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मनोरंजनपढ़ने में समय: 5 मिनट

UPI पर 0.4% चार्ज लगने से पहले आया बड़ा अपडेट, क्या जनवरी तक टल सकता है नया नियम

यूपीआई से दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर चार्ज लगने की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नियम पंद्रह अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन अब नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से एक नया अपडेट सामने आया है। क्या त्योहारों के इस सीजन में आम लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है और यह नियम जनवरी तक टल सकता है, आइए जानते हैं पूरी खबर।
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सिनेमा एवं मनोरंजन डेस्क, द फ्रीलांस
सिनेमा व संस्कृति डेस्क•8 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•51
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UPI पर 0.4% चार्ज लगने से पहले आया बड़ा अपडेट, क्या जनवरी तक टल सकता है नया नियम
📷 UPI पर 0.4% चार्ज लगने से पहले आया बड़ा अपडेट, क्या जनवरी तक टल सकता है नया नियम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • यूपीआई से दो हजार रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर चार्ज लगने की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नियम पंद्रह अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन अब नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से एक नया अपडेट सामने आया है। क्या त्योहारों के इस सीजन में आम लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है और यह नियम जनवरी तक टल सकता है, आइए जानते हैं पूरी खबर।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश में हर रोज करोड़ों लोग चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक में फोनपे, गूगल पे या पेटीएम के जरिए चुटकियों में भुगतान करते हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर तेजी से फैल रही थी कि यूपीआई के जरिए दो हजार रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इस संभावित नियम को मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर नाम दिया गया है, जिसके तहत शून्य दशमलव चार प्रतिशत तक चार्ज लगने की बात कही जा रही थी। आम आदमी और छोटे दुकानदारों के बीच यह चर्चा का बड़ा विषय बन गया था कि क्या अब डिजिटल भुगतान करना महंगा होने वाला है।

शुरुआती खबरों में यह दावा किया गया था कि पंद्रह अक्टूबर से यह नया नियम देश भर में लागू कर दिया जाएगा, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा था। हालांकि, जैसे ही यह खबर इंटरनेट पर वायरल हुई, वैसे ही डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई। लोग यह जानना चाहते थे कि क्या सरकार या नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई इस फैसले पर फिर से विचार कर रहा है। त्योहारों का सीजन बिलकुल नजदीक है और ऐसे समय में किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क त्योहारों की रौनक फीकी कर सकता है।

क्या पंद्रह अक्टूबर से सचमुच लागू होने वाला था चार्ज

बाजार में चल रही तमाम चर्चाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच अब एनपीसीआई की तरफ से एक ताजा अपडेट सामने आया है, जो लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर लेकर आया है। सूत्रों के मुताबिक पंद्रह अक्टूबर से यूपीआई पेमेंट पर किसी भी तरह का नया चार्ज लगने की बात पूरी तरह पक्की नहीं है और इस पर अभी मंथन चल रहा है। वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, ऐसे में अचानक कोई भारी शुल्क लगाना ग्राहकों के हित में नहीं होगा। छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का भी कहना है कि अगर ऐसा कोई नियम आता है तो लोग फिर से कैश यानी नकद पैसों की तरफ लौट सकते हैं, जिससे डिजिटल इंडिया का सपना कमजोर होगा।

इस पूरे मामले पर जब हमने जमीनी स्तर पर दुकानदारों से बातचीत की तो उनका दर्द साफ झलकता हुआ दिखाई दिया। दिल्ली के एक स्थानीय बाजार में परचून की दुकान चलाने वाले रमेश कुमार ने बताया कि उनके यहां ज्यादातर ग्राहक छोटे सामानों के लिए भी यूपीआई का ही इस्तेमाल करते हैं। यदि सरकार या बैंक इस पर कोई भी अतिरिक्त शुल्क लगाते हैं, तो ग्राहकों से उसे वसूलना बहुत मुश्किल हो जाएगा क्योंकि ग्राहक लड़ाई करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों के इस सीजन में लोग वैसे ही काफी खर्च करते हैं, ऐसे में यदि कोई नया टैक्स या चार्ज जुड़ जाता है तो व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा।

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क्या जनवरी तक टल सकता है यूपीआई एमडीआर का यह नियम

ताजा अंदरूनी खबरों और बैंकिंग सेक्टर से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आ रही है कि इस नियम को लागू करने की समय-सीमा को आगे बढ़ाया जा सकता है। यानी यह संभव है कि पंद्रह अक्टूबर के बजाय इस नए नियम को अगले साल यानी जनवरी तक टाल दिया जाए। एनपीसीआई और भारतीय रिजर्व बैंक सभी पक्षों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं ताकि इस बात पर सहमति बन सके कि डिजिटल पेमेंट का ढांचा बिना किसी रुकावट के चलता रहे। बैंक और फिनटेक कंपनियां चाहती हैं कि उन्हें भी उनके काम के बदले कुछ कमाई हो, लेकिन दूसरी तरफ सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आम आदमी पर महंगाई का कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

आने वाले कुछ दिनों में इस पर कोई आधिकारिक और अंतिम आदेश आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। तब तक के लिए देश के करोड़ों यूपीआई उपभोक्ताओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि फिलहाल उनका हर डिजिटल ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया आधिकारिक बयान आएगा, हम सबसे पहले आप तक उसकी सटीक जानकारी पहुंचाएंगे।

त्योहारों के सीजन में ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर

दिवाली और धनतेरस जैसे बड़े त्योहारों से पहले इस तरह की खबरों का आना ग्राहकों की धड़कनें बढ़ा देता है, लेकिन ताजा अपडेट ने फिलहाल राहत की सांस लेने का मौका दिया है। अर्थशास्त्रियों का भी यही मानना है कि भारत में डिजिटल भुगतान की क्रांति को जीवित रखने के लिए सरकार को बहुत फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। जब तक कोई आधिकारिक सर्कुलर जारी नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमारे रिपोर्टर ने जब कुछ प्रमुख डिजिटल वॉलेट कंपनियों के अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्होंने भी यही कहा कि ग्राहक बिना किसी डर के अपने सामान्य लेन-देन जारी रख सकते हैं।

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