बेंगलुरु/ग्राउंड ब्यूरो — कर्नाटक के चहेते स्टार पुनीत राजकुमार को लेकर अचानक इंटरनेट पर लोगों की उत्सुकता बहुत तेज हो गई है। गूगल ट्रेंड्स पर पिछले कुछ घंटों से उनके नाम को लेकर खोज में जबरदस्त उछाल देखा गया है। हर साल की तरह इस बार भी उनके फैंस अपने चहेते कलाकार को याद कर रहे हैं और उनके पुराने वीडियो देख रहे हैं। आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक आज इतनी बड़ी संख्या में लोग उनके बारे में क्यों खोज रहे हैं। हमारी टीम ने इस पूरी हलचल की तह तक जाने की कोशिश की है और पाया है कि लोगों का यह प्यार किसी एक दिन या मौके तक सीमित नहीं है।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ पुरानी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद यह ट्रेंड शुरू हुआ। पुनीत राजकुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह लाखों गरीबों के मसीहा थे जो बिना बताए चुपचाप लोगों की मदद करते थे। आज भी जब लोग उनके चैरिटी के कामों को याद करते हैं, तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। इंटरनेट पर लोग उनके द्वारा चलाए गए सामाजिक कार्यों और उनके सरल स्वभाव के बारे में खुलकर लिख रहे हैं। यह डिजिटल ट्रेंड इस बात का पक्का सबूत है कि एक अच्छा इंसान मरने के बाद भी दिलों में जिंदा रहता है।
कन्नड़ सिनेमा के पावर स्टार का आज भी अटूट असर
पुनीत राजकुमार यानी हमारे अपने 'अप्पू' ने बहुत कम उम्र में सिनेमा की दुनिया में बड़ा नाम कमाया था। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में ही अपनी अद्भुत कला का लोहा मनवा लिया था और बाद में एक बेहतरीन हीरो बने। उनके फैंस आज भी उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और उनकी फिल्मों को बार-बार देखते हैं। बेंगलुरु के केंतीरवा स्टूडियो में स्थित उनकी समाधि पर आज भी रोज हजारों लोग फूल चढ़ाने आते हैं। कर्नाटक की गलियों में, ऑटो रिक्शा पर और दीवारों पर बनी उनकी पेंटिंग आज भी लोगों को उनकी नेकी की याद दिलाती है।
सिनेमा जगत के जानकारों का मानना है कि पुनीत जैसी सादगी और लोकप्रियता बहुत कम लोगों को मिलती है। वह हमेशा अपने फैंस को 'बॉस' कहकर बुलाते थे क्योंकि उनका मानना था कि जनता ही असली मालिक है। जब उनका निधन हुआ था, तब पूरा देश स्तब्ध रह गया था और लाखों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए थे। आज भी जब कोई बड़ा सामाजिक मुद्दा या त्योहार आता है, तो लोग अप्पू को बहुत शिद्दत से याद करते हैं। उनकी फिल्मों के गाने आज भी हर घर में बजाए जाते हैं और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
दानवीरता और परोपकार की अनूठी मिसाल
अप्पू की सबसे बड़ी पहचान उनकी दरियादिली थी जिसके बारे में बहुत कम लोग उनके जीते जी जानते थे। वह दर्जनों अनाथ आश्रमों, स्कूलों और गोशालाओं का गुप्त रूप से खर्च उठाते थे और कभी इसका प्रचार नहीं करते थे। उनके जाने के बाद जब उनके बैंक खातों और परिवार की मदद से इन बातों का खुलासा हुआ, तो पूरी दुनिया हैरान रह गई। सबसे बड़ा कदम उन्होंने अपनी आंखें दान करके उठाया था, जिसके बाद कर्नाटक में नेत्रदान करने वालों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
आज भी राज्य के कई अस्पतालों में 'नेत्रदान जागरूकता अभियान' उनके नाम पर चलाए जाते हैं। आम जनता मानती है कि पुनीत ने अपने छोटे से जीवन में जितना काम किया, उतना लोग सौ साल में भी नहीं कर पाते हैं। जब भी इंटरनेट पर इस तरह के ट्रेंड सामने आते हैं, तो लोग उनके परोपकारी कामों को याद कर एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि लोग सिर्फ उनकी फिल्में देखकर मनोरंजन नहीं करते, बल्कि उनके द्वारा छोड़े गए समाज सेवा के रास्ते पर चलने की कोशिश भी कर रहे हैं।
युवाओं के बीच आज भी क्यों जिंदा हैं अप्पू
आज की युवा पीढ़ी के बीच पुनीत राजकुमार एक फिटनेस आइकन और प्रेरणास्त्रोत के रूप में जाने जाते हैं। वह खुद अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखते थे और युवाओं को भी नशे से दूर रहने की सलाह देते थे। उनके जिम वर्कआउट और डांस के वीडियो आज भी इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर खूब देखे जाते हैं। युवा वर्ग उनके अनुशासित जीवन और बड़ों के प्रति आदर भाव से बहुत कुछ सीखता है। यही वजह है कि नई पीढ़ी के लड़के-लड़कियां भी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और उनके नक्शेकदम पर चलना चाहते हैं।
द फ्रीलान्स की इस पड़ताल से साफ है कि पुनीत राजकुमार सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक विचार बन चुके हैं। इंटरनेट पर आने वाले ऐसे ट्रेंड्स यह बताते हैं कि प्यार और नेकी से जीता गया दिल कभी नहीं मरता। कर्नाटक की मिट्टी से जुड़े इस महान कलाकार की यादें आने वाले कई दशकों तक लोगों के दिलों में यूं ही ताजा रहेंगी। फैंस की यही दीवानगी साबित करती है कि 'अप्पू' हमारे बीच हमेशा अमर हैं और उनकी अच्छाई की रोशनी हमेशा रास्ता दिखाती रहेगी।










