उत्तराखंड का चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। आम जनता और विभिन्न संगठनों के बीच इस मामले को लेकर गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक इस केस से जुड़े कई सवाल बार-बार उठाए जा रहे हैं। आज हम आपको इस पूरे मामले से जुड़े 8 सबसे बड़े सवालों और उनके सटीक जवाबों के बारे में बता रहे हैं।
यह पूरा मामला एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता भंडारी की हत्या से जुड़ा हुआ है। घटना के सामने आने के बाद से ही पूरे राज्य में वीआईपी कल्चर और न्याय की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। अब नए घटनाक्रम और बयानों के बाद यह मुद्दा फिर से राष्ट्रीय पटल पर बहस का बड़ा हिस्सा बन गया है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड असल में क्या है और यह कब हुआ था?
अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली थी। वह ऋषिकेश के पास चीला नहर के पास स्थित वंतिका रिजॉर्ट में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करती थी। सितंबर 2022 में अचानक अंकिता रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थी। बाद में उसका शव चीला नहर से बरामद किया गया था जिसके बाद यह साबित हुआ कि उसकी हत्या कर दी गई थी।
इस घटना के सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में भारी आक्रोश फैल गया था। लोगों ने रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और रिजॉर्ट के मालिक को गिरफ्तार किया था। तब से यह मामला अदालत में चल रहा है और लगातार चर्चा में बना हुआ है।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य है जो उस रिजॉर्ट का मालिक था जहां अंकिता काम करती थी। पुलकित आर्य के अलावा इस मामले में सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि अंकिता पर रिजॉर्ट में आने वाले एक विशेष वीआईपी गेस्ट को विशेष सेवा देने का दबाव बनाया जा रहा था। जब अंकिता ने इससे इनकार किया और इसका विरोध किया तो उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस जांच के अनुसार आरोपियों ने अंकिता को चीला नहर में धक्का दे दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी। आरोपियों ने शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की थी लेकिन बाद में सख्ती से पूछताछ करने पर उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। इस क्रूरता ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
वीआईपी का नाम सामने आने के बाद मामला इतना क्यों गरमाया?
इस पूरे केस का सबसे संवेदनशील हिस्सा वह तथाकथित वीआईपी है जिसका जिक्र अंकिता और उसके दोस्तों के बीच चैट में आया था। लोगों और मृतका के परिजनों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उस वीआईपी का नाम छिपाने की कोशिश की है। जनता जानना चाहती है कि वह वीआईपी व्यक्ति कौन था जिसके लिए अंकिता पर गलत काम करने का दबाव बनाया जा रहा था।
न्याय की मांग कर रहे संगठनों और परिजनों का कहना है कि जब तक उस वीआईपी का नाम सामने नहीं आता और उससे पूछताछ नहीं होती तब तक असली इंसाफ नहीं माना जाएगा। इसी मांग को लेकर समय-समय पर विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं और सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई जाती है। यही कारण है कि यह मामला आज भी ठंडे बस्ते में नहीं गया है।
इस केस को लेकर हाल ही में नए सिरे से चर्चा क्यों शुरू हुई है?
हाल ही में कई सामाजिक संगठनों, महिला मंचों और विपक्षी दलों ने इस मामले में न्याय में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शन के जरिए इस केस की फाइल को फिर से तेजी से आगे बढ़ाने की मांग की जा रही है। लोगों का मानना है कि इस तरह के गंभीर मामलों में त्वरित न्याय मिलना चाहिए ताकि अपराधियों के मन में डर पैदा हो सके।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी अंकिता को इंसाफ दिलाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों का यह लगातार दबाव ही है जिसके कारण यह पुराना मामला आज भी ताजा खबरों की सुर्खियों में बना हुआ है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड रिपोर्ट में हमने यह जानने की कोशिश की है कि आम जनता का यह गुस्सा किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।




