवाइयों पर टिकी हैं। जेल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अदालत या उच्चाधिकारियों के नए निर्देश नहीं मिलते, तब तक यह पृथक्करण (Segregation) पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। सुरक्षा के इन कड़े इंतजामों ने एक बार फिर तिहाड़ की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आम जनता और विधिक जानकारों के बीच इस बात की चर्चा है कि जेल प्रशासन का यह कदम सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह उचित है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में कानूनी और न्यायिक स्तर पर क्या नए मोड़ आते हैं, लेकिन फिलहाल तिहाड़ की चार दीवारों के भीतर दोनों कैदी एक-दूसरे से पूरी तरह कटे हुए अपनी कानूनी लड़ाई का सामना कर रहे हैं।








