मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर को अंदर तक झकझोर देने वाले बहुचर्चित 'नीला ड्रम' हत्याकांड (सौरभ राजपूत मर्डर केस) में आखिरकार अदालत का ऐतिहासिक फैसला आ गया है। स्थानीय अदालत ने इस क्रूर हत्याकांड के मुख्य आरोपियों—मुस्कान और साहिल—को दोषी करार दिया है। इस सनसनीखेज मामले ने अपनी निष्पत्ति और क्रूरता के कारण पूरे देश का ध्यान खींचा था, और अब अदालत के इस निर्णय के बाद न्याय की प्रक्रिया अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गई है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए आइए जानते हैं इस मामले के हर एक पहलू और कोर्ट रूम के भीतर की गहमागहमी की पूरी कहानी।
फैसला आते ही कोर्ट रूम में टूटे आरोपी, जेल में कटी बेचैन रातें
जैसे ही न्यायाधीश ने मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी करार दिया, दोनों आरोपियों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अदालत कक्ष में फैसला सुनते ही दोनों आरोपी फूट-फूटकर रोने लगे। गुनाह के लंबे दौर के बाद कानून के शिकंजे में कस चुके इन दोनों चेहरों पर कानून का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता था। जेल सूत्रों का कहना है कि फैसले के बाद से दोनों की बेचैनी काफी बढ़ गई है। जिला कारागार में उन्होंने रात बेहद तनाव में बिताई और तनाव के चलते उनका खाना-पीना भी लगभग छूट सा गया है। जिस ठंडक और बेफिक्री के साथ उन्होंने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था, वह अहंकार अब पूरी तरह टूट चुका है।
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अभियोजन पक्ष की दो टूक: 'दरिंदों के लिए फांसी से कम कुछ नहीं'
अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब सबकी निगाहें सजा के ऐलान पर टिकी हैं। अभियोजन पक्ष ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' (सबसे दुर्लभ से दुर्लभतम) श्रेणी में रखने की पुरजोर वकालत की है। सरकारी वकील और पीड़ित पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए मुस्कान और साहिल के लिए मौत की सजा (फांसी) की मांग की है। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि जिस प्रकार सुनियोजित तरीके से सौरभ राजपूत को मौत के घाट उतारा गया और साक्ष्यों को छिपाने के लिए उसके शव को नीले ड्रम में ठिकाने लगाने की कोशिश की गई, वह समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला कृत्य है। ऐसे अपराधियों को बख्शा जाना न्याय प्रणाली के साथ अन्याय होगा।
क्या थी 'नीला ड्रम' हत्याकांड की पृष्ठभूमि?
यह मामला कुछ महीने पहले तब प्रकाश में आया था जब मेरठ में एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में गुमशुदगी और फिर एक नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम से उसके क्षत-विक्षत शव की बरामदगी ने सनसनी फैला दी थी। पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि मृतक सौरभ राजपूत और उसकी पत्नी मुस्कान के बीच के रिश्तों में आई कड़वाहट और अवैध संबंधों की दास्तान इस खौफनाक वारदात की वजह बनी। मुस्कान ने अपने कथित प्रेमी साहिल के साथ मिलकर सौरभ को रास्ते से हटाने का खौफनाक षड्यंत्र रचा था। हत्या के बाद शव को एक नीले ड्रम में भरकर बंद कर दिया गया था, ताकि किसी को भनक न लगे। लेकिन पुलिस की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच ने इस परत-दर-परत राज को बेनकाब कर दिया।
अगली सुनवाई 14 अक्टूबर: अब तय होगी सजा की इबारत
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद पुख्ता सबूतों व गवाहों के आधार पर मुस्कान और साहिल को भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत दोषी करार दिया है। अब इस बहुप्रतीक्षित मामले की अगली सुनवाई आगामी 14 अक्टूबर को तय की गई है। 14 अक्टूबर का दिन इस केस का सबसे बड़ा पड़ाव होगा, जब अदालत दोषियों की सजा की अवधि का ऐलान करेगी। क्या अदालत अभियोजन पक्ष की मांग मानते हुए दोनों को फांसी के फंदे तक पहुंचाएगी या उम्रकैद की सजा सुनाएगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात तय है कि इस फैसले ने अपराधियों के मन में कानून का डर एक बार फिर मजबूती से स्थापित कर दिया है।








