कोलकाता और पूरे पश्चिम बंगाल में इन दिनों मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बंगाल की खाड़ी में बने एक नए निम्नच यानी कम दबाव के क्षेत्र के कारण कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यह मौसमी बदलाव तटीय इलाकों को प्रभावित करेगा। राहत की बात यह है कि इस बारिश से चिलचिलाती धूप से कुछ दिनों के लिए निजात मिली है। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह राहत बहुत लंबी नहीं टिकेगी और आने वाले दिनों में मौसम फिर से करवट लेगा।
समुद्र तल पर बने इस सिस्टम का असर भारत के पूर्वी तट के साथ-साथ पड़ोसी देशों के तटीय इलाकों तक भी महसूस किया जा रहा है। चक्रवाती हवाओं के पैटर्न और मानसूनी गतिविधियों के चलते मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। आपदा प्रबंधन टीमें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पिछले कुछ घंटों में बारिश की तीव्रता कुछ इलाकों में जरूर कम हुई है, लेकिन आसमान में बादलों का डेरा अब भी बना हुआ है।
निम्नच हटने के बाद कैसी रहेगी गर्मी?
मौसम विशेषज्ञों का साफ कहना है कि जैसे ही यह निम्नच कमजोर होकर आगे बढ़ेगा, तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। बारिश रुकने के तुरंत बाद हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी का स्तर काफी बढ़ जाएगा। इसके चलते लोगों को भारी उमस और चिपचिपी गर्मी का सामना करना पड़ेगा। अक्टूबर और नवंबर के इस संक्रांति काल में ऐसा मौसम आम तौर पर स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अचानक बदलते इस मौसम में अपने खानपान और सेहत का विशेष ध्यान रखें।
कोलकाता शहर के कई हिस्सों में जलभराव की छोटी-मोटी समस्याएं भी सामने आई हैं। नगर निगम की टीमों ने जल निकासी के काम में तेजी ला दी है ताकि आम जनता को ज्यादा परेशानी न हो। ट्रैफिक पुलिस भी सड़कों पर पानी जमा होने वाले पॉइंट्स पर नजर बनाए हुए है ताकि गाड़ियों की आवाजाही पर कोई खास असर न पड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस साल बारिश का चक्र थोड़ा लंबा खिंच गया है, जिससे रोजमर्रा के कामों में हल्की रुकावट आ रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री तूफानों का असर
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले ऐसे निम्नच अक्सर गंभीर चक्रवाती तूफानों में बदल जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में बिपरजोय जैसे चक्रवातों ने भारत और पाकिस्तान के तटीय शहरों में भारी तबाही मचाई थी। 'बिपरजोय' जिसका बंगाली भाषा में अर्थ 'आपदा' होता है, उसने प्रशासन को हमेशा के लिए सतर्क कर दिया है। यही कारण है कि अब बंगाल की खाड़ी में किसी भी छोटे सिस्टम के बनते ही मौसम विभाग तुरंत रेड या येलो अलर्ट जारी कर देता है। तटीय सुरक्षा एजेंसियों को भी सैटेलाइट के जरिए पल-पल की जानकारी दी जा रही है।
आम जनता के लिए जरूरी है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर चल रही बिना पुष्टि वाली खबरों से बचना बेहद जरूरी है। हमारे संवाददाता ने कोलकाता के कई बाजारों और बस अड्डों का दौरा किया जहां लोगों ने बताया कि उमस भरी गर्मी से बचने के लिए वे अभी से तैयारी कर रहे हैं। कूलर और एसी की मांग में एक बार फिर हल्का उछाल देखा जा रहा है।
आगामी दिनों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान
आने वाले चौबीस घंटों में इस निम्नच के प्रभाव में और कमी आने की संभावना जताई गई है। तटीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के बाद आसमान साफ होने की उम्मीद है। आसमान साफ होते ही धूप खिलेगी और जमीन की नमी भाप बनकर उड़ेगी, जिससे उमस अपने चरम पर पहुंच जाएगी। कुल मिलाकर कहें तो बंगाल के लोगों को अभी कुछ और दिन मौसम के इस लुकाछिपी वाले खेल का सामना करना पड़ेगा। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मौसमी घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और हर नया अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाएगी।






