डिजिटल युग में जहां एक तरफ तकनीक ने हमारे जीवन को बेहद आसान बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराधियों के नए-ने हथकंडे आम लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं। खासकर युवा पीढ़ी और महिलाएं इन दिनों ऑनलाइन ठगी और सोशल मीडिया पर होने वाले अपराधों का आसानी से शिकार बन जाती हैं। इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में पुलिस प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में कानपुर के बर्रा-छह स्थित प्रतिष्ठित कर्मयोगी विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में शुक्रवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को न सिर्फ साइबर क्राइम के खतरों से आगाह करना था, बल्कि उन्हें 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी था।
बर्रा थाना प्रभारी ने दिए ऑनलाइन ठगी से बचने के अचूक टिप्स
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बर्रा थाना प्रभारी रवीन्द्र श्रीवास्तव ने छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आज के समय में साइबर ठग किस तरह फोन कॉल, फर्जी मैसेज, लॉटरी के झांसे और सोशल मीडिया के जरिए भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। थाना प्रभारी ने बच्चों को समझाया कि कभी भी अपनी निजी जानकारियां, बैंक खाते के विवरण, ओटीपी (OTP) या पिन नंबर किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने की बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करना चाहिए। समय पर दी गई सूचना से ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। पुलिस अधिकारियों की इस पहल से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान मिला और उन्होंने डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के गुर सीखे।
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मिशन शक्ति के तहत सब इंस्पेक्टर स्मृति वर्मा ने बढ़ाई छात्राओं की हिम्मत
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत कार्यक्रम में मौजूद सब इंस्पेक्टर स्मृति वर्मा ने छात्राओं को विशेष रूप से संबोधित किया। उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं को विषम परिस्थितियों में साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग हर समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए तत्पर है और किसी भी असामाजिक तत्व से डरने की कोई जरूरत नहीं है।
सब इंस्पेक्टर वर्मा ने छात्राओं को वीरांगनाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने स्कूल और कॉलेज परिसरों के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्राओं को उत्तर प्रदेश पुलिस के वीमेन पावर लाइन 1090 और आपातकालीन सेवा 112 के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद ली जा सके।
शिक्षा और समानता ही महिला सशक्तिकरण की असली नींव
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के प्रबंधक रवीश द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में महिलाओं को वास्तविक रूप से मजबूत बनाने के लिए उन्हें आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर बालिका को उच्च शिक्षा दिलाना समाज और परिवार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। शिक्षा के बिना किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है।
"महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से समान अवसर मिलने चाहिए तथा हर बालिका को उच्च शिक्षा मिल सके। यह हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।" — रवीश द्विवेदी, प्रबंधक, कर्मयोगी विद्या निकेतन इंटर कॉलेज
प्रबंधक के इस विचारों का स्कूल के अन्य शिक्षकों और उपस्थित गणमान्य लोगों ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और यदि उन्हें सही दिशा और अवसर मिले, तो वे देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
विद्यालय परिवार और गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाचार्य विवेक मिश्रा और अन्य शिक्षकों की भूमिका बहुत अहम रही। कार्यक्रम के दौरान आशा द्विवेदी, संतोष सिंह समेत कई शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने बहुत ही ध्यान से पुलिस अधिकारियों की बातों को सुना और साइबर सुरक्षा से जुड़े अपने कई सवालों के जवाब भी प्राप्त किए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य ने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता अभियानों से बच्चों में न सिर्फ कानूनी जागरूकता बढ़ती है, बल्कि वे समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार नागरिक भी बनते हैं। इस तरह के आयोजनों से स्कूली स्तर पर बच्चों में सुरक्षा की भावना मजबूत होती है और वे भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं।
निष्कर्ष: जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार
कानपुर के इस विद्यालय में आयोजित हुआ यह जागरूकता सत्र यह साबित करता है कि बदलते समय के साथ हमारी सुरक्षा की परिभाषा भी बदल चुकी है। पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ अब डिजिटल और साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। इनसे निपटने के लिए पुलिस और शिक्षण संस्थानों का आपसी तालमेल बेहद जरूरी है। जब युवा पीढ़ी शुरुआत से ही इन खतरों के प्रति जागरूक होगी, तो वे न केवल खुद सुरक्षित रहेंगे बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।




