देशभर में साइबर धोखाधड़ी और अवैध वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के मामले में एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। ED के मुंबई जोनल ऑफिस ने ‘चैलेंजर किंग’ के नाम से कुख्यात मेहमूद अब्दुल समद भगाड़ के खिलाफ तीसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर दी है। यह शिकायत धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत मुंबई की विशेष PMLA अदालत के समक्ष पेश की गई है।
कैसे खुला 157 करोड़ के म्यूल अकाउंट्स का राज?
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत एक स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज FIR से हुई थी, जिसे बाद में महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) ने अपने हाथ में लिया और री-रजिस्टर किया। जांच एजेंसियों के रडार पर यह मामला तब आया जब एक सहकारी बैंक में हाल ही में खोले गए बैंक खातों में अचानक 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी-भरकम राशि जमा होने की बात सामने आई।
ED की विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी मेहमूद भगाड़ के इशारे पर कई फर्जी शेल कंपनियां बनाई गईं और उनके नाम पर बैंक खाते खोले गए। इन संदिग्ध म्यूल खातों में कुल मिलाकर 157 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई। इसके बाद इस काले धन को मेहमूद भगाड़ के नियंत्रण वाली अन्य कंपनियों के खातों में भेजकर लेयरिंग की गई और बाद में हवाला चैनलों के जरिए देश के दूसरे हिस्सों में खपा दिया गया।
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क्रिप्टोकरेंसी USDT और हवाला का खतरनाक खेल
जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तौर-तरीकों का पर्दाफाश करते हुए बताया कि आरोपी अवैध कमाई को छुपाने के लिए आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। मेहमूद भगाड़ और उसके सिंडिकेट के लोग USDT (एक लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी) की ट्रेडिंग के जरिए पैसों का लेनदेन करते थे। आरोप है कि साइबर फ्रॉड और अवैध ऑनलाइन गेमिंग-बेटिंग के जरिए कमाए गए भारतीय रुपये भगाड़ के कंट्रोल वाले म्यूल खातों में जमा किए जाते थे, जिसके बदले में अवैध कारोबारियों को USDT उपलब्ध कराया जाता था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में ED पहले ही सूरत, मालेगांव, अहमदाबाद और मुंबई समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर चुकी है। इन तलाशी अभियानों के दौरान एजेंसी ने लगभग 15 करोड़ रुपये की नगदी बरामद की थी, जबकि विभिन्न बैंक खातों में मौजूद करीब 34 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं। इसके अलावा, अपराधियों की 95 लाख रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को भी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत जब्त किया गया है।
अब तक हो चुकी हैं कई गिरफ्तारियां
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस आपराधिक नेटवर्क में संलिप्तता के आरोप में अब तक कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी इस मामले में पहले ही एक मुख्य शिकायत और दो सप्लीमेंट्री शिकायतें दाखिल कर चुकी है, जिनका संज्ञान PMLA की विशेष अदालत पहले ही ले चुकी है। अब मेहमूद भगाड़ के खिलाफ यह तीसरी सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल होने के बाद इस पूरे सिंडिकेट पर शिकंजा और अधिक कस गया है। ED अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क की जड़ें कहां तक फैली हैं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए आगे की जांच अभी भी तेजी से जारी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और आधिकारिक एजेंसियों की रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। वित्तीय धोखाधड़ी और जांच से जुड़ी यह जानकारी सार्वजनिक दस्तावेजों और ED की प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित है।


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