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हरियाणा के 12 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट: HTET पास करना अनिवार्य, नहीं तो होगी छुट्टी या रिटायरमेंट

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे करीब 12,000 शिक्षकों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। जिन शिक्षकों ने अभी तक हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें अब यह परीक्षा पास करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं।
The Freelance ब्यूरो
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19 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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हरियाणा के 12 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट: HTET पास करना अनिवार्य, नहीं तो होगी छुट्टी या रिटायरमेंट
📷 हरियाणा के 12 हजार शिक्षकों की नौकरी पर संकट: HTET पास करना अनिवार्य, नहीं तो होगी छुट्टी या रिटायरमेंट — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • हरियाणा के सरकारी स्कूलों के लगभग 12,000 शिक्षकों के लिए एचटीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • जिन शिक्षकों की सेवा में 1 सितंबर 2025 तक 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें परीक्षा पास करनी होगी, वरना नौकरी जा सकती है।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद शिक्षा निदेशालय ने यह बड़ा कदम उठाया है।
  • शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी शुरू कर दी है।

हरियाणा के सरकारी शिक्षकों पर मंडराया नौकरी का संकट

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे लगभग 12 हजार शिक्षकों की नौकरी पर एक बार फिर बड़ा संकट मंडराता हुआ नजर आ रहा है। राज्य के विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए एक सख्त नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के मुताबिक, जिन शिक्षकों ने अब तक हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी एचटीईटी (HTET) पास नहीं की है, उन्हें अब हर हाल में यह परीक्षा पास करनी होगी। ऐसा नहीं करने वाले शिक्षकों को या तो अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है या फिर उनकी सेवाएं पूरी तरह से समाप्त की जा सकती हैं।

यह मामला पिछले कई महीनों से शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। अब विभाग द्वारा प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जाने के बाद शिक्षकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। राज्यभर के विभिन्न जिलों में तैनात इन प्रभावित शिक्षकों के सामने अब अपनी नौकरी बचाने के लिए परीक्षा पास करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि जमीनी स्तर पर इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

शिक्षकों के बीच इस बात को लेकर भारी असमंजस और बेचैनी का माहौल है। अचानक आए इस आदेश के बाद शिक्षक संघों ने भी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कई वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर अचानक इस तरह की योग्यता की तलवार लटकाना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। हालांकि, सरकार और शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि वे सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए पूरी तरह से बाध्य हैं और इसमें किसी भी तरह की प्रशासनिक ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

📷 हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड और शिक्षा निदेशालय के दफ्तर का प्रतीकात्मक चित्र
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1 सितंबर 2025 की समय सीमा तय, इन शिक्षकों पर गिरेगी गाज

विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों में नियमों के स्पष्टीकरण के लिए एक विशेष तारीख और पैमाना तय किया गया है। इसके अनुसार, 1 सितंबर 2025 को आधार मानकर पूरी स्थिति साफ की गई है। जिन शिक्षकों के 1 सितंबर 2025 को रिटायरमेंट में 5 साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है और उन्होंने अभी तक एचटीईटी पास नहीं किया है, उनके लिए संबंधित विषय की परीक्षा पास करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। यदि ये शिक्षक तय समय सीमा और नियमों के भीतर परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उनकी सेवाएं समाप्त करने या उन्हें जबरन रिटायरमेंट देने की कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ, जिन शिक्षकों की सेवा का समय 1 सितंबर 2025 को रिटायरमेंट में 5 साल या उससे कम बचा था, उन्हें एचटीईटी पास करने की अनिवार्यता से बड़ी राहत दी गई है। ऐसे शिक्षक बिना पात्रता परीक्षा पास किए भी अपनी निर्धारित रिटायरमेंट की उम्र तक सामान्य रूप से सेवा में बने रह सकते हैं। हालांकि, विभाग ने इसमें भी एक शर्त जोड़ी है कि यदि ये छूट प्राप्त शिक्षक भविष्य में किसी भी प्रकार की पदोन्नति यानी प्रमोशन पाना चाहते हैं, तो उन्हें भी अनिवार्य रूप से संबंधित विषय का एचटीईटी पास करना ही होगा। बिना पात्रता परीक्षा के उन्हें कोई प्रमोशन नहीं दिया जाएगा।

इस दोहरी व्यवस्था ने शिक्षकों के बीच एक स्पष्ट विभाजन पैदा कर दिया है। जहां कम सेवा वाले शिक्षकों को राहत मिली है, वहीं लंबे समय तक सेवा देने वाले युवा और मध्यम आयु वर्ग के शिक्षकों के सिर पर तलवार लटकी हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन कराना विभाग की जिम्मेदारी है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने का कोई प्रावधान नहीं है। यही वजह है कि जिला स्तर पर उन शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है जो इस दायरे में आते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और खारिज हुई पुनर्विचार याचिका

पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद शुरू हुई है। शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह सख्त कदम सिविल अपील संख्या 1385-2025 (अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामलों) में 1 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर उठाया गया है। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान हरियाणा के प्रभावित शिक्षकों की तरफ से भी अदालत में राहत की उम्मीद के साथ एक पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई थी, ताकि उन्हें इस परीक्षा से छूट मिल सके।

लेकिन शिक्षकों के लिए निराशाजनक बात यह रही कि इसी साल 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस पुनर्विचार याचिका को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत से राहत ना मिलने के बाद हरियाणा सरकार और विद्यालय शिक्षा निदेशालय के सामने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करने के अलावा और कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था। इसी के चलते राज्य में एचटीईटी की अनिवार्यता के नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए गए, जिससे हजारों शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की रियायत देना विभाग के लिए संभव नहीं था। यही कारण है कि शिक्षा विभाग ने फौरी तौर पर नोटिस जारी कर सभी संबंधित पक्षों को इसकी विधिवत जानकारी दे दी है। राज्य के शिक्षा गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अदालत के कड़े रुख के बाद अब इस मामले में कोई भी स्थानीय स्तर का प्रशासनिक फैसला नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर शीर्ष अदालत के निर्देशों से जुड़ा हुआ है।

परीक्षा के लिए साल में दो बार आयोजन के निर्देश

शिक्षकों के सामने आ रही इस बड़ी समस्या को देखते हुए विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड (BSEH) भिवानी को भी विशेष निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड से कहा गया है कि वह शिक्षकों को परीक्षा पास करने का पर्याप्त और उचित अवसर प्रदान करे। इसके लिए बोर्ड को साल में कम से कम दो बार एचटीईटी परीक्षा आयोजित करने को कहा गया है, ताकि शिक्षक अपनी पात्रता को समय रहते पूरा कर सकें और उन्हें अपने विषय की परीक्षा पास करने के लिए ज्यादा इंतजार न करना पड़े।

विभाग का मानना है कि साल में दो बार परीक्षा होने से उन शिक्षकों को बार-बार प्रयास करने का मौका मिलेगा जो पहली बार में सफल नहीं हो पाते हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों के हर एक स्कूल तक इस फैसले की जानकारी समय पर पहुंचाएं। साथ ही, स्थापना शाखाओं को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़ी हर एक कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के तयशुदा दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ाई जाए।

बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं ताकि जैसे ही आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, शिक्षक बिना किसी तकनीकी बाधा के फॉर्म भर सकें। हालांकि, जिन शिक्षकों पर नौकरी छूटने का खतरा मंडरा रहा है, उनके लिए सिर्फ परीक्षा का आयोजन ही काफी नहीं है, बल्कि इतने कम समय में परीक्षा की तैयारी करना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

शिक्षक संगठन फिर से कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी में

सरकार और शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख के बाद राज्य के प्रभावित शिक्षकों में गहरी नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन और अन्य शिक्षक संगठन इस फैसले के खिलाफ हार मानने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख करने पर தீவிர विचार कर रहे हैं। उनका तर्क है कि वर्षों से निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों पर अचानक इस तरह का नियम थोपना उनके साथ अन्याय है।

"शिक्षकों के भविष्य के साथ इस तरह खिलواड़ नहीं किया जा सकता। हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन अपने साथियों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे और उच्च न्यायपालिका से न्याय की गुहार लगाएंगे।" — शिक्षक संघ प्रतिनिधि, हरियाणा

शिक्षक संगठनों का यह भी कहना है कि जब इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, तब नियमों और योग्यताओं का पैमाना अलग था। ऐसे में पुरानी नियुक्तियों पर नए नियमों को भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करना न्यायसंगत नहीं है। इस कानूनी खींचतान के चलते आने वाले दिनों में हरियाणा में एक बार फिर से शिक्षा और शिक्षकों का मुद्दा गरमाने की पूरी उम्मीद है।

निष्कर्ष और आगे की स्थिति

कुल मिलाकर देखा जाए तो हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले 12 हजार से अधिक शिक्षकों के सिर पर लटकी तलवार फिलहाल हटी नहीं है। एक तरफ जहां शिक्षा निदेशालय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत सख्ती बरतने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक संगठन अदालती लड़ाई के जरिए राहत पाने की जुगत में लगे हुए हैं। यह पूरा घटनाक्रम आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अदालत शिक्षक संघों की नई याचिका पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, प्रभावित शिक्षकों के लिए यह दौर भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता से भरा हुआ है।

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