नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की ताजा बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। इस बार केंद्रीय बैंक के फैसलों ने आम आदमी और बाजार दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पिछले काफी समय से लोग इस बात का इंतजार कर रहे थे कि बैंक लोन की ब्याज दरों में क्या बदलाव होगा। आज आई घोषणा के बाद साफ हो गया है कि कर्ज लेने वाले ग्राहकों को अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी पड़ेगी। देश की आर्थिक चाल और महंगाई के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
लंबे समय से रेपो रेट को एक ही जगह पर स्थिर रखा गया था, लेकिन अब इसमें फेरबदल किया गया है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और बाजार की मांग को संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की जीडीपी की रफ्तार और विकास के अनुमानों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत रफ्तार से आगे बढ़ रही है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का विकास पहिए थमेंगे नहीं।
साढ़े तीन साल बाद लोन की किस्त पर बढ़ा बोझ
लंबे अंतराल के बाद दरों में यह बदलाव सीधे तौर पर आम नागरिकों की जेब पर असर डालने वाला है। पिछले लगभग साढ़े तीन साल से रेपो रेट में बढ़ोतरी का दौर थमा हुआ था, जिससे लोगों को राहत मिल रही थी। अब दरें बढ़ने के कारण बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने भी अपने कर्ज महंगे करने शुरू कर दिए हैं। जिन लोगों ने पहले से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, उनकी मासिक यानी ईएमआई की रकम बढ़ जाएगी। बैंक अब नए ग्राहकों के साथ-साथ पुराने ग्राहकों के लोन पर भी बढ़ी हुई ब्याज दरें लागू करेंगे।
इस पूरी स्थिति का जमीनी असर मध्यम वर्ग के परिवारों पर साफ दिखाई दे रहा है। अपने सपनों का घर या गाड़ी खरीदने वाले आम लोग अब अपने मासिक बजट का नए सिरे से हिसाब-किताब लगा रहे हैं। हर महीने बैंक को जाने वाली किस्त बढ़ने से घर के दूसरे जरूरी खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय बैंक का यह कदम जरूरी था ताकि बाजार में पैसे का प्रवाह नियंत्रित रह सके और अर्थव्यवस्था पटरी से न उतरे।
जीडीपी ग्रोथ और अर्थव्यवस्था की मौजूदा चाल
ब्याज दरों में फेरबदल के साथ ही केंद्रीय बैंक ने देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और सेवा क्षेत्र बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है। ग्रामीण इलाकों से भी मांग में सुधार देखने को मिल रहा है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छा संकेत है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय बाजार ने अपनी जो लचीली ताकत दिखाई है, उसने दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा जीता है।
आम जनता के मन में यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और इजाफा हो सकता है। द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि यह पूरी तरह से आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़ों और खुदरा बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर महंगाई तय सीमा के भीतर रहती है, तो शायद केंद्रीय बैंक दरों को कुछ समय के लिए फिर से थाम सकता है। फिलहाल बैंक जाने वाले हर ग्राहक को अपने वित्तीय आलेख और मासिक बजट की योजना नए सिरे से तैयार करनी होगी ताकि किसी भी अचानक आने वाले आर्थिक दबाव से बचा जा सके।




