नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की पवित्र नदियों में शुमार गोदावरी इन दिनों एक गहरे और दर्दनाक संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ दिनों में नदी के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिन्होंने हर किसी को हैरान कर दिया है। लोग अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए इस उफनती नदी को चुन रहे हैं। आंध्र प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक नदी के पानी में वाहन गिराने और खुदकुशी करने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस गंभीर स्थिति ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि आम जनता की भी नींद उड़ा दी है।
ताजा मामलों की बात करें तो आंध्र प्रदेश में पंचायत राज विभाग के एक इंजीनियर समेत तीन लोगों ने नदी में कूदकर अपनी जान दे दी। हालांकि, गनीमत यह रही कि वहां मौजूद सतर्क मछुआरों ने एक मासूम पोते को सुरक्षित बचा लिया। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र से एक और दिल दहलाने वाला मामला सामने आया जहां एक शिक्षक ने अपने दो बच्चों के साथ कार को जानबूझकर नदी में गिरा दिया। इस शिक्षक ने अपनी इस खौफनाक कदम से पहले व्हाट्सएप पर एक स्टेटस भी लगाया था जिसमें सुसाइड करने की बात लिखी गई थी।
गोदावरी के पानी में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे खौफनाक कदम
जांच में यह बात सामने आ रही है कि लोग पारिवारिक तनाव, मानसिक दबाव और व्यक्तिगत परेशानियों के चलते ऐसा चरम कदम उठा रहे हैं। एक अन्य दिल दहलाने वाली घटना में एक माता-पिता अपने तीन साल के मासूम बच्चे को सड़क पर अकेला छोड़कर उफनती गोदावरी नदी में कूद गए। वह छोटा बच्चा रात भर अपनी मां के स्कूटर से चिपक कर रोता रहा और सुबह जब लोगों ने उसे देखा तो सबकी आंखें नम हो गईं। इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ती मानसिक अशांति और अकेलेपन की बहुत ही गंभीर तस्वीर पेश कर रही हैं।
शिक्षा विभाग से जुड़े एक मामले में जब दो मासूमों के साथ कार नदी में उतारी गई, तो उसके बाद प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया। व्हाट्सएप पर सुसाइड का कारण लिखकर इस तरह जान देना यह बताता है कि लोग अब संवाद के रास्ते बंद कर रहे हैं। झारखंड के गिरिडीह इलाके में भी गोदावरी नदी से जुड़े हादसों ने लोगों को डरा दिया है जहां होली का जश्न मातम में बदल गया। नदी में नहाने गए दो युवक तेज बहाव की चपेट में आ गए और चार घंटे की लंबी मशक्कत के बाद उनके शव बाहर निकाले जा सके।
प्रशासनिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर बड़े सवाल
इन तमाम हादसों के बाद अब बड़े सवाल यह उठ रहे हैं कि क्या नदी के पुलों और घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। क्या प्रशासन ऐसे लोगों की काउंसलिंग के लिए कोई हेल्पलाइन या त्वरित सहायता तंत्र बना पाएगा जो मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं। स्थानीय पुलिस अब इन सभी मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है ताकि यह पता चल सके कि आखिर लोग इतना बड़ा कदम उठाने से पहले किस मानसिक स्थिति से गुजर रहे थे। गोदावरी की लहरें सिर्फ पानी का बहाव नहीं हैं, बल्कि वे आज कई अनकहे दुखों और प्रशासनिक कमियों को भी अपने साथ बहाकर ला रही हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम जब इस पूरे मामले की तह तक गई तो यह साफ हुआ कि केवल पुलिस कार्रवाई से इस समस्या का हल नहीं निकलेगा। इसके लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा और अपनों के साथ संवाद बढ़ाना होगा। गोदावरी के इन घाटों पर अब सुरक्षा और पहरेदारी बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है ताकि कोई और परिवार इस तरह की त्रासदी का शिकार न बने।
नदी के किनारों पर बढ़ाई गई चौकसी और पुलिस पहरा
इन लगातार हो रही घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन ने गोदावरी के मुख्य पुलों और किनारों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति वहां लंबे समय तक रुके तो उससे पूछताछ की जा सके। इसके अलावा स्थानीय गोताखोरों और बचाव दलों को भी हर वक्त अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।





