वाशिंगटन/नई दिल्ली — पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। अमेरिकी रक्षा हलकों से आ रही खबरों के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर अपने सबसे शक्तिशाली पारंपरिक बम यानी 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' का इस्तेमाल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस संभावित कदम से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तेज हो गई है। ईरान के परमाणु ठिकानों और भूमिगत सैन्य अड्डों को तबाह करने के लिए इस महाशक्तिशाली हथियार को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, अमेरिका के भीतर और बाहर सुरक्षा से जुड़े अन्य मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी धरती पर हिंदुओं और भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने की साजिश रचने वाले एक आरोपी ने बड़ा खुलासा किया है। आरोपी ने कबूल किया है कि उसे भारतीयों को नुकसान पहुंचाने का बेसब्री से इंतजार था। इस तरह की घटनाओं ने अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है, जिस पर स्थानीय जांच एजेंसियां कड़ी नजर रख रही हैं।
कितना खतरनाक और ताकतवर है यह महाशक्तिशाली बम
अमेरिकी सेना के पास मौजूद 'जीबीयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट' यानी एमओएबी को दुनिया का सबसे ताकतवर गैर-परमाणु बम माना जाता है। इस बम का वजन करीब 21 हजार पाउंड होता है और यह एक बार में ही भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है। इस हथियार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन के बहुत अंदर तक जाकर बंकरों और गुप्त ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। रक्षा जानकारों का मानना है कि यदि इस बम का इस्तेमाल ईरान पर होता है, तो इसके परिणाम बेहद भयानक हो सकते हैं और पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस टकराव ने पड़ोसी देशों की नींद उड़ा दी है। खाड़ी देशों में तेल आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि अमेरिका वास्तव में इस बड़े सैन्य विकल्प को चुनता है, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लग सकता है।
वैश्विक कूटनीति पर पड़ रहा है बड़ा असर
इस ताजा घटनाक्रम के बाद संयुक्त राष्ट्र और अन्य प्रमुख देश शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। रूस और चीन जैसे देश इस संभावित अमेरिकी कार्रवाई के सख्त खिलाफ नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह के कड़े कदम उठाने से मध्य पूर्व में शांति की सारी उम्मीदें खत्म हो जाएंगी। कूटनीतिक स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है ताकि किसी भी तरह से सीधी सैन्य भिड़ंत को टाला जा सके और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम जनता में इस संभावित जंग को लेकर भारी डर और अनिश्चितता का माहौल है। लोग सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि यह तनाव जल्द से जल्द थमे और दुनिया एक और बड़े विनाशकारी युद्ध से बच जाए। आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम साबित होने वाले हैं।





