उमेश पाल हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में शामिल और अतीक अहमद गैंग के करीबी मोहम्मद अरमान उर्फ अरमान बिहारी को प्रयागराज पुलिस ने आखिरकार अपनी हिरासत में ले लिया है। तीन साल से अधिक समय से फरार चल रहे अरमान को लेकर पुलिस को एक बड़ा सुराग हाथ लगा था, जिसके बाद उसे बिहार की गया सेंट्रल जेल से ट्रांजिट रिमांड पर प्रयागराज लाया गया है। इस गिरफ्तारी को उमेश पाल हत्याकांड की जांच में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
कबाब-पराठे की दुकान से अतीक गैंग तक का सफर
बिहार के गया का रहने वाला अरमान साल 2012 में प्रयागराज आया था। यहां कैंटोनमेंट थाना क्षेत्र में उसने कबाब-पराठे की एक छोटी-सी दुकान खोली थी। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसकी मुलाकात गुड्डू मुस्लिम से हुई, जो उस समय थोक में चिकन सप्लाई का काम करता था। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, जिसके बाद अरमान ने दुकान अपने छोटे भाई को सौंप दी और पूरी तरह गुड्डू मुस्लिम के साथ रहने लगा।
इसके बाद अरमान का दायरा बढ़ता गया और उसकी पहचान अतीक अहमद के अन्य करीबियों जैसे नफीस बिरयानी और साबिर से हुई। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि अरमान अहमद भाइयों (अतीक और अशरफ) के संपर्क में रहने वाले लोगों के साथ साबरमती और बरेली जेल तक भी जाया करता था। चुनावी गतिविधियों और साजिश के दौरान भी वह लगातार अतीक परिवार के संपर्क में सक्रिय रहा।
सीसीटीवी फुटेज में सामने आया था नाम
24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में अधिवक्ता उमेश पाल और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात के सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों की गतिविधियां कैद हुई थीं। पुलिस के अनुसार, घटना के वक्त अरमान मोटरसाइकिल चला रहा था और कुख्यात गुड्डू मुस्लिम उसके पीछे बैठा था। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आसानी से फरार हो गए थे।
घटना के बाद अरमान बिहार के गया भाग गया था, जहां उसने कथित तौर पर एक अन्य गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया। हत्या के प्रयास के उस मामले में उसने अदालत में सरेंडर कर दिया था और तब से गया सेंट्रल जेल में बंद था। प्रयागराज पुलिस को जब उसकी इस मौजूदगी की भनक लगी, तो उसने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे अपनी कस्टडी में ले लिया।
खुलासे की उम्मीद और आगे की जांच
पुलिस का मानना है कि अरमान से पूछताछ के जरिए उमेश पाल हत्याकांड की कई अनसुलझी कड़ियों को जोड़ा जा सकता है। हत्याकांड के कई मुख्य आरोपी या तो पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं या असद और गुलाम की तरह दुनिया में नहीं हैं, जबकि गुड्डू मुस्लिम और साबिर जैसे शातिर अपराधी अभी भी फरार हैं। ऐसे में अरमान एकमात्र ऐसा जरिया है जो पुलिस को फरार आरोपियों और अतीक के गुप्त नेटवर्क तक पहुंचा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पुलिस रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। मामले की जांच अदालत और पुलिस के अधीन है। साभार: संबंधित पुलिस रिपोर्ट्स / मीडिया सूत्र।
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