तेहरान/इस्फहान — ईरान की जेलों से मानवाधिकारों के हनन की एक और डरावनी तस्वीर सामने आई है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के जुर्म में जेल की सलाखों के पीछे बंद एक युवा प्रदर्शनकारी ने अपनी आखिरी ख्वाहिश के तौर पर फोन पर अपनी मंगेतर से निकाह किया था। लेकिन बेरहम ईरानी हुकूमत ने इस प्रेम और उम्मीद को भी कुचल दिया और शादी के महज चौबीस घंटे के भीतर उसे मौत की सजा दे दी। यह घटना ईरान की न्याय व्यवस्था और जेलों के अंदर मानवाधिकारों की दयनीय स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फांसी के फंदे पर लटकाए गए इस युवक की पहचान 25 वर्षीय अलीरेजा सेपाही के रूप में हुई है, जो ईरान के इस्फहान शहर का रहने वाला था। अलीरेजा पिछले कुछ समय से जेल में बंद था और उसे लगातार गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा था। अपनी मौत के करीब आते देख उसने जेल प्रशासन से अपनी मंगेतर से फोन पर बात करने की अंतिम अनुमति मांगी थी। उसी फोन कॉल के दौरान दोनों ने जेल के अधिकारियों की निगरानी में फोन पर ही शादी की रस्में पूरी की थीं।
शादी के बाद परिवार को मिली मौत की खबर
अलीरेजा के परिवार और मंगेतर के लिए वह फोन कॉल जीवन का सबसे भावनात्मक पल था, जहां एक तरफ जेल की दीवारों के बीच उनकी शादी हुई तो वहीं दूसरी तरफ मौत का साया मंडरा रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि शायद न्यायिक प्रक्रिया में कुछ नरमी बरती जाएगी या सजा कम होगी। लेकिन इस फोन कॉल के ठीक अगले दिन सुबह जेल अधिकारियों ने परिवार को फोन कर दिया कि अलीरेजा को फांसी दी जा चुकी है। इस अचानक आए संदेश से पूरा परिवार और मंगेतर गहरे सदमे में डूब गए।
ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों और सरकार के खिलाफ उठी आवाज़ों के बाद से ही देश भर में गिरफ्तारियों का दौर जारी है। सुरक्षा बलों ने हजारों प्रदर्शनकारियों को जेलों में ठूंस रखा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन कैदियों को बिना निष्पक्ष कानूनी सुनवाई के और बिना वकीलों से मिले ही धड़ाधड़ फांसी दी जा रही है। अलीरेजा सेपाही का मामला भी इसी दमनकारी नीति का एक हिस्सा है, जहां विरोध की हर आवाज को हमेशा के लिए खामोश करने की कोशिश की जा रही है।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान में हो रही इन ताबड़तोड़ फांसी की सजाओं पर गहरी नाराजगी जताई है। संगठनों का कहना है कि जेल के अंदर बंद कैदियों के बुनियादी मानवीय अधिकारों का भी खुला उल्लंघन किया जा रहा है। फोन पर शादी करने जैसे मानवीय और छोटे से अधिकार को पूरा करने के तुरंत बाद फांसी देना ईरानी न्यायपालिका की तानाशाही प्रवृत्ति को साफ तौर पर उजागर करता है। दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ता ईरान सरकार की इस क्रूरता के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस घटना के बाद लोगों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ईरान के कई शहरों में पहले से ही सुलग रही असंतोष की आग इस तरह की घटनाओं के बाद और अधिक भड़क सकती है। आम जनता अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलने से डरती है, क्योंकि न्याय के नाम पर दी जाने वाली ऐसी सजाएं समाज में खौफ का माहौल पैदा कर रही हैं। अलीरेजा की मंगेतर और उसका परिवार इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है, और उनकी यह दर्दनाक प्रेम कहानी अब ईरान के संघर्ष का एक नया प्रतीक बन गई है।
न्याय की आस और भविष्य का अंधकार
अलीरेजा सेपाही की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना है जो अपने ही नागरिकों की भावनाओं और जीवन का कोई सम्मान नहीं करती। फोन पर हुई वह आखिरी शादी और उसके अगले दिन आया फांसी का फरमान दुनिया भर की अंतरात्मा को झकझोर रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि ईरान में विरोध के स्वरों को दबाने के लिए सरकार किसी भी हद तक जाने को तैयार है, और आम इंसानी रिश्तों की गरिमा को भी रौंदा जा रहा है।






