मंडी हाउस के पास तिरंगा मार्च के दौरान हुई कार्रवाई
देश की राजधानी दिल्ली में छात्र राजनीति से जुड़ा एक बड़ा मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की शोधार्थी नेहा बोरा को पुलिस ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ले लिया। यह पूरी घटना तब हुई जब वह 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने के लिए जा रही थीं। इस कार्रवाई के बाद से ही छात्र संगठनों में भारी रोष व्याप्त है और वे लगातार पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की शाम को मंडी हाउस के पास यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। नेहा बोरा बिना किसी पूर्व बड़े अंतराल के इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और अपनी कस्टडी में ले लिया। इस दौरान वहां मौजूद सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। छात्र नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया है।
विशाल ददलानी के सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उस समय सनसनी फैल गई जब प्रसिद्ध पार्श्व गायक और संगीतकार विशाल ददलानी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने दावा किया कि नेहा बोरा को पुलिस किसी निजी वाहन में बैठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है और उनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। विशाल ददलानी ने अपने पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए तीखे सवाल पूछे और देश की राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
विशाल ददलानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि इस तरह से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं को हिरासत में लेना और उनके ठिकाने को गुप्त रखना बेहद चिंताजनक है। उनके इस पोस्ट के बाद इंटरनेट मीडिया पर #WhereIsNeha ट्रेंड करने लगा। देश भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र और मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मामले में तुरंत स्पष्टीकरण देने की मांग करने लगे।
"देश की राजधानी में इस प्रकार से युवा नेताओं को उठाना और उनके ठिकाने की जानकारी परिजनों व वकीलों को न देना लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर बड़ा प्रहार है। क्या शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना अब अपराध बन गया है?"— ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), आधिकारिक बयान
घंटों तक थाने-थाने घुमाने और वकीलों को न मिलने देने का आरोप
छात्र संगठन AISA और अन्य समर्थकों का यह भी आरोप है कि नेहा बोरा को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें तुरंत किसी निश्चित स्थान पर पेश नहीं किया। रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तारी के करीब सात घंटे बाद उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन लाया गया। इस दौरान उनके वकीलों को भी उनसे मिलने से रोका गया, जिससे वकीलों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। संगठन का कहना है कि यह केवल एक हिरासत नहीं बल्कि एक प्रकार से अवैध तरीके से गायब करने जैसा मामला है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरके पुरम थाने में कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की जा रही है और उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने की तैयारी है। हालांकि, छात्र नेताओं का कहना है कि पुलिस प्रशासन लगातार इस मामले में पारदर्शिता बरतने से बच रहा है। हिरासत में लिए गए अन्य कार्यकर्ताओं और संस्थापकों की सटीक स्थिति को लेकर भी अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, जिसके कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
छात्र राजनीति और जन आंदोलनों पर बढ़ता प्रशासनिक शिकंजा
नेहा बोरा का यह पूरा मामला केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश भर में छात्र आंदोलनों और असहमति की आवाजों पर प्रशासन द्वारा कसे जा रहे शिकंजे पर एक नई बहस को जन्म दे रहा है। नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की पैदाइश हैं और बंगाल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्तमान में दिल्ली में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वे नागरिकता संशोधन कानून (CAA), शिक्षा सुधारों और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय रखती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी और अधिक बढ़ सकती है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक मंचों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अदालत से लेकर सड़कों तक राजनीतिक और कानूनी संघर्ष तेज होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।











