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लाल सागर में हूती विद्रोहियों का तांडव: सऊदी अरब पर हमलों से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों ने लाल सागर में तेल सप्लाई के रास्ते को खतरे में डाल दिया है। इस तनाव से वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है और सऊदी अरब के तेल ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
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18 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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लाल सागर में हूती विद्रोहियों का तांडव: सऊदी अरब पर हमलों से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा
📷 लाल सागर में हूती विद्रोहियों का तांडव: सऊदी अरब पर हमलों से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से अहम मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब के पास के द्वीपों पर कब्जा कर लिया है।
  • इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कुल व्यापार का करीब 12 फीसदी हिस्सा गुजरता है, जिस पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
  • ताजा संघर्ष और हमलों की वजह से यमन में लगभग 1.25 लाख लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा है।

लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत

यमन में हूती विद्रोहियों के आक्रामक तेवर एक बार फिर पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन गए हैं। लाल सागर में उनकी लगातार गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई का अहम रास्ता खतरे में पड़ गया है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान हूतियों ने यमन के कई महत्वपूर्ण इलाकों में अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। अब उनके निशाने पर सीधे तौर पर सऊदी अरब से जुड़े जहाज और तेल के ठिकाने आ गए हैं, जिससे खाड़ी देशों में तनाव चरम पर है।

इस संघर्ष का सबसे भयानक असर यमन के आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ताजा लड़ाई की वजह से करीब 1.25 लाख लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, यमन में लंबे समय से चल रहे विनाशकारी गृह युद्ध में अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मानवीय मदद के मोर्चे पर भी स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है और संयुक्त राष्ट्र की अपील के बावजूद पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है।

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बाब अल-मंदेब के समुद्री मार्ग पर मंडराया संकट

हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बेहद अहम बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा जमा लिया है। इसके बाद उन्होंने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित कई द्वीपों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि सामान्य दिनों में दुनिया का करीब 12 फीसदी कारोबार इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अब हूती लड़ाके जिबूती से महज 32 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच चुके हैं, जहां अमेरिका समेत कई प्रमुख देशों के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

हूती विद्रोहियों का साफ कहना है कि वे सऊदी अरब पर दबाव बनाने के लिए उसके जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बना रहे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि सऊदी अरब उनके नियंत्रण वाले इलाकों पर लगाई गई सख्त नाकाबंदी को तुरंत हटाए। इस बीच, सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल पाइपलाइन पर भी हमला हुआ है, जिसकी जिम्मेदारी इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया पर डाली गई है। इन लगातार हमलों से दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

शिपिंग ट्रैफिक प्रभावित और कूटनीतिक कोशिशें तेज

इन हमलों के बाद बाब अल-मंदेब के रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। शिपिंग कंपनी विंडवर्ड के आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों से पहले इस रूट से हर रोज लगभग 35 जहाज गुजरते थे, जिनकी संख्या घटकर 25 तक पहुंच गई थी। हालांकि सुरक्षा के बीच कुछ राहत मिलने पर हाल ही में जहाजों की आवाजाही में थोड़ा सुधार देखा गया है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि हूती आगे भी सऊदी हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए अब कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। पिछले दिनों ओमान में अमेरिका और हूती प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक हुई है। अमेरिका का दावा है कि वह इस पूरे मामले पर लगातार सऊदी अरब के संपर्क में है। इसके अलावा, तुर्की भी ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर हालात को संभालने की कोशिश कर रहा है।

"हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर और सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर किए जा रहे हमले क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं।" — अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता

मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं

इस पूरे संघर्ष और बमबारी के बीच यमन के आम लोग पिस रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया झड़पों में कई नागरिकों की जान गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब की ओर से भी यह जानकारी सामने आई है कि एक हूती ड्रोन को हवा में नष्ट करने के बाद उसके गिरे मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए।

यमन के भीतर खाने-पीने की चीजों, साफ पानी और मेडिकल सुविधाओं का भारी अभाव है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा राहत कार्यों के लिए की गई फंडिंग की अपील का अब तक बहुत ही कम हिस्सा मिल पाया है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट मध्य पूर्व के साथ-साथ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले सकता है।

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