नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों लोगों की नजरें इस समय आसमान की ओर टिकी हुई हैं। हर साल की तरह इस बार भी हर किसी को मानसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि इस साल मानसून समय से पहले देश के कई हिस्सों में दस्तक दे सकता है। केरल और उसके आस-पास के तटीय इलाकों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। इससे गर्मी से बेहाल लोगों को बड़ी राहत मिलनी शुरू हो गई है। हमारी ग्राउंड टीम ने इस मामले पर मौसम विशेषज्ञों से खास बातचीत की है।
शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल काफी अच्छी बताई जा रही है। समुद्र में बन रहे अनुकूल हालातों की वजह से यह तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि मंत्रालय भी इस स्थिति पर लगातार कड़ी नजर बनाए हुए है। देश के अन्नदाता यानी किसानों के लिए यह खबर किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। समय पर बारिश होने से धान और अन्य खरीफ फसलों की बुआई समय पर शुरू हो जाएगी। इससे पिछले साल की तुलना में बेहतर पैदावार की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
दक्षिण राज्यों में प्री-मानसून बारिश का दौर शुरू
केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई जिलों में पिछले चौबीस घंटों में झमाझम बारिश दर्ज की गई है। लोकल लोगों ने बताया कि अचानक बदले मौसम के मिज से तापमान में भारी गिरावट आई है। सड़कों पर जलभराव की छोटी-मोटी दिक्कतें जरूर सामने आई हैं। लेकिन लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद यह बारिश राहत लेकर आई है। मौसम विभाग ने मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की है। तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलने के पूरे आसार बने हुए हैं।
प्रशासन ने भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है। स्थानीय नगर निगम नालों की सफाई के काम में तेजी लाने का दावा कर रहे हैं। हालांकि कई जगहों पर अभी भी पोल खुलती नजर आ रही है। जनता का कहना है कि हर साल मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन थोड़ी सी बारिश में ही शहर की सड़कें तालाब बन जाती हैं। हमारी टीम ने कई इलाकों का दौरा करके इन कमियों को अपनी आंखों से देखा है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका असर
भारतीय अर्थव्यवस्था में मानसून का हमेशा से बहुत बड़ा और अहम योगदान रहा है। जब-जब बारिश अच्छी होती है, तब-तब ग्रामीण इलाकों में खरीदारी बढ़ती है। ट्रैक्टर, बीज और खाद की बिक्री में भी सीधे तौर पर उछाल देखने को मिलता है। इस बार मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि देश में सामान्य से अधिक बारिश होगी। अल-नीनो का प्रभाव कम होने से फसलों को पर्याप्त पानी मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे महंगाई पर भी लगाम लगने में काफी मदद मिलेगी।
ग्रामीण भारत के बाजारों में अभी से एक अलग ही हलचल और उत्साह देखने को मिल रहा है। किसान अपने खेतों की जुताई और बीजों की खरीदी की तैयारियों में जुट गए हैं। बैंक भी किसानों को समय पर कृषि ऋण देने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार की तरफ से भी खाद और बीज के पर्याप्त स्टॉक का दावा किया गया है। ग्रामीण जनता उम्मीद कर रही है कि इस बार सूखा या बाढ़ जैसी बड़ी आपदा नहीं आएगी।
मानसून के स्वागत के लिए प्रशासन और जनता की तैयारी
देश के उत्तर भारत के राज्यों में अभी भी भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। लोग सुबह से लेकर शाम तक चिलचिलाती धूप और लू से परेशान हैं। लेकिन मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान ने सभी के चेहरों पर थोड़ी मुस्कान ला दी है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जून के पहले हफ्ते तक राहत मिलने की उम्मीद है। बिजली और पानी की मांग इन दिनों अपने सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच चुकी है। बिजली विभाग पर भी ग्रिड संभालने का बहुत बड़ा दबाव लगातार बना हुआ है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल कहती है कि आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बहुत अहम हैं। हर किसी को बस पहली झमाझम बारिश का इंतजार है जो इस उमस भरी गर्मी को खत्म कर सके। नगर निगमों को चाहिए कि वे जल निकासी के पुख्ता इंतजाम जल्द से जल्द पूरे करें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी बेहद जरूरी है। हम इस बड़े मौसमी बदलाव पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे और हर नया अपडेट आप तक पहुंचाते रहेंगे।




