नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत की राजधानी दिल्ली में इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का बड़ा केंद्र बन गई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरे को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की एक अहम कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ सालों में सीमा विवाद और व्यापारिक पाबंदियों के कारण दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में तनातनी रही है। ऐसे में राष्ट्रपति जिनपिंग का यह दौरा कूटनीतिक नजरिए से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कूटनीतिक बैठकों और आधिकारिक वार्ताओं के अलावा, इस समय भारत और चीन से जुड़ी कई अन्य बड़ी खबरें भी सुर्खियों में हैं। एक तरफ जहां सीमा पर भारत की आंख और कान कहे जाने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल यानी आईटीबीपी के जवान हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दिलचस्प खुलासे सामने आ रहे हैं। इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने प्राचीन समुद्री मार्गों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के जरिए यह दिखाया है कि कैसे सदियों पहले चोल साम्राज्य के नाविकों और जहाजों का चीन के साथ गहरा व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क हुआ करता था।
शाओक्सिंग का प्राचीन शहर और सांस्कृतिक विरासत
चीनी संस्कृति और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए हाल ही में शाओक्सिंग के क्योंग कियाओ शहर की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल हो रहे हैं। चीन का यह दो हजार साल पुराना प्राचीन शहर अपनी पारंपरिक वास्तुकला और नहरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस शहर की पुरानी संस्कृति को आज भी बहुत सहेज कर रखा गया है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस शहर की सैर करने वाले वीडियो को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। इस प्राचीन शहर के जरिए यह भी देखा जा रहा है कि आधुनिक विकास के दौर में भी चीन ने अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को किस तरह संभाल कर रखा है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों की कड़ी में एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि चीन के कुछ हिस्सों में प्राचीन काल में भारतीय प्रभाव और तमिल वास्तुकला की झलक मिलती है। चोल राजाओं के समय के समुद्री अभियानों और व्यापारिक जहाजों के नक्शे इस बात की गवाही देते हैं कि भारत और चीन के बीच आवाजाही सदियों पुरानी है। आधुनिक तकनीक और 3डी मैप के जरिए अब इन प्राचीन समुद्री रास्तों को फिर से जीवंत किया जा रहा है। यह तकनीक लोगों को यह समझने में मदद कर रही है कि तब के नाविक किन रास्तों से होकर चीन की धरती पर पहुंचे थे।
हॉलीवुड फिल्मों पर चीन के कड़े नियम और पाबंदियां
सिनेमा और मनोरंजन जगत की बात करें तो चीन में हॉलीवुड फिल्मों को लेकर नियम लगातार सख्त होते जा रहे हैं। चीनी सेंसर बोर्ड विदेशी फिल्मों, खासकर अमेरिकी और हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों के प्रदर्शन पर बहुत कड़ी नजर रखता है। वहां की सरकार स्थानीय फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए हॉलीवुड फिल्मों की रिलीज और उनके बिजनेस पर कई तरह के नियंत्रण लगाती है। सिनेमाघरों में हॉलीवुड फिल्मों के लिए तय कोटा और वैचारिक पाबंदियों के कारण वैश्विक फिल्म निर्माताओं को चीन के बाजार में अपनी पकड़ बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, भारत के नजरिए से सीमा सुरक्षा का मुद्दा हमेशा से सबसे ऊपर रहा है। भारत-चीन सीमा पर तैनात आईटीबीपी के जवान हर मौसम में दुर्गम पहाड़ियों और बर्फीले इलाकों में देश की रक्षा कर रहे हैं। इन्हें भारत की सीमा का मजबूत पहरेदार कहा जाता है जो हर छोटी-बड़ी हरकत पर नजर रखते हैं। कूटनीतिक मंचों पर बातचीत चाहे जितनी भी आगे बढ़े, जमीनी स्तर पर चौकसी में कोई ढील नहीं दी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं और हर संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं।
कूटनीति और सुरक्षा के बीच भविष्य की राह
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस दिल्ली दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत होने की उम्मीद है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि सीमा विवाद जैसे जटिल मुद्दों का हल रातों-रात निकलना आसान नहीं है। भारत स्पष्ट रूप से यह संदेश दे रहा है कि संप्रभुता और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कूटनीतिक वार्ताओं का दौर अपनी जगह चल रहा है, लेकिन देश की सुरक्षा एजेंसियों का फोकस पूरी तरह से अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने पर है।






