नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद और समर्थन का दौर तेजी से सामने आ रहा है। राहुल गांधी, एमके स्टालिन, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे जैसे बड़े नेताओं ने सीजेपी का साथ दिया है। इस बड़े समर्थन के बाद अभिजीत दीपके ने खुलकर सभी का शुक्रिया अदा किया है। यह मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है और इस पर लगातार नए राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं।
दिल्ली लौटते वक्त अभिजीत दीपके ने सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात की और उन्हें बहुत-बहुत शुक्रिया कहा। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल वक्त में विपक्ष के इन दिग्गज नेताओं का साथ मिलना बहुत बड़ी बात है। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखा हमला बोल रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर एक बड़ी भविष्यवाणी की है और इसे विपक्षी दलों की राजनीतिक रणनीति करार दिया है।
विपक्ष का साथ और अभिजीत दीपके का आभार
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अभिजीत दीपके को मिल रहे इस समर्थन से समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। सौरव और आशुतोष की हिरासत के बाद दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके का कहना है कि सरकार विरोधी आवाज़ों को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जनता सब देख रही है और सही समय पर जवाब देगी।
इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब एक अमेरिकी सिंगर ने बयान दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अभिजीत दीपके को मोदी विरोधी कामों के लिए अमेरिका से फंडिंग मिल रही है। इस विदेशी बयान के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों ने जहां इसे सरकार की साजिश बताया है, वहीं भाजपा ने इस मुद्दे पर हमलावर रुख अपनाते हुए कई तीखे सवाल खड़े किए हैं।
विदेशी फंडिंग के आरोपों पर गरमाई सियासत
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि देश के खिलाफ साजिश रचने वालों को अब विदेशी ताकतों का भी साथ मिल रहा है। भाजपा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है। पार्टी का दावा है कि जनता इन सभी चालों को अच्छी तरह समझती है और आगामी चुनावों में इसका मुँहतोड़ जवाब देगी।
जमीनी स्तर पर आम लोगों के बीच भी इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं तो कुछ इसे अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई बता रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासत और अधिक गरमाने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
आगामी राजनीतिक रणनीति और ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि पर्दे के पीछे कौन-कौन से राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। क्या वाकई इस लड़ाई को विदेशी समर्थन मिल रहा है या यह सिर्फ घरेलू राजनीति का एक हिस्सा है। जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, हम अपने पाठकों के सामने सच को पूरी स्पष्टता के साथ रखते रहेंगे।








