पाकिस्तान के पेशावर शहर से इस वक्त एक बहुत ही दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक स्थानीय स्कूल की जर्जर छत अचानक भरभरा कर नीचे आ गिरी। इस भयानक हादसे में कम से कम 18 से 21 मासूम बच्चों की मौत हो गई है। मरने वाले सभी बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे। अचानक हुए इस हादसे से पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और हर तरफ मातम पसर गया है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए। मलबे के नीचे दबे बच्चों को बाहर निकालने के लिए तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में 40 से ज्यादा छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां कई बच्चों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों का आंकड़ा अभी और भी बढ़ सकता है।
स्कूल इमारतों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह भीषण हादसा पाकिस्तान में स्कूली ढांचों की बदहाली और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल की इमारत बहुत पुरानी और जर्जर हो चुकी थी। इस बारे में स्कूल प्रबंधन और प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई थी। इसके बावजूद समय रहते छत की मरम्मत कराने या बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लापरवाही का यह नतीजा मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है।
हादसे के बाद से स्थानीय लोगों और अभिभावकों में प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। गुस्साए लोगों का कहना है कि अगर समय रहते चेतावनी पर ध्यान दिया जाता तो इतनी बड़ी जान-माल की हानि नहीं होती। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी स्कूलों और प्राइवेट संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव को उजागर कर दिया है। लोग अब लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सेना और राहत कर्मियों का बचाव अभियान
पेशावर प्रशासन के साथ-साथ बचाव कार्यों में स्थानीय लोगों ने भी बहुत मदद की। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि एक-एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। मौके पर भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों को भी तैनात कर दिया गया है ताकि राहत कार्य में कोई रुकावट न आए। अस्पताल के बाहर अपनों की तलाश में रोते-बिलखते परिजनों का बुरा हाल है।
पाकिस्तान के कई हिस्सों में इस तरह की पुरानी और जर्जर इमारतें बिना किसी जांच के संचालित हो रही हैं। शिक्षा विभाग की तरफ से समय-समय पर स्कूलों की इमारतों की फिटनेस जांचने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इस हादसे के बाद अब सरकार ने देश के अन्य पुराने स्कूलों की इमारतों की जांच के आदेश देने की बात कही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की स्थिति
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। स्थानीय अस्पतालों से मिल रही जानकारी के अनुसार गंभीर रूप से घायल बच्चों का इलाज युद्ध स्तर पर जारी है। सरकार की तरफ से अभी तक मृतकों के परिवारों को मुआवजे का ऐलान किया गया है, लेकिन शोक संतप्त परिवारों का कहना है कि मुआवजा उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकता। इस मामले में जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है जो यह तय करेगी कि इस लापरवाही के लिए असल में कौन जिम्मेदार है।




