नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड रिपोर्ट। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तो उम्मीद के साथ हरी निशान पर हुई थी, लेकिन दोपहर आते-आते माहौल पूरी तरह बदल गया। बाजार में ऐसा कोहराम मचा कि निवेशकों के चेहरे मायूस हो गए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 547 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी फिसलकर 22,400 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। बाजार की इस अचानक चाल ने छोटे निवेशकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।
शुरुआती कारोबार में बाजार सकारात्मक रुख दिखा रहा था और सेंसेक्स-निफ्टी आधे प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी 22,600 के ऊपर खुला था, जिससे लग रहा था कि हफ्ता मुनाफे वाला रहेगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से आई बुरी खबरों ने बाजार का मूड बिगाड़ दिया। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकालना शुरू कर दिया, जिसका सीधा असर प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।
युद्ध के बादलों से सहमा बाजार
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े तनाव का असर सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। युद्ध की आशंका से क्रूड ऑयल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अशांति फैलती है, तो शेयर बाजार सबसे पहले प्रतिक्रिया देता है। निवेशक जोखिम भरे शेयरों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों जैसे सोने या डॉलर में निवेश करने लगते हैं। यही कारण है कि आज दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला।
कारोबार के अंत में निफ्टी 22,363 के स्तर पर बंद हुआ। आज के दिन सबसे ज्यादा मार एफएमसीजी (रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं) और पीएसयू बैंक यानी सरकारी बैंकों के शेयरों पर पड़ी। इन दोनों सेक्टरों में दिनभर भारी बिकवाली का दौर चला। लोग अपने शेयर औने-पौने दामों पर बेचने लगे ताकि और बड़े नुकसान से बचा जा सके। टाटा, रिलायंस, और अडानी जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी सुस्ती रही, जिससे सूचकांक को संभालने का कोई मौका नहीं मिला।
छोटे निवेशकों की बढ़ी धड़कनें
बाजार की इस उठापटक ने उन नए निवेशकों को डरा दिया है जिन्होंने हाल ही में शेयर बाजार में कदम रखा था। एक ही दिन में सेंसेक्स के 500 से ज्यादा अंक टूट जाने से कई लोगों का पोर्टफोलियो लाल निशान में चला गया है। जानकारों का कहना है कि युद्ध की स्थिति जब तक शांत नहीं होती, बाजार में यह अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराकर अपने शेयर घाटे में न बेचें और लंबी अवधि के नजरिए से ही पैसा लगाएं।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें पूरी तरह से मध्य पूर्व की स्थिति और विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर रहेंगी। अगर युद्ध के बादल छटते हैं तो बाजार में तेजी भी लौट सकती है, लेकिन फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 'द फ्रीलान्स' की टीम बाजार की हर हलचल पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी आपको जमीनी सच से अवगत कराती रहेगी।






