नई दिल्ली और विभिन्न राज्यों के कृषि बाजारों से हमारे फील्ड रिपोर्टरों की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों तरह की खबरें एक साथ आ रही हैं। एक तरफ जहां सरकार और कंपनियों द्वारा यूरिया के दाम में दस प्रतिशत तक की कटौती की गई है, वहीं दूसरी तरफ मैदानी इलाकों में खाद की उपलब्धता को लेकर कई तरह की अड़चनें बनी हुई हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे बड़े कृषि राज्यों में इस समय खेतों में फसलों की कटाई और बुवाई का काम जोरों पर चल रहा है, जिसके कारण यूरिया की मांग अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है। मांग बढ़ने के साथ ही बाजार में बिचौलियों और मुनाफाखोरों की सक्रियता भी काफी तेज हो गई है, जिससे सीधे साधे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दीवाली से पहले आई इस राहत भरी खबर के तहत यूरिया के खुदरा और थोक मूल्यों में दस प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है, जिससे किसानों की लागत में कुछ हद तक कमी आने की उम्मीद है। हालांकि, बाजार की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। राजस्थान के झालावाड़ जिले से लेकर उत्तर प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों तक किसानों को यूरिया आसानी से नहीं मिल पा रहा है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक गोदामों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं और कालाबाजारी रोकने के लिए डिजिटल निगरानी का सहारा लिया जा रहा है ताकि हर एक कट्टे का हिसाब रखा जा सके।
सस्ते यूरिया के बीच कालाबाजारी और टैगिंग का खेल
बाजार में यूरिया की कीमतों में गिरावट का फायदा उठाने के लिए कुछ दुकानदार और अवैध डीलर सक्रिय हो गए हैं। किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि उन्हें यूरिया के साथ जबरन दूसरी चीजें जैसे कि एसएसपी या अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसे कृषि भाषा में टैगिंग कहा जाता है। कृषि आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है और साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों को बिना किसी अतिरिक्त सामान के केवल यूरिया और डीएपी मिलना चाहिए। अगर कोई दुकानदार इस नियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाएगा और उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। प्रशासन के इन सख्त आदेशों के बावजूद कई ग्रामीण इलाकों में दुकानदार अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं और मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
खाद की इस किल्लत और अफरा-तफरी के माहौल का फायदा उठाने वाले ठग भी पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से हाल ही में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जहां कुछ शातिर ठगों ने किसानों को आसानी से और कोटे पर यूरिया खाद दिलवाने का झांसा दिया। इन ठगों ने भोले-भाले किसानों से ऑनलाइन और नकद के रूप में हजारों रुपए ठग लिए और जब खाद मिलने का समय आया तो वे फरार हो गए। इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि प्रशासनिक सख्ती के बावजूद ग्रामीण इलाकों में साइबर ठग और स्थानीय बिचौलिए किस तरह किसानों की लाचारी का फायदा उठा रहे हैं। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और ठगी करने वाले गिरोह के सरगनाओं की तलाश में जुटी हुई है ताकि पीड़ित किसानों को उनका पैसा वापस दिलाया जा सके।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल बचाने के नए नुस्खे
एक तरफ जहां किसान खाद की किल्लत और ठगी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मौसम की मार ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जिन इलाकों में हाल ही में बाढ़ या भारी बारिश के कारण धान की फसल डूब गई थी, वहां के किसानों के लिए कृषि विशेषज्ञों ने विशेष सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद किसानों को निराश होने की जरूरत नहीं है। वे एक कट्ठा खेत में एक किलो यूरिया और दो सौ ग्राम जिंक मिलाकर सही समय पर छिड़काव कर सकते हैं। इस वैज्ञानिक तरीके से छिड़काव करने के लगभग आठ दिन बाद धान की फसल में सुधार दिखना शुरू हो जाता है और डूबी हुई फसल को काफी हद तक बचाया जा सकता है। सरकार और कृषि विभाग के स्थानीय केंद्र इन दिनों किसानों को लगातार यह तकनीकी सलाह दे रहे हैं ताकि वे अपनी फसल को पूरी तरह बर्बाद होने से बचा सकें।
इन तमाम घटनाओं और जमीनी रिपोर्टों से यह साफ जाहिर होता है कि भले ही कागजों पर यूरिया के दाम कम हो गए हों और गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन आम किसान के लिए खेत तक खाद पहुंचाना अभी भी किसी चुनौती से कम नहीं है। डिजिटल निगरानी और प्रशासनिक बैठकों के दावे अपनी जगह सही हैं, लेकिन जब तक मैदानी स्तर पर बिचौलियों, कालाबाजारियों और ठगों पर पूरी तरह नकेल नहीं कस दी जाती, तब तक किसानों को इस सरकारी राहत का पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा। 'द फ्रीलान्स' की यह टीम लगातार ग्रामीण इलाकों का दौरा कर रही है और किसानों की हर एक समस्या को प्रमुखता से उठाती रहेगी ताकि प्रशासन समय रहते उचित कदम उठा सके।
किसानों के लिए जरूरी सावधानियां और प्रशासनिक हेल्पलाइन
यूरिया खरीदने वाले सभी किसानों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा अधिकृत और लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खाद खरीदें। खाद खरीदते समय हमेशा पक्का बिल या रसीद जरूर लें ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी होने पर आपके पास पुख्ता सबूत हो। यदि कोई दुकानदार यूरिया के साथ जबरन कोई दूसरा उत्पाद या टॉनिक खरीदने का दबाव बनाता है, तो उसकी तुरंत शिकायत जिला कृषि अधिकारी या स्थानीय तहसील कार्यालय में दर्ज कराएं। सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करके भी अपनी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। किसानों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के झांसे में न आएं जो उन्हें सस्ते दाम या कोटे से बाहर खाद दिलाने का वादा करता हो, क्योंकि ऐसे लोग अक्सर ठगी का शिकार बनाते हैं।



