प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में उद्योगपति आनंद जैन की कंपनी जय कॉर्प लिमिटेड और अन्य से जुड़े मामलों में निर्णायक कार्रवाई की है। ED के मुंबई जोन-II कार्यालय ने महाराष्ट्र के एक प्रमुख इलाके में 88.47 एकड़ की बेशकीमती जमीन अटैच की है, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 336 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की गई है, जो वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी की यह जांच सीबीआई (CBI) के ईओबी (EOB) मुंबई द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर (FIR) पर आधारित है। यह एफआईआर बॉम्बे हाईकोर्ट के 31 जनवरी 2025 के आदेश के बाद दर्ज की गई थी, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं, फंड के डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की गहन जांच का निर्देश दिया गया था। जांच में सामने आया कि साल 2006-07 में जय कॉर्प लिमिटेड ने अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर वेंचर कैपिटल फंड (UIVCF) लॉन्च किया था। इस फंड के माध्यम से, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, अन्य सरकारी वित्तीय संस्थानों और बड़ी संख्या में निजी निवेशकों से लगभग 2,434 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाई गई थी। इस राशि का उद्देश्य देशभर में रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए विशेष उद्देश्य वाली इकाइयों (SPVs) में निवेश करना था।
हालांकि, जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। ईडी का आरोप है कि फंड की अवधि को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की मंजूरी लिए बिना तय सीमा से आगे बढ़ाया गया। जब यह बात SEBI के संज्ञान में आई, तो नियामक ने फंड को बंद करने का निर्देश दिया और निवेशकों को बाहर निकलने का विकल्प प्रदान करने के लिए फंड की SPVs में मौजूद संपत्तियों का एक स्वतंत्र वैल्यूअर से मूल्यांकन कराने को कहा। यह कदम पारदर्शिता और निवेशक हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण था।
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फंड की हेराफेरी और अटैचमेंट की प्रक्रिया
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि UIVCF के प्रबंधन की कथित मिलीभगत से SPVs में फंड की हिस्सेदारी की वास्तविक कीमत को जानबूझकर कम करके आंका गया। उदाहरण के तौर पर, इसे मात्र 269.20 करोड़ रुपये दिखाया गया, जबकि इसका बाजार मूल्य कहीं अधिक था। इसी कम मूल्यांकन के आधार पर निवेशकों को एग्जिट दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ।
एजेंसी ने नीलकंठ टाउनशिप एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक SPV का भी विशेष रूप से जिक्र किया है। UIVCF ने इस कंपनी में 51 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के अलीबाग में जमीन खरीदने के लिए किया गया। ईडी का आरोप है कि इस SPV में फंड की हिस्सेदारी का भी फेयर मार्केट वैल्यू से काफी कम दिखाया गया और बाद में जय कॉर्प के प्रमोटरों से जुड़ी पांच संस्थाओं ने इन यूनिट्स को बेहद कम कीमत पर अधिग्रहित कर लिया। इस कथित लेनदेन से लगभग 230 करोड़ रुपये की आपराधिक कमाई (Proceeds of Crime) उत्पन्न हुई। इसी आधार पर, 31 अक्टूबर 2022 की स्थिति में, 230 करोड़ रुपये मूल्य की SPV की अचल संपत्तियों को अटैच किया गया, जिनकी मौजूदा बाजार कीमत अब 336 करोड़ रुपये हो चुकी है। यह अटैचमेंट मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत किया गया है, जिसके तहत अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने का प्रावधान है।
यह पहला मौका नहीं है जब ईडी ने इस मामले में कार्रवाई की है। इससे पहले भी तलाशी अभियान के दौरान लगभग 1.86 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए थे, जबकि डीमैट खातों और म्यूचुअल फंड में लगभग 99.47 करोड़ रुपये की रकम को फ्रीज कर दिया गया था। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और यह प्रोविजनल अटैचमेंट जांच के दौरान सामने आए कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से अर्जित संपत्ति से जुड़े आरोपों के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्रवाई वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।
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