विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/एजुकेशन/वीडियो: हिटलर के परमाणु बम का सपना क्यों अधूरा रह गया, 664 यूरेनियम क्यूब्स ने 80 साल बाद खोले चौंकाने वाले राज
एजुकेशनपढ़ने में समय: 3 मिनट

वीडियो: हिटलर के परमाणु बम का सपना क्यों अधूरा रह गया, 664 यूरेनियम क्यूब्स ने 80 साल बाद खोले चौंकाने वाले राज

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी परमाणु बम क्यों नहीं बना पाया, इसका खुलासा नई रिसर्च में हुआ है। वैज्ञानिकों ने 664 यूरेनियम क्यूब्स, पुराने दस्तावेजों और कंप्यूटर मॉडल की मदद से पता लगाया है कि उनके पास जरूरी सामग्री की भारी कमी थी।
✍️
शिक्षा एवं करियर डेस्क, द फ्रीलांस
शिक्षा व करियर मार्गदर्शन•9 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•32
🌐Read in English →
शेयर करें:
वीडियो: हिटलर के परमाणु बम का सपना क्यों अधूरा रह गया, 664 यूरेनियम क्यूब्स ने 80 साल बाद खोले चौंकाने वाले राज
📷 वीडियो: हिटलर के परमाणु बम का सपना क्यों अधूरा रह गया, 664 यूरेनियम क्यूब्स ने 80 साल बाद खोले चौंकाने वाले राज — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • नाजी जर्मनी के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े 664 यूरेनियम क्यूब्स और दस्तावेजों की नए सिरे से जांच की गई है।
  • वैज्ञानिक वर्नर हाइजेनबर्ग के 1945 के B8 रिएक्टर प्रयोग में जरूरत से आधा यूरेनियम और हैवी वॉटर मौजूद था।
  • नॉर्वे में हैवी वॉटर प्लांट पर हमलों के कारण जर्मनी की सप्लाई बाधित हो गई थी, जिससे परमाणु चेन रिएक्शन असफल रहा।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा परमाणु बम बनाने की कोशिशें हमेशा से इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में रही हैं। जर्मन वैज्ञानिक एक परमाणु रिएक्टर बनाने में जुटे थे, लेकिन नई रिसर्च से पता चला है कि जर्मनी के पास ऐसा रिएक्टर चलाने के लिए जरूरी यूरेनियम और हैवी वॉटर पर्याप्त मात्रा में था ही नहीं। वैज्ञानिकों ने पुराने दस्तावेज, बचे हुए यूरेनियम क्यूब्स और कंप्यूटर मॉडल की मदद से जर्मनी के इस परमाणु प्रयोग की दोबारा जांच करके चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

वर्नेर हाइजेनबर्ग का B8 प्रयोग और अधूरा सच

यह प्रयोग जर्मन वैज्ञानिक वर्नर हाइजेनबर्ग की टीम ने 1945 में किया था, जिसे B8 नाम दिया गया था। इसमें 664 यूरेनियम क्यूब्स को हैवी वॉटर में रखा गया था। वैज्ञानिकों का मकसद ऐसा रिएक्टर बनाना था, जिसमें न्यूक्लियर चेन रिएक्शन लगातार चलता रहे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। नई रिसर्च के मुताबिक, अगर जर्मनी के पास मौजूद पूरा यूरेनियम और हैवी वॉटर भी एक जगह इकट्ठा कर लिया जाता, तब भी रिएक्टर को चलाना असंभव था।

इस रिसर्च में यूरेनियम के बचे हुए क्यूब्स ने अहम भूमिका निभाई। जर्मनी के परमाणु प्रयोगों में करीब 1,100 यूरेनियम क्यूब्स इस्तेमाल किए गए थे। ये क्यूब करीब 5 सेंटीमीटर चौड़े थे। आज इनमें से सिर्फ 14 क्यूब्स के बारे में पता है कि वे कहां हैं। रिसर्च टीम ने इनमें से दो क्यूब्स की सूक्ष्म जांच की, जिससे उस समय के यूरेनियम की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिली।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

रिएक्टर में क्यों कम पड़ गया यूरेनियम और हैवी वॉटर?

B8 रिएक्टर में करीब 1,538 किलो यूरेनियम और 1,549 किलो हैवी वॉटर था। वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से इस रिएक्टर को दोबारा डिजिटल रूप में बनाया और देखा कि इसमें न्यूट्रॉन कैसे काम कर रहे थे। मॉडल से पता चला कि B8 में न्यूट्रॉन मल्टीप्लिकेशन फैक्टर करीब 0.94 था। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अगर एक दौर में 100 न्यूट्रॉन पैदा हो रहे थे, तो अगले दौर में करीब 94 ही काम के न्यूट्रॉन बच रहे थे, जबकि लगातार चेन रिएक्शन के लिए यह संख्या 100 के आसपास होनी चाहिए थी।

नई गणना के मुताबिक, रिएक्टर को सुचारू रूप से चलाने के लिए करीब 3,000 किलो यूरेनियम और 3,500 से 3,800 किलो हैवी वॉटर की जरूरत थी। यानी B8 में मौजूद मात्रा से लगभग दोगुना सामान चाहिए था। इसके अलावा, युद्ध के दौरान नॉर्वे में हैवी वॉटर बनाने वाले प्लांट पर बार-बार हुए हमलों के कारण जर्मनी की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो चुकी थी।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह विषय ऐतिहासिक शोधों और वैज्ञानिक दस्तावेजों पर आधारित है। साभार: संबंधित शोध रिपोर्ट्स / हिस्टोरिकल आर्काइव्स।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

वीडियो: कभी जेब में थे सिर्फ तीन हजार, अब बाइक राइडर बनकर ऐसे छाप रहे हैं महीने के हजारों रुपये

वीडियो: कभी जेब में थे सिर्फ तीन हजार, अब बाइक राइडर बनकर ऐसे छाप रहे हैं महीने के हजारों रुपये

टेक जॉब मार्केट में 18 महीने में रिकॉर्डतोड़ 1.23 लाख वेकेंसी, जानिए क्यों फ्रेशर्स की बढ़ी मुश्किलें

टेक जॉब मार्केट में 18 महीने में रिकॉर्डतोड़ 1.23 लाख वेकेंसी, जानिए क्यों फ्रेशर्स की बढ़ी मुश्किलें

राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा में बड़ा बदलाव, अब साल में दो बार होगी परीक्षा और सप्लीमेंट्री नियम खत्म

राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा में बड़ा बदलाव, अब साल में दो बार होगी परीक्षा और सप्लीमेंट्री नियम खत्म

JSSC CGL परीक्षा के भविष्य पर बड़ा फैसला सुरक्षित, क्या रद्द होगा एग्जाम या मिलेगी राहत?

JSSC CGL परीक्षा के भविष्य पर बड़ा फैसला सुरक्षित, क्या रद्द होगा एग्जाम या मिलेगी राहत?

भारत में मानसून की धमाकेदार एंट्री, इन राज्यों में झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

भारत में मानसून की धमाकेदार एंट्री, इन राज्यों में झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

देशभर में मौसम का मिजाज बदला: 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई जगहों पर दुर्गापूजा के रंग में पड़ी खलल

देशभर में मौसम का मिजाज बदला: 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई जगहों पर दुर्गापूजा के रंग में पड़ी खलल

विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही नहीं, दिल की सेहत भी हो रही है खराब: आईसीएमआर की नई स्टडी में बड़ा खुलासा

विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही नहीं, दिल की सेहत भी हो रही है खराब: आईसीएमआर की नई स्टडी में बड़ा खुलासा

ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका का बड़ा झटका, इंफोसिस और टीसीएस समेत आठ बड़ी कंपनियों पर एक्शन

ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका का बड़ा झटका, इंफोसिस और टीसीएस समेत आठ बड़ी कंपनियों पर एक्शन

✍️

शिक्षा एवं करियर डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

प्रतियोगी परीक्षाएं, सरकारी भर्तियां व युवा मार्गदर्शन टीम

द फ्रीलांस की शिक्षा डेस्क प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी भर्तियों, रोजगार के अवसरों, यूनिवर्सिटी एडमिशन और देश के युवाओं से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर सबसे सटीक और समयबद्ध मार्गदर्शन प्रदान करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘hitler’ व एजुकेशन से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

वीडियो: कभी जेब में थे सिर्फ तीन हजार, अब बाइक राइडर बनकर ऐसे छाप रहे हैं महीने के हजारों रुपयेEDUCATION

वीडियो: कभी जेब में थे सिर्फ तीन हजार, अब बाइक राइडर बनकर ऐसे छाप रहे हैं महीने के हजारों रुपये

9 अक्टू॰48
टेक जॉब मार्केट में 18 महीने में रिकॉर्डतोड़ 1.23 लाख वेकेंसी, जानिए क्यों फ्रेशर्स की बढ़ी मुश्किलेंEDUCATION

टेक जॉब मार्केट में 18 महीने में रिकॉर्डतोड़ 1.23 लाख वेकेंसी, जानिए क्यों फ्रेशर्स की बढ़ी मुश्किलें

9 अक्टू॰51
राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा में बड़ा बदलाव, अब साल में दो बार होगी परीक्षा और सप्लीमेंट्री नियम खत्मEDUCATION

राजस्थान बोर्ड 10वीं परीक्षा में बड़ा बदलाव, अब साल में दो बार होगी परीक्षा और सप्लीमेंट्री नियम खत्म

8 अक्टू॰29
JSSC CGL परीक्षा के भविष्य पर बड़ा फैसला सुरक्षित, क्या रद्द होगा एग्जाम या मिलेगी राहत?EDUCATION

JSSC CGL परीक्षा के भविष्य पर बड़ा फैसला सुरक्षित, क्या रद्द होगा एग्जाम या मिलेगी राहत?

9 अक्टू॰45
भारत में मानसून की धमाकेदार एंट्री, इन राज्यों में झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहतEDUCATION

भारत में मानसून की धमाकेदार एंट्री, इन राज्यों में झमाझम बारिश से मिली गर्मी से राहत

9 अक्टू॰42
देशभर में मौसम का मिजाज बदला: 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई जगहों पर दुर्गापूजा के रंग में पड़ी खललEDUCATION

देशभर में मौसम का मिजाज बदला: 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई जगहों पर दुर्गापूजा के रंग में पड़ी खलल

8 अक्टू॰31
विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही नहीं, दिल की सेहत भी हो रही है खराब: आईसीएमआर की नई स्टडी में बड़ा खुलासाEDUCATION

विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियां ही नहीं, दिल की सेहत भी हो रही है खराब: आईसीएमआर की नई स्टडी में बड़ा खुलासा

9 अक्टू॰24
ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका का बड़ा झटका, इंफोसिस और टीसीएस समेत आठ बड़ी कंपनियों पर एक्शनEDUCATION

ग्रीन कार्ड को लेकर अमेरिका का बड़ा झटका, इंफोसिस और टीसीएस समेत आठ बड़ी कंपनियों पर एक्शन

9 अक्टू॰42
विज्ञापन • ADVERTISEMENT