नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश में धूप की कमी और बदलती जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ताजा रिसर्च बताती है कि शरीर में विटामिन डी की कमी का सीधा असर अब हमारे दिल पर भी पड़ने लगा है। आम तौर पर लोग यही सोचते हैं कि धूप से मिलने वाला यह विटामिन सिर्फ हड्डियों और जोड़ों को मजबूत रखता है। लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इसकी कमी से दिल की बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। देश के बड़े अस्पतालों और शोध संस्थानों के डॉक्टर लगातार इस बात की चेतावनी दे रहे हैं कि समय रहते इस कमी को दूर नहीं किया गया तो स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।
हमारी फील्ड टीम ने जब इस मामले पर पड़ताल की तो पता चला कि भारत जैसे धूप वाले देश में भी करोड़ों लोग विटामिन डी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सुबह की धूप में टहलने के बाद भी शरीर को पूरा विटामिन डी नहीं मिल पाता है। कई हेल्थ रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि कांच की खिड़कियों के पास बैठकर काम करने से शरीर को प्राकृतिक धूप का पूरा फायदा नहीं मिलता। शहरों में ऊंची इमारतों और बंद दफ्तरों में काम करने वाले युवा इस समस्या के शिकार सबसे ज्यादा हो रहे हैं। खानपान की गलत आदतें और जंक फूड खाने का चलन इस कमी को और ज्यादा बढ़ा रहा है जिससे शरीर अंदर से खोखला होता जा रहा है।
हड्डियों के साथ दिल की सेहत पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा
आईसीएमआर के वैज्ञानिकों का कहना है कि विटामिन डी शरीर के कई अंगों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। जब खून में इसकी मात्रा कम हो जाती है तो दिल की नसों पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने का खतरा रहता है और दिल से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां जन्म ले सकती हैं। डॉक्टरों का मानना है कि दिल के मरीजों की संख्या बढ़ने के पीछे विटामिन डी की अनदेखी भी एक बड़ा कारण है। ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी आबादी इस समस्या से ज्यादा प्रभावित है क्योंकि वहां खुली धूप में समय बिताना बहुत कम हो गया है। लोग दिनभर एसी कमरों में रहते हैं और शरीर को प्राकृतिक धूप से पूरी तरह वंचित रख लेते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में विटामिन डी का सामान्य स्तर तीस नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होना चाहिए। लेकिन अधिकांश लोगों की जांच रिपोर्ट में यह स्तर दस से पंद्रह के बीच ही सिमट कर रह जाता है। इतनी कम मात्रा होने पर शरीर में लगातार थकान, जोड़ों में दर्द और कमजोरी महसूस होने लगती है। कई बार लोग इन लक्षणों को सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं जो बाद में बड़ी बीमारी का रूप ले लेता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर आयु वर्ग के लोग इस कमी की चपेट में आ रहे हैं जो आने वाले समय के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।
खानपान और जीवनशैली में बदलाव से ही संभव है बचाव
इस गंभीर समस्या से बचने के लिए अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खानपान में बड़े बदलाव करने की सलाह दी है। दूध, दही, पनीर, अंडे की जर्दी और मछली जैसी चीजों को अपनी रोजाना की थाली में जरूर शामिल करना चाहिए। हालांकि केवल खाने की चीजों से शरीर की पूरी जरूरत नहीं पूरी होती, इसलिए धूप में कुछ समय बिताना बेहद जरूरी है। सुबह की नरम धूप में कम से कम बीस से तीस मिनट बिताना सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यदि किसी के शरीर में इसकी बहुत ज्यादा कमी है तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स यानी दवाइयां भी ली जा सकती हैं, लेकिन अपनी मर्जी से कोई भी गोली खाना नुकसानदेह हो सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में यह भी सामने आया कि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से विटामिन डी की भारी खुराक वाली गोलियां खरीदकर खा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में विटामिन डी की अधिकता भी खतरनाक हो सकती है और इससे गुर्दे को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए कोई भी सप्लीमेंट लेने से पहले खून की जांच जरूर करवानी चाहिए। समय रहते अपनी सेहत की फिक्र करना और डॉक्टर की देखरेख में सही कदम उठाना ही इस छिपे हुए खतरे से बचने का एकमात्र पक्का रास्ता है।
जागरूकता की कमी और भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां
देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य विभाग अब इस मुद्दे पर विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है। स्कूलों और दफ्तरों में लोगों को धूप के महत्व और पोषण के बारे में जानकारी दी जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग इस बात को नहीं समझेगा कि विटामिन डी केवल एक विटामिन नहीं बल्कि जीवन बचाने वाला तत्व है, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। हमारी यह रिपोर्ट पाठकों से अपील करती है कि वे अपनी सेहत को हल्के में न लें और नियमित रूप से अपनी जांच करवाते रहें ताकि किसी भी बड़ी बीमारी से समय रहते बचा जा सके।










