देश भर में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए अब प्रशासन और पुलिस विभाग ने पूरी तरह से कमर कस ली है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और बड़ा फैसला लिया है। इस नए नियम के तहत अब बाइक चलाने वाले चालक के साथ-साथ पीछे बैठने वाले यानी पिलियन राइडर के लिए भी हेलमेट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों तक इस नियम का पालन कराने के लिए यातायात पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। नियम तोड़ने वालों को अब किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी और तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
मैदान पर उतरी पुलिस टीमों ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के मामलों में अब कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शाहजहांपुर और अन्य कई जिलों में पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बिना हेलमेट सफर करने वालों के मौके पर ही चालान काटने शुरू कर दिए हैं। कई स्थानों पर तो स्थिति यह है कि जुर्माना भरने के बाद ही गाड़ी को छोड़ा जा रहा है ताकि लोगों के मन में यातायात नियमों का डर और सम्मान दोनों बने रहें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह नियम किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक की अपनी जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।
सड़क पर उतरी पुलिस, लोगों को बांटे जा रहे हैं मुफ्त हेलमेट
केवल चालान काटने या डराने तक ही पुलिस की कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को जागरूक करने के लिए अनोखे अभियान भी चलाए जा रहे हैं। झारखंड के जमशेदपुर में साकची और बिष्टूपुर जैसे व्यस्त इलाकों में पुलिस ने खुद आगे आकर लोगों को हेलमेट बांटे। पुलिस अधिकारियों ने ड्राइवरों और पीछे बैठने वालों को रोककर समझाया कि दुर्घटना के समय सिर पर लगा हेलमेट ही उनकी जान बचा सकता है। इस तरह के जन-जागरूकता अभियानों का असर भी अब धीरे-धीरे सड़कों पर दिखने लगा है और लोग खुद अपनी मर्जी से सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
कई जगहों पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुद बाइक चलाकर जनता के सामने एक मिसाल पेश की है। पुलिस अधीक्षकों ने हेलमेट पहनकर और सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए लंबी बाइक यात्राएं निकाली हैं। इन अभियानों के दौरान सैकड़ों आम नागरिकों ने सड़क सुरक्षा की शपथ ली है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक समाज का हर वर्ग खुद को नियम से नहीं जोड़ेगा, तब तक हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करना मुमकिन नहीं हो पाएगा। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर स्कूलों, कॉलेजों और बाजारों में लगातार शिविर लगाकर लोगों को समझाया जा रहा है।
बिना हेलमेट पकड़े जाने पर मौके पर ही देना होगा भारी चालान
शाहजहांपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से मिल रही ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि ट्रैफिक पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। मुख्य चौराहों और तिराहों पर चेकिंग अभियान को इतना कड़ा कर दिया गया है कि बिना हेलमेट के निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है। यदि कोई बाइक सवार या पीछे बैठा व्यक्ति बिना हेलमेट के पकड़ा जाता है, तो उसकी गाड़ी को मौके पर ही रोक लिया जाता है। जब तक तय जुर्माना राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वाहन को थाने या पुलिस चौकी से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है।
इस सख्ती का मिला-जुला असर आम जनता के बीच देखने को मिल रहा है। कुछ लोग इस अचानक बढ़ाई गई सख्ती से परेशान जरूर हैं, लेकिन बहुसंख्यक समझदार नागरिक इसे जान बचाने वाला सही कदम मान रहे हैं। अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड्स में सिर की चोटों के आंकड़े गवाही देते हैं कि हेलमेट न पहनने की कीमत कई लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। अब जरूरत इस बात की है कि हर परिवार इस नियम को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना ले ताकि सड़क पर सफर करना पूरी तरह सुरक्षित हो सके।
नियमों का पालन कराने के लिए प्रशासन की आगे की क्या है तैयारी
आने वाले दिनों में इस अभियान को और अधिक व्यापक स्तर पर चलाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। राज्य परिवहन विभाग और यातायात पुलिस मिलकर हाईवे और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी चेकिंग बढ़ा रहे हैं। कैमरों और आधुनिक तकनीक की मदद से बिना हेलमेट चलने वालों के चालान सीधे उनके घरों तक भेजे जाने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि यदि जनता ने स्वतःस्फूर्त रूप से इन नियमों का पालन करना शुरू नहीं किया, तो आने वाले हफ्तों में जुर्माने की राशि और जब्ती की कार्रवाई और अधिक कठोर हो सकती है।






