नई दिल्ली/कोच्चि — देश भर में इन दिनों ऑनलाइन ठगी और फर्जीवाड़े के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। दक्षिण भारत के राज्य केरल से एक के बाद एक कई बड़े धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। आम लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए शातिर ठग नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ियों के नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है तो कभी सरकारी लॉटरी के नाम पर नकली टिकट बेचे जा रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां इन सभी मामलों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और तेजी से शिकंजा कस रही हैं।
ताजा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर फुटबॉलर लियोनेल मेसी के नाम के गलत इस्तेमाल से जुड़ा हुआ है। एंटो ऑगस्टीन से जुड़े मामले में मेसी के नाम पर कथित तौर पर धोखाधड़ी की बात सामने आई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने व्यापक स्तर पर छापेमारी शुरू कर दी है। आरोपियों के ठिकानों पर लगातार पुलिस दबिश दे रही है ताकि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब किया जा सके। शुरुआती जांच में पता चला है कि बड़े नामों का सहारा लेकर लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसाया जा रहा था।
ओणम बंपर लॉटरी के नाम पर बड़ा ऑनलाइन फर्जीवाड़ा
केवल बड़े नाम ही नहीं बल्कि आम लोगों को आकर्षित करने वाले त्योहारों के ऑफर्स भी अब ठगों का हथियार बन चुके हैं। केरल के लोकप्रिय ओणम बंपर लॉटरी के नाम पर भी नकली टिकट बनाने का मामला सामने आया है। शातिर अपराधियों ने हूबहू असली जैसे दिखने वाले नकली टिकट तैयार कर लिए और ऑनलाइन माध्यम से लोगों को बेचने लगे। सोशल मीडिया और फर्जी वेबसाइटों के जरिए इस ठगी को अंजाम दिया जा रहा था। जब तक लोग इस धोखाधड़ी को समझ पाते, तब तक कई लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके थे। रिपोर्टर लाइव की पड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके आम नागरिकों को ठगा जा रहा है।
दूसरी ओर, वित्तीय घोटालों और कंपनियों के स्तर पर भी गड़बड़ियों के पुराने मामले अब नए मोड़ पर पहुंच रहे हैं। आईएल एंड एफएस समूह के पूर्व चेयरमैन रवि पार्थसार्थी की गिरफ्तारी इसका एक बड़ा उदाहरण है। वित्तीय अनियमितताओं और फंड के गलत इस्तेमाल के मामलों में यह कार्रवाई काफी अहम मानी जा रही है। कॉरपोरेट स्तर पर होने वाली इन गड़बड़ियों का सीधा असर आम निवेशकों और बाजार के भरोसे पर पड़ता है। जांच एजेंसियां अब यह खंगालने में जुटी हैं कि इन पैसों को कहां-कहां ठिकाना लगाया गया था और इस साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस अधिकारियों के फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल से वसूली
ठगी का दायरा अब इतना बढ़ गया है कि अपराधी कानून के रखवालों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। केरल के पुथुक्कड़ इलाके में पुलिस वाले की ही फर्जी प्रोफाइल बनाकर पैसे ऐंठने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। टीसीवी पुथुक्कड़ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अज्ञात व्यक्ति ने पुलिसकर्मी के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर नकली अकाउंट बनाया। इसके बाद उसने पीड़ित के जान-पहचान के लोगों और अन्य नागरिकों से आपातकालीन मदद के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने की मांग की। इस तरह के मामलों ने साइबर सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि लोग वर्दी और पुलिस के नाम पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं।
इन तमाम घटनाओं के बीच विशेषज्ञों और राजनेताओं ने जनता को कड़ी चेतावनी दी है। लोकप्रिय फाइनेंस से जुड़े पुराने घोटाले का जिक्र करते हुए नेता थॉमस إسाक ने कहा कि जनता को इन वित्तीय घोटालों से कड़ा सबक सीखना चाहिए। लालच में आकर बिना सोचे-समझे किसी भी स्कीम में पैसा लगाना खतरनाक साबित हो सकता है। प्रशासन और पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि लोग किसी भी प्रकार के ऑनलाइन लालच या फर्जीवाड़े का शिकार न बनें।
सुरक्षित रहने के लिए आम नागरिकों को क्या करना चाहिए
बढ़ते साइबर अपराधों और धोखाधड़ी से बचने के लिए नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, खासकर जब पैसे की मांग की जा रही हो। लॉटरी, बंपर जैकपॉट या किसी बड़े सेलिब्रिटी के नाम पर मिलने वाले विज्ञापनों की सत्यता की जांच जरूर करें। यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। सतर्कता ही इस तरह के फर्जीवाड़े से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।




