कीव/मॉस्को — यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग अब और भी ज्यादा भयानक रूप ले चुकी है। युद्ध के मैदान से लगातार सामने आ रही ताजा रिपोर्ट बताती हैं कि दोनों तरफ से हमलों में भारी तेजी आई है। रूस ने यूक्रेन के कई महत्वपूर्ण सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाते हुए एक ही दिन में 70 से अधिक मिसाइलें दागी हैं। इन हमलों की वजह से यूक्रेन के कई इलाकों में बिजली और पानी का संकट गहरा गया है। आम लोगों की जिंदगी पूरी तरह से पटरी से उतर चुकी है और ठंड के इस मौसम में हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।
दूसरी तरफ यूक्रेनी सेना भी रूसी ठिकानों पर लगातार पलटवार कर रही है। ताजा संघर्ष में यूक्रेन की ओर से किए गए ड्रोन हमलों ने ब्लैक सी यानी काले सागर के पास खलबली मचा दी है। ब्लैक सी में गुजर रहे एक तेल टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन ने सीधा हमला किया। इस जोरदार टक्कर के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई और आसमान में काले धुएं के गुबार दूर-दूर तक दिखाई दिए। पिछले कुछ दिनों में भारतीय नाविकों वाले जहाजों और समुद्री जहाजों पर इस तरह के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन के दो अहम पुल तबाह
जमीनी मोर्चे पर भी हालात बेहद डरावने बने हुए हैं। रूसी सेना ने यूक्रेन के उन दो सबसे अहम पुलों को अपने ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिन पर रोजाना लाखों गाड़ियों की आवाजाही होती थी। इन पुलों के टूटने से यूक्रेन के भीतर सैनिकों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का काम बहुत मुश्किल हो गया है। परिवहन मार्ग कट जाने से देश के कई हिस्सों में जरूरी सामान की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल मलबे को हटाने और रास्तों को ठीक करने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन लगातार हो रही बमबारी के कारण राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है।
यूक्रेन का एक प्रमुख शहर इस समय मौत के कुएं जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। शहर के चारों तरफ गोलाबारी और मिसाइल हमलों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारों का मानना है कि यह इलाका अब पूरी तरह एक खतरनाक क्षेत्र में बदल चुका है, जहां हर पल मौत का साया मंडराता रहता है। बचे-खुचे लोग भी अब सुरक्षित जगहों की तलाश में अपना घर-बार छोड़कर भागने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और तुरंत संघर्ष रोकने की अपील की है।
यूरोपीय संघ में प्रतिबंध का खतरा और क्षेत्रीय संकट
इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी यूक्रेन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यूरोपीय संघ में यूक्रेन की एक सबसे मुख्य और अहम वस्तु पर स्थायी प्रतिबंध लगाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि यह प्रतिबंध लागू होता है, तो यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा झटका लगेगा जो पहले से ही युद्ध की मार झेल रही है। यूरोपीय देशों के इस रुख से कीव सरकार की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और वह राजनयिक स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है ताकि इस संभावित प्रतिबंध को टाला जा सके।
जमीनी रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के ताजा मिसाइल हमलों में कम से कम 11 आम नागरिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिनका इलाज अस्पतालों में चल रहा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के कारण इलाज में भारी दिक्कतें आ रही हैं। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में इस युद्ध के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर पड़ने वाले असर की और गहरी पड़ताल करती रहेगी।
युद्ध के बीच नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराया बड़ा संकट
आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। लगातार हवाई हमलों के साये में जी रहे लोग अब भूमिगत बंकरों और मेट्रो स्टेशनों में शरण लेने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मिल रही मदद भी समय पर युद्धग्रस्त इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही है क्योंकि रास्ते में पुल और सड़कें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। इस बीच, पड़ोसी देशों में शरणार्थी संकट भी गहराने लगा है क्योंकि लगातार होते हमलों के कारण लोग देश छोड़कर पलायन कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में ठंड बढ़ने के साथ ही मानवीय संकट के और अधिक विकराल रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।



